मुंबई,4 अगस्त (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान को मिली जान से मारने की धमकी के मामले में जाँच एजेंसियों को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है। पंजाब पुलिस की फॉरेंसिक जाँच में सामने आया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए धमकी भरे ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाज कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े आरजू बिश्नोई की पुरानी रिकॉर्डिंग से मेल खाती है। इस शुरुआती फॉरेंसिक निष्कर्ष के बाद मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने मामले की जाँच और तेज कर दी है। हालाँकि,पुलिस का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों का गहराई से परीक्षण किया जा रहा है।
जाँच से जुड़े सूत्रों के अनुसार,वायरल ऑडियो क्लिप में सुनाई देने वाली आवाज का मिलान आरजू बिश्नोई के पुराने वॉयस सैंपल से कराया गया था। पंजाब पुलिस की फॉरेंसिक टीम ने इस विश्लेषण के बाद अपनी रिपोर्ट मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के साथ साझा की। जाँच एजेंसियाँ इस रिपोर्ट को मामले की दिशा तय करने वाला एक अहम सुराग मान रही हैं,लेकिन इसके आधार पर अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा गया है।
दरअसल,कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल हुई थी। इस ऑडियो में बोलने वाले व्यक्ति ने खुद को आरजू बिश्नोई बताते हुए अभिनेता आमिर खान को धमकी दी थी। कथित ऑडियो में अभिनेता को गंभीर परिणाम भुगतने और उन्हें सबक सिखाने जैसी बातें कही गई थीं। यह ऑडियो सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गईं और मुंबई पुलिस ने तत्काल मामले की जाँच शुरू कर दी।
शुरुआती जाँच में पुलिस को यह भी पता चला कि धमकी देने वाले व्यक्ति या समूह ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया था। मुंबई पुलिस की साइबर सेल की जाँच में ऐसे डिजिटल संकेत मिले,जिनसे पता चला कि इंटरनेट गतिविधियों को छिपाने के लिए विदेशी सर्वर और विशेष तकनीकी साधनों का उपयोग किया गया।
जाँच में सामने आया कि धमकी से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट विदेश से जुड़े हुए मिले। पुलिस के अनुसार,स्वीडन आधारित वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क और एन्क्रिप्टेड टोर ब्राउजर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर वास्तविक लोकेशन और डिवाइस की जानकारी छिपाने का प्रयास किया गया। इन तकनीकों का उपयोग अक्सर इंटरनेट पर पहचान और स्थान को गुप्त रखने के लिए किया जाता है,जिससे जाँच एजेंसियों के लिए वास्तविक स्रोत तक पहुँचना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
साइबर विशेषज्ञों की मदद से मुंबई पुलिस अब उस पूरे डिजिटल नेटवर्क की जाँच कर रही है,जिसके माध्यम से ऑडियो रिकॉर्ड किया गया,अपलोड किया गया और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जाँच का उद्देश्य केवल ऑडियो के स्रोत तक पहुँचना ही नहीं,बल्कि यह भी पता लगाना है कि इस पूरे घटनाक्रम में कितने लोग शामिल थे और क्या यह किसी संगठित साजिश का हिस्सा था।
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वायरल ऑडियो वास्तव में आरजू बिश्नोई ने स्वयं रिकॉर्ड किया था या फिर किसी अन्य व्यक्ति ने उनकी पहचान का इस्तेमाल करते हुए यह ऑडियो तैयार किया। जाँच अधिकारी इस संभावना पर भी काम कर रहे हैं कि किसी ने जानबूझकर आरजू बिश्नोई का नाम लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की हो। इसी कारण केवल वॉयस मैचिंग के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुँचने के बजाय अन्य डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का भी मिलान किया जा रहा है।
इसके अलावा,जाँच एजेंसियाँ यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि धमकी भरे ऑडियो को सबसे पहले किस सोशल मीडिया अकाउंट या प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि ऑडियो को वायरल करने के पीछे कौन लोग थे और इसे बड़े स्तर पर फैलाने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संबंधित तकनीकी जानकारी और लॉग भी जाँच के दायरे में शामिल किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार,इस पूरे मामले में मुंबई पुलिस,पंजाब पुलिस और अन्य केंद्रीय जाँच एजेंसियाँ आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं। विभिन्न एजेंसियाँ डिजिटल रिकॉर्ड, इंटरनेट कॉलिंग,सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं,ताकि धमकी देने वाले व्यक्ति और उससे जुड़े पूरे नेटवर्क तक पहुँचा जा सके।
जाँच अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान समय में अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल पारंपरिक जाँच पर्याप्त नहीं होती,बल्कि साइबर फॉरेंसिक,डिजिटल ट्रैकिंग और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी सहयोग की भी आवश्यकता पड़ती है। इसी कारण इस मामले में तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
आमिर खान को मिली धमकी का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अभिनेता की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की है। हालाँकि,पुलिस ने सुरक्षा से जुड़े विशेष इंतजामों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि जाँच के हित में कई जानकारियाँ फिलहाल गोपनीय रखी गई हैं।
फॉरेंसिक जाँच में सामने आए इस नए सुराग ने मामले को नई दिशा जरूर दी है,लेकिन पुलिस अभी भी सावधानीपूर्वक सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि केवल आवाज के मिलान के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका तय नहीं की जा सकती। इसलिए डिजिटल डेटा,तकनीकी साक्ष्य,इंटरनेट गतिविधियों और अन्य उपलब्ध जानकारियों का व्यापक विश्लेषण किया जा रहा है।
फिलहाल इस मामले की जाँच कई स्तरों पर जारी है और एजेंसियाँ यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं कि धमकी देने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान कर उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके। आने वाले दिनों में डिजिटल जाँच और फॉरेंसिक विश्लेषण से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है,जिनसे इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
