अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (तस्वीर क्रेडिट@AmirMCH5)

ट्रंप-शी जिनपिंग की अहम मुलाकात आज,ईरान से लेकर व्यापार और एआई सुरक्षा तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा

वॉशिंगटन,24 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुरुवार को व्हाइट हाउस में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेजबानी करेंगे। दोनों नेताओं के बीच होने वाली यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका और चीन के संबंधों में व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक संघर्षों को लेकर कई अहम मुद्दे मौजूद हैं। बैठक के एजेंडे में ईरान का मुद्दा प्रमुख रूप से शामिल होने की पुष्टि खुद ट्रंप ने की है। इसके अलावा व्यापारिक संबंधों, बाजार तक पहुँच, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की सुरक्षा, चीन में हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों से जुड़े विषयों पर भी बातचीत होने की संभावना है।

ट्रंप ने बुधवार शाम पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि वह शी जिनपिंग के साथ ईरान के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। इससे दोनों नेताओं की बैठक में शामिल कम से कम एक महत्वपूर्ण विषय को लेकर स्थिति साफ हो गई। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक के संभावित एजेंडे के बारे में विस्तार से जानकारी देने से इनकार किया था। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान का विषय उनकी बातचीत का हिस्सा होगा, तो उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे के साथ-साथ कई अन्य विषयों पर भी चीन के राष्ट्रपति से चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ मामलों में बातचीत पहले से आगे बढ़ रही है।

शी जिनपिंग बुधवार को अमेरिका पहुँचे। उनके विमान के जॉइंट बेस एंड्रयूज पर उतरने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने उनका औपचारिक स्वागत किया। चीनी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया था। इस दौरान उन्हें तोपों से औपचारिक सलामी दी गई और दो बी-1 बमवर्षक विमानों ने आसमान में उड़ान भरी। स्वागत समारोह के बाद दोनों देशों के बीच गुरुवार को होने वाली शीर्ष स्तर की बातचीत के लिए मंच तैयार हो गया।

गुरुवार के कार्यक्रम में व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग का औपचारिक स्वागत समारोह और शाम को आयोजित होने वाला स्टेट डिनर प्रमुख कार्यक्रम हैं। हालाँकि,इन औपचारिक कार्यक्रमों के बीच दोनों नेताओं की आमने-सामने होने वाली बातचीत को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच संबंधों से जुड़े ऐसे मुद्दे सामने आ सकते हैं, जिनका असर आने वाले समय में वैश्विक व्यापार और रणनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

बैठक से पहले अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्य ट्रंप प्रशासन से चीन के साथ बातचीत में ठोस परिणाम हासिल करने की माँग कर रहे हैं। अमेरिकी सांसदों की प्राथमिकताओं में चीन के बाजार में अमेरिकी कंपनियों और कृषि उत्पादों की बेहतर पहुंच, अत्याधुनिक तकनीकों की सुरक्षा तथा विदेशों में अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं। इन माँगों के बीच दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच व्यापार को लेकर बातचीत पहले ही हो चुकी है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को न्यूयॉर्क में बताया कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रविवार को चीन के प्रतिनिधियों के साथ व्यापार संबंधी विषयों पर बातचीत की थी। रुबियो के अनुसार,दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत खुली और सीधे मुद्दों पर केंद्रित थी। इससे संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति स्तर की बैठक से पहले दोनों देशों के अधिकारी व्यापार से जुड़े संवेदनशील विषयों पर अपना पक्ष एक-दूसरे के सामने रख चुके हैं।

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा रहा है। बाजार तक पहुँच,अमेरिकी कृषि उत्पादों की चीन में बिक्री, व्यापारिक वादों का पालन और दोनों देशों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि चीन अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराए,जबकि चीन के लिए भी अमेरिकी नीतियों और व्यापारिक प्रतिबंधों का मुद्दा महत्वपूर्ण है। ऐसे में ट्रंप और शी के बीच होने वाली बातचीत से यह पता चल सकता है कि दोनों देश व्यापारिक मतभेदों को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।

कृषि व्यापार को लेकर भी अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन के सामने अपनी प्राथमिकताएं रखी हैं। रिपब्लिकन सीनेटर पीट रिकेट्स और प्रतिनिधि सभा के सदस्य जैक नन ने प्रशासन से माँग की है कि चीन अमेरिकी सोयाबीन की नियमित और भरोसेमंद खरीद सुनिश्चित करे। इसके साथ ही अमेरिकी बीफ के लिए चीन के बाजार में बेहतर पहुँच की माँग भी की गई है। उनका जोर केवल मौजूदा व्यापारिक वादों को लागू कराने पर नहीं, बल्कि अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए चीनी बाजार को और अधिक खोलने पर है।

हालाँकि,इन माँगों को अमेरिका और चीन के बीच किसी संभावित समझौते का हिस्सा नहीं माना जा सकता। ये अमेरिकी सांसदों की ओर से ट्रंप प्रशासन को दिए गए सुझाव और अपेक्षाएँ हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इन सभी विषयों को ट्रंप और शी जिनपिंग की आधिकारिक बातचीत में समान स्तर पर जगह मिलेगी या नहीं। अंतिम एजेंडा दोनों नेताओं की बैठक के दौरान सामने आने वाली चर्चा और उसके बाद जारी होने वाली जानकारी से ही स्पष्ट होगा।

व्यापार के अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सुरक्षा भी बातचीत का एक महत्वपूर्ण संभावित विषय है। डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस वैन होलेन के नेतृत्व में 17 अमेरिकी सीनेटरों ने ट्रंप से चीन के साथ एआई सुरक्षा को लेकर किसी समझौते की दिशा में काम करने का आग्रह किया है। सांसदों का मानना है कि एआई तकनीक के तेजी से विकास के बीच अमेरिका और चीन जैसे प्रमुख तकनीकी देशों के बीच कुछ साझा सुरक्षा मानकों पर चर्चा की आवश्यकता है।

अमेरिकी सांसदों की ओर से सुझाए गए उपायों में एआई प्रणालियों के लिए साझा परीक्षण मानक विकसित करना,अत्याधुनिक एआई सिस्टम की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और दोनों देशों की सहमति से एआई के कुछ विकास कार्यों को अस्थायी रूप से रोकने जैसे विकल्पों पर विचार शामिल है। हालाँकि,ये प्रस्ताव अभी अमेरिकी सांसदों के सुझाव हैं। इन्हें दोनों देशों के बीच किसी सहमति या समझौते के रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह भी निश्चित नहीं है कि ट्रंप और शी जिनपिंग अपनी आधिकारिक बैठक में इन सभी प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

ईरान का मुद्दा इस बैठक को और अधिक महत्वपूर्ण बना रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शी जिनपिंग के सामने ईरान से जुड़ा विषय उठाएँगे। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच चीन की भूमिका पर भी नजर है। चीन ईरान के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक और कूटनीतिक संबंध रखता है। ऐसे में अमेरिका की ओर से ईरान से संबंधित किसी मुद्दे को चीन के सामने उठाना दोनों देशों के व्यापक कूटनीतिक संवाद का हिस्सा बन सकता है।

मार्को रुबियो पहले ही अमेरिका का यह रुख दोहरा चुके हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिकी नीति की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में है। उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिका बातचीत के जरिए किसी समझौते तक पहुँचने के लिए तैयार है। ऐसे में ट्रंप और शी के बीच ईरान को लेकर होने वाली बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रह सकती,बल्कि पश्चिम एशिया की व्यापक स्थिति और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति से भी जुड़ सकती है।

रुबियो से जब यह पूछा गया कि क्या ट्रंप ईरान और रूस से जुड़े संघर्षों को खत्म करने की कोशिशों में चीन से सहायता माँगेंगे,तो उन्होंने बातचीत के संभावित विषयों की पूरी जानकारी देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति उन सभी वैश्विक मुद्दों को उठाएंगे, जिन्हें वह जरूरी और महत्वपूर्ण समझते हैं। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका चीन से किसी विशेष कदम की माँग करेगा या नहीं।

रुबियो ने यह भी कहा कि अगर ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत के बाद कोई सकारात्मक परिणाम सामने आता है या दोनों देश किसी संयुक्त घोषणा पर सहमत होते हैं, तो उसे सार्वजनिक किया जाएगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि उच्चस्तरीय बातचीत के कुछ हिस्से निजी तौर पर होना अधिक प्रभावी हो सकता है। इस तरह अमेरिका ने बैठक के संभावित परिणामों को लेकर फिलहाल कोई निश्चित घोषणा नहीं की है।

चीन में हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों का मुद्दा भी राष्ट्रपति ट्रंप की बातचीत में उठने की संभावना है। अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से विदेशों में हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों के मामलों को कूटनीतिक बातचीत का हिस्सा बनाता रहा है। रुबियो ने कहा कि अमेरिका उन सभी देशों के साथ बातचीत के दौरान अपने नागरिकों से जुड़े मामलों को उठाता है,जहाँ अमेरिकी नागरिक हिरासत में हैं। इसलिए चीन के साथ राष्ट्रपति स्तर की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया जाना स्वाभाविक माना जा रहा है।

इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच वैश्विक संघर्षों को लेकर भी चर्चा हो सकती है। अमेरिका और चीन दोनों ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और अंतर्राष्ट्रीय संकटों से जुड़े कई मुद्दों पर उनका प्रभाव है। हालाँकि,रूस या ईरान से जुड़े मामलों में दोनों देशों की नीतियाँ कई बार अलग रही हैं। ऐसे में ट्रंप और शी के बीच होने वाली बातचीत से किसी तत्काल संयुक्त पहल का संकेत मिलेगा या नहीं, यह बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा को दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत तकनीक, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक प्रभाव जैसे क्षेत्र भी दोनों देशों के संबंधों में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए गुरुवार की बैठक में किसी एक मुद्दे पर बनी सहमति से ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि दोनों नेता व्यापक संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं।

फिलहाल ट्रंप ने ईरान को बैठक के एजेंडे का निश्चित हिस्सा बता दिया है,जबकि व्यापार, कृषि, एआई सुरक्षा, अमेरिकी नागरिकों की हिरासत और अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों से जुड़े विषय संभावित चर्चा के मुद्दों में हैं। हालाँकि,अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि बैठक से किसी विशेष समझौते या घोषणा की उम्मीद की जानी चाहिए। ऐसे में गुरुवार को व्हाइट हाउस में होने वाली ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत पर अमेरिका और चीन के साथ-साथ दुनिया के कई देशों की नजर रहेगी।