भिवंडी,31 जुलाई (युआईटीवी)- महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी शहर में गुरुवार देर रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। यहाँ एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई,जिसमें अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के अनुसार,मलबे के नीचे अभी भी दो से तीन लोगों के फँसे होने की आशंका है। राहत और बचाव दल पूरी रात और शुक्रवार सुबह तक लगातार अभियान चलाते रहे। स्थानीय प्रशासन,दमकल विभाग,पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें मिलकर मलबे को हटाने और संभावित रूप से फँसे लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटी हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह हादसा गुरुवार रात करीब साढ़े ग्यारह बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इमारत अचानक तेज आवाज के साथ ढह गई,जिससे आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि भवन की संरचना को मजबूत करने के लिए कुछ हिस्सों में निर्माण और मरम्मत की जा रही थी। इसी दौरान खतरे की आशंका को देखते हुए वहां काम कर रहे कई मजदूरों ने पहले ही इमारत खाली कर दी थी। माना जा रहा है कि यदि मजदूर समय रहते बाहर नहीं निकलते तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के अधिकारियों ने बताया कि राहत कार्य बेहद सावधानी से किया जा रहा है क्योंकि मलबे के नीचे अभी भी लोगों के फँसे होने की संभावना बनी हुई है। भारी मशीनों के साथ-साथ हाथों से भी मलबा हटाया जा रहा है,ताकि किसी भी जीवित व्यक्ति को नुकसान न पहुँचे। बचाव दल मलबे के भीतर जीवन के संकेत तलाशने के लिए आधुनिक उपकरणों का भी उपयोग कर रहा है।
हादसे में जीवित बचे लोगों के बयान इस दुर्घटना की भयावहता को बयां करते हैं। दीपक कुमार यादव ने बताया कि पास की एक इमारत के खंभों पर मरम्मत का काम चल रहा था। रात का खाना खाने के बाद सभी लोग अपने-अपने कमरों में सोने चले गए थे। तभी अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। उन्होंने कहा कि जब वे बाहर की ओर भागे तो चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल था। अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने पहली मंजिल से छलांग लगा दी। उनके अनुसार कुछ ही क्षणों में पूरी इमारत मलबे में बदल गई।
हादसे के बाद अपने पति की तलाश में घटनास्थल पर पहुँची नेहा सिंह की व्यथा ने वहाँ मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति यह कहकर नीचे गए थे कि उन्हें कुछ देखना है। उनके नीचे जाने के लगभग दस मिनट बाद ही इमारत गिर गई। उस समय उनकी तबीयत ठीक नहीं थी,इसलिए वे ऊपर ही रुकी हुई थीं। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद से उनके पति रंजीत सिंह का कोई पता नहीं चल पाया है। उनका मोबाइल फोन लगातार बज रहा है,लेकिन दूसरी ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि राहत दल जल्द-से-जल्द उनके पति को सुरक्षित बाहर निकाल सके।
एक अन्य पीड़िता संगीता प्रजापति ने बताया कि वह हादसे के समय इमारत के पार्किंग क्षेत्र में खड़ी थीं। तभी उन्हें भवन के भीतर से चटकने जैसी आवाज सुनाई दी। उन्होंने तुरंत वहां से भागने की कोशिश की,लेकिन इससे पहले कि वह सुरक्षित स्थान तक पहुँची पातीं, पूरी इमारत गिर गई। इस दुर्घटना में उन्हें चोटें आई हैं और उनका उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि लोगों को सँभलने का मौका तक नहीं मिला।
हादसे में घायल अभय कुमार यादव ने बताया कि वह रात के भोजन के बाद अपने कमरे में थे,तभी अचानक जोरदार आवाज सुनाई दी। उन्होंने और उनके साथ मौजूद लोगों ने तुरंत बाहर निकलने की कोशिश की,लेकिन बाहर जाने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं मिल रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने पहली मंजिल से छलांग लगा दी,जिससे उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। उन्होंने बताया कि कुछ समय बाद स्थानीय लोग सीढ़ियाँ लेकर पहुँचे और उनकी मदद से बाकी लोग सुरक्षित बाहर निकल सके। अभय कुमार यादव के अनुसार हादसे के समय इमारत के भीतर लगभग 25 से 30 लोग मौजूद थे,जबकि पूरी इमारत में करीब 45 कमरे थे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इमारत गिरने के तुरंत बाद आसपास रहने वाले लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास किया और पुलिस तथा आपदा राहत एजेंसियों को सूचना दी। थोड़ी ही देर में पुलिस, दमकल विभाग और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें मौके पर पहुँच गईं। इसके बाद संगठित तरीके से बचाव अभियान शुरू किया गया।
राहत कार्य में सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि इमारत का मलबा कई मंजिलों तक एक-दूसरे के ऊपर जमा हो गया था। ऐसे में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी से मलबे के नीचे दबे लोगों की जान को खतरा हो सकता था। यही कारण है कि बचाव दल अत्यंत सावधानी के साथ एक-एक हिस्से को हटाकर तलाशी अभियान चला रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे के नीचे कोई व्यक्ति नहीं बचा है,तब तक अभियान जारी रहेगा।
प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से खाली करा दिया है और लोगों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। इसके अलावा आसपास स्थित अन्य इमारतों की भी जाँच शुरू कर दी गई है,ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं वे भी किसी प्रकार के संरचनात्मक खतरे की स्थिति में तो नहीं हैं।
प्रारंभिक जाँच में यह सामने आया है कि हादसे के समय इमारत में मरम्मत का कार्य चल रहा था। हालाँकि,भवन गिरने का वास्तविक कारण विस्तृत तकनीकी जाँच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को जाँच के निर्देश दिए हैं और भवन की निर्माण गुणवत्ता,रखरखाव तथा मरम्मत कार्य से जुड़े सभी पहलुओं की जाँच की जाएगी।
भिवंडी में हुई इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर भवनों का तकनीकी निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार कराया जाना बेहद जरूरी है। साथ ही मरम्मत के दौरान सुरक्षा उपायों का पालन भी अनिवार्य होना चाहिए ताकि इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल है। राहत एजेंसियाँ मलबे में फँसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं,जबकि परिजन अपने प्रियजनों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद में घटनास्थल पर डटे हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि बचाव अभियान पूरी तरह समाप्त होने के बाद ही मृतकों और घायलों की अंतिम संख्या स्पष्ट हो सकेगी। इस बीच पूरे राज्य की निगाहें भिवंडी में चल रहे राहत और बचाव अभियान पर टिकी हुई हैं।
