नई दिल्ली,31 जुलाई (युआईटीवी)- दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में पूर्व जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र उमर खालिद की नियमित और अंतरिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा है। अदालत ने दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख तय की है। इसी दिन इस मामले के सह-आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर भी सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं,जहाँ दिल्ली पुलिस अपना पक्ष अदालत के सामने रखेगी।
शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने उमर खालिद की नियमित जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने अंतरिम जमानत की माँग वाली याचिका पर भी दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित की।
उमर खालिद ने हाईकोर्ट का दरवाजा उस समय खटखटाया,जब निचली अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को उमर खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम दोनों की जमानत याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद दोनों आरोपियों ने राहत पाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की।
ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत दर्ज मामलों में लंबे समय तक मुकदमा चलने के आधार पर जमानत देने का कानूनी प्रश्न फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय की बड़ी पीठ के विचाराधीन है। अदालत ने कहा कि जब तक इस महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता,तब तक केवल मुकदमे में देरी को आधार बनाकर जमानत देना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
यह पहला अवसर नहीं है,जब उमर खालिद ने अदालत से जमानत की माँग की हो। इससे पहले भी उन्होंने दो बार जमानत के लिए अदालतों का रुख किया था। उनके मामलों पर विभिन्न स्तरों पर सुनवाई हुई और अंततः सर्वोच्च न्यायालय तक उनकी याचिकाएँ पहुँचीं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी। अब एक बार फिर उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में नियमित और अंतरिम जमानत के लिए याचिका दायर की है।
शरजील इमाम ने भी ट्रायल कोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया है। अदालत ने दोनों मामलों को लगभग समान समय पर सूचीबद्ध किया है और 27 अगस्त को दोनों की याचिकाओं पर सुनवाई होने की संभावना है। चूँकि,दोनों मामलों का संबंध एक ही प्राथमिकी और एक ही कथित साजिश से जुड़ा है,इसलिए अदालत इन मामलों की सुनवाई समान कानूनी संदर्भ में कर रही है।
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है। उस समय नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन और विरोध के बीच तनाव बढ़ने के बाद कई इलाकों में व्यापक हिंसा भड़क उठी थी। इन दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी,जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। बड़ी संख्या में घरों,दुकानों,वाहनों और अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुँचा था। राजधानी में हुई इस हिंसा ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था और इसके बाद पुलिस ने विस्तृत जाँच शुरू की थी।
दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने अपनी जाँच के दौरान दावा किया कि दंगे किसी अचानक हुई घटना का परिणाम नहीं थे,बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश थी। जाँच एजेंसी ने आरोप लगाया कि कई लोगों ने मिलकर हिंसा की योजना बनाई थी। इसी मामले में उमर खालिद,शरजील इमाम और कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने विभिन्न बैठकों और गतिविधियों के माध्यम से दंगे भड़काने की साजिश रची थी।
उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं और तभी से जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि उनके खिलाफ एकत्र किए गए साक्ष्य उन्हें कथित साजिश का हिस्सा बताते हैं,जबकि उमर खालिद लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और उन्हें निराधार बताते हैं।
इस मामले में यूएपीए के प्रावधान लागू होने के कारण जमानत प्राप्त करना सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में अधिक कठिन माना जाता है। इस कानून के तहत अदालत को जमानत देने से पहले यह संतुष्ट होना होता है कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई आधार नहीं है। यही कारण है कि इस मामले में अब तक विभिन्न अदालतों ने जमानत देने से इनकार किया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित व्यापक कानूनी प्रश्न का असर भी निचली अदालतों के फैसलों पर पड़ रहा है। यदि सर्वोच्च न्यायालय भविष्य में यह स्पष्ट करता है कि लंबे समय तक मुकदमा लंबित रहने की स्थिति में यूएपीए मामलों में किन परिस्थितियों में जमानत दी जा सकती है,तो उसका प्रभाव ऐसे मामलों पर भी पड़ सकता है।
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिल्ली पुलिस से जवाब माँगना प्रक्रिया का हिस्सा है,जिसके तहत अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का निर्णय लेगी। अगली सुनवाई में दिल्ली पुलिस अपनी आपत्तियाँ और तर्क अदालत के सामने रखेगी,जबकि याचिकाकर्ता की ओर से जमानत के समर्थन में विस्तृत दलीलें दी जाएँगी। इसके बाद अदालत मामले के तथ्यों,उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय करेगी।
वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले को देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है। इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है और विभिन्न स्तरों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है। ऐसे में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई को भी कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा है और 27 अगस्त को अगली सुनवाई के दौरान इस मामले पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
