भूकंप

उत्तरी जापान में फिर महसूस हुए भूकंप के तेज झटके,आओमोरी में 5.8 तीव्रता का कंपन, कुमामोटो में तबाही के बाद बढ़ी चिंता

टोक्यो,1 अगस्त (युआईटीवी)- जापान एक बार फिर भूकंप के झटकों से दहल उठा है। शनिवार को उत्तरी जापान के आओमोरी प्रांत में 5.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिससे क्षेत्र में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालाँकि,राहत की बात यह रही कि इस भूकंप के बाद सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई और प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी बड़े नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देश पहले से ही कुमामोटो प्रांत में आए भीषण भूकंप और उसके लगातार महसूस हो रहे आफ्टरशॉक्स से जूझ रहा है। लगातार आ रहे झटकों ने जापान में लोगों की चिंता और सतर्कता दोनों को बढ़ा दिया है।

जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार,शनिवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर आओमोरी प्रांत के प्रशांत महासागर तट के निकट भूकंप आया। एजेंसी ने बताया कि भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 80 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूकंप का केंद्र 41.3 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 142.0 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। भूकंप की तीव्रता 5.8 मापी गई,जिसे मध्यम से तेज श्रेणी का भूकंप माना जाता है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार,भूकंप के बाद संबंधित एजेंसियों ने तुरंत स्थिति का आकलन शुरू कर दिया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सुनामी का कोई खतरा नहीं है और इसलिए किसी प्रकार की सुनामी सलाह या चेतावनी जारी नहीं की गई। इसके बावजूद प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखने की अपील की है।

यह नया भूकंप उस समय आया है जब कुछ ही दिन पहले जापान के क्यूशू द्वीप स्थित कुमामोटो प्रांत में 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। मंगलवार को स्थानीय समयानुसार शाम लगभग 4 बजकर 27 मिनट पर आए इस भीषण भूकंप ने व्यापक तबाही मचाई थी। इसके बाद बुधवार सुबह तक 170 से अधिक आफ्टरशॉक दर्ज किए गए,जिससे प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण बन गया।

कुमामोटो में आए भूकंप ने बड़ी संख्या में भवनों,सड़कों और पुलों को नुकसान पहुँचाया। कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं,जबकि कुछ स्थानों पर पुलों के ढहने की भी खबरें सामने आईं। भूकंप के कारण कई क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएँ भी प्रभावित हुईं। राहत एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया,लेकिन लगातार आ रहे झटकों के कारण कई स्थानों पर राहत कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने कुमामोटो भूकंप के बाद लोगों को कम से कम एक सप्ताह तक विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी थी। एजेंसी के अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि मुख्य भूकंप के बाद आने वाले आफ्टरशॉक भी काफी शक्तिशाली हो सकते हैं। सार्वजनिक प्रसारक एनएचके के अनुसार,एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि अगले दो से तीन दिन विशेष रूप से संवेदनशील रहेंगे और इस दौरान शिंदो पैमाने पर अधिकतम सात तीव्रता तक के और झटके महसूस किए जा सकते हैं।

जापान में भूकंप की तीव्रता का आकलन केवल रिक्टर पैमाने से ही नहीं,बल्कि शिंदो पैमाने से भी किया जाता है। शिंदो पैमाना यह बताता है कि धरती का कंपन किसी विशेष स्थान पर कितना तीव्र महसूस हुआ। कुमामोटो में आए हालिया भूकंप की तीव्रता शिंदो पैमाने पर सात दर्ज की गई थी,जो इस पैमाने का सर्वोच्च स्तर माना जाता है। इससे पहले इतनी अधिक तीव्रता का भूकंप एक जनवरी 2024 को नोटो प्रायद्वीप में दर्ज किया गया था।

कुमामोटो भूकंप के बाद मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। ताजा जानकारी के अनुसार इस आपदा में अब तक 35 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है। हालाँकि,अधिकारियों ने बताया है कि इनमें से नौ मामलों की अभी जाँच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इन मौतों का सीधा संबंध 7.1 तीव्रता वाले भूकंप से था या अन्य कारण भी जिम्मेदार थे। प्रीफेक्चरल डिजास्टर रिस्पॉन्स हेडक्वार्टर के अनुसार जाँच पूरी होने के बाद अंतिम आँकड़े जारी किए जाएँगे।

गुरुवार को आयोजित डिजास्टर रिस्पॉन्स हेडक्वार्टर की बैठक में कुमामोटो प्रीफेक्चर सरकार के अधिकारियों ने राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान लगातार जारी है और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों का सर्वेक्षण भी किया जा रहा है। प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने,अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने और आवश्यक खाद्य सामग्री तथा चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

भूकंप के बाद राहत कार्यों में जुटे कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के सामने एक और बड़ी चुनौती भी सामने आई है। जापान में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है,जिसके कारण बचाव कार्यों में लगे लोगों के लिए हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि राहत अभियान में शामिल सभी लोग नियमित अंतराल पर विश्राम करें,पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ और अत्यधिक गर्मी से बचने के उपाय अपनाएँ । उनका कहना है कि लगातार कठिन परिस्थितियों में काम करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। देश प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहाँ कई विवर्तनिक प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं। इसी कारण यहाँ अक्सर छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं। जापान ने पिछले कई दशकों में भूकंपरोधी निर्माण तकनीकों, उन्नत चेतावनी प्रणालियों और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को काफी मजबूत बनाया है। इसके बावजूद बड़े भूकंपों के समय जनजीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और राहत एवं पुनर्वास कार्यों में भारी संसाधनों की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कुमामोटो में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद लगातार महसूस हो रहे आफ्टरशॉक और अब आओमोरी में आए नए भूकंप को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। हालाँकि,दोनों भूकंप अलग-अलग क्षेत्रों में आए हैं,फिर भी जापान की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भूकंपीय गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

फिलहाल आओमोरी में आए 5.8 तीव्रता के भूकंप से किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी है। वहीं कुमामोटो में राहत एवं पुनर्वास कार्य अभी भी जारी हैं और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। जापान की आपदा प्रबंधन एजेंसियाँ लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने का दावा कर रही हैं।