ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (तस्वीर क्रेडिट@RohanBhadauriy1)

ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन,भारत को वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल

नई दिल्ली/ग्वालियर,31 जुलाई (युआईटीवी)- भारत को वैश्विक टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (टीएमजेड) मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थापित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए केंद्रीय संचार मंत्रालय और मध्य प्रदेश सरकार के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के बीच नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने इस परियोजना को न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में नई शुरुआत बताया।

समझौते के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत,मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल दूरसंचार सेवाओं का उपभोक्ता या प्रदाता बनकर नहीं रह सकता,बल्कि उसे विश्व स्तर पर टेलीकॉम उपकरणों के निर्माण और निर्यात में अग्रणी भूमिका निभानी होगी। इसी सोच के साथ ग्वालियर में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन विकसित किया जा रहा है।

सिंधिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश तेजी से औद्योगिक विकास की नई पहचान बना रहा है। राज्य में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है और विभिन्न क्षेत्रों में बड़े उद्योगों को आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्वालियर में स्थापित होने वाला यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा और राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों की श्रेणी में और मजबूत स्थान दिलाएगा।

इस परियोजना के तहत ग्वालियर में लगभग 350 एकड़ भूमि पर आधुनिक प्लग-एंड-प्ले मॉडल के आधार पर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन विकसित किया जाएगा। प्लग-एंड-प्ले मॉडल का उद्देश्य उद्योगों को पहले से तैयार बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना है,ताकि कंपनियां बिना किसी देरी के अपने उत्पादन कार्य शुरू कर सकें। इससे निवेशकों का समय और लागत दोनों कम होंगे तथा उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया तेज होगी।

केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि परियोजना के पहले चरण के लिए केंद्र सरकार ने आधारभूत ढांचे के विकास हेतु 500 करोड़ रुपये की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है। इस राशि का उपयोग सड़क,बिजली,जलापूर्ति,डिजिटल कनेक्टिविटी, परीक्षण प्रयोगशालाओं और अन्य आधुनिक औद्योगिक सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसा औद्योगिक परिसर तैयार करना है,जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो और वैश्विक कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित कर सके।

ग्वालियर का यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन केवल उत्पादन इकाइयों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसे एक समग्र तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहाँ मोबाइल फोन,नेटवर्क उपकरण,फाइबर ऑप्टिक्स,सेमीकंडक्टर,5जी और 6जी जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों के अनुसंधान,डिजाइन,विकास,परीक्षण और विनिर्माण की एकीकृत सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। इससे भारत में अत्याधुनिक तकनीक का विकास होगा और देश वैश्विक दूरसंचार उद्योग में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत कर सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि दूरसंचार क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों को देखते हुए भारत के लिए इस तरह का समर्पित मैन्युफैक्चरिंग जोन समय की बड़ी आवश्यकता है। दुनिया भर में 5जी तकनीक का विस्तार हो रहा है,जबकि कई देश 6जी तकनीक के विकास पर भी काम शुरू कर चुके हैं। ऐसे समय में यदि भारत अनुसंधान और विनिर्माण दोनों क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता है,तो वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

इस परियोजना से बड़े पैमाने पर निवेश आने की भी संभावना है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने बताया कि टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के माध्यम से मध्य प्रदेश में लगभग 3,500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने का अनुमान है। यह निवेश दूरसंचार उपकरणों के निर्माण,अनुसंधान,परीक्षण और अन्य सहायक उद्योगों के विकास में किया जाएगा। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होगा।

रोजगार के क्षेत्र में भी इस परियोजना को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के अनुसार इस जोन के विकसित होने से लगभग 14,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रत्यक्ष रोजगार के अंतर्गत उत्पादन इकाइयों,अनुसंधान केंद्रों,परीक्षण प्रयोगशालाओं और प्रबंधन से जुड़े पद शामिल होंगे,जबकि अप्रत्यक्ष रोजगार परिवहन,लॉजिस्टिक्स,सेवा क्षेत्र,छोटे एवं मध्यम उद्योगों तथा अन्य सहायक गतिविधियों के माध्यम से सृजित होंगे।

सिंधिया ने कहा कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के युवाओं को मिलेगा। अब उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी रोजगार के लिए दूसरे राज्यों या महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। आधुनिक उद्योगों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार और करियर के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। इससे क्षेत्र में कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

परियोजना में कई प्रतिष्ठित कंपनियों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि डिक्सन टेक्नोलॉजीज,एचएफसीएल और तेजस नेटवर्क्स जैसी प्रमुख कंपनियाँ इस टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश करेंगी। इन कंपनियों की भागीदारी से परियोजना को तकनीकी विशेषज्ञता,आधुनिक उत्पादन क्षमता और वैश्विक बाजार तक पहुँच का लाभ मिलेगा। साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी बड़े अवसर पैदा होंगे,क्योंकि बड़ी कंपनियों के साथ सहायक इकाइयों का विकास भी तेजी से होगा।

परियोजना के प्रभावी संचालन और दीर्घकालिक विकास के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) का गठन किया जाएगा। इस संस्थागत व्यवस्था में मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत तथा दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। यह एसपीवी परियोजना के वित्तीय प्रबंधन,निवेश आकर्षित करने,आधारभूत ढाँचे के विकास और औद्योगिक गतिविधियों के समन्वय का कार्य करेगा। इससे परियोजना के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित की जा सकेगी।

केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने इस परियोजना को सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य सरकारें साझा लक्ष्य के साथ मिलकर काम करती हैं तो राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएँ तेजी से साकार होती हैं। ग्वालियर में स्थापित होने वाला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन इसी सहयोग की मिसाल है,जहाँ दोनों सरकारें मिलकर भारत के तकनीकी भविष्य को मजबूत बनाने का कार्य कर रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को केवल आयात पर निर्भर रहने वाला देश नहीं,बल्कि ऐसा राष्ट्र बनना चाहिए जिस पर पूरी दुनिया तकनीकी उत्पादों और दूरसंचार उपकरणों के लिए निर्भर हो। आत्मनिर्भर भारत अभियान का मूल उद्देश्य भी यही है कि देश में आधुनिक तकनीकों का विकास हो,घरेलू उत्पादन बढ़े और भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार विनिर्माण नीति को नई दिशा देगी। वर्तमान समय में वैश्विक कंपनियाँ अपनी उत्पादन इकाइयों का विस्तार नए देशों में कर रही हैं और भारत तेजी से एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनकर उभरा है। ऐसे में ग्वालियर का टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन विदेशी निवेश,तकनीकी सहयोग और निर्यात क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ग्वालियर में स्थापित होने वाला यह देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं,बल्कि भारत के तकनीकी,आर्थिक और औद्योगिक भविष्य की मजबूत नींव माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक,बड़े निवेश,व्यापक रोजगार और अनुसंधान आधारित विकास के माध्यम से यह परियोजना न केवल मध्य प्रदेश को नई औद्योगिक पहचान देगी,बल्कि भारत को वैश्विक टेलीकॉम उत्पादन क्षेत्र में अग्रणी देशों की श्रेणी में पहुंचाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। आने वाले वर्षों में यह जोन देश के दूरसंचार उद्योग,इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और नवाचार आधारित विकास का प्रमुख केंद्र बन सकता है तथा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।