नई दिल्ली,4 अगस्त (युआईटीवी)- संसद के मानसून सत्र के शेष दिनों के लिए रणनीति तय करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संसदीय दल की महत्वपूर्ण ‘मंगल मिलन’ बैठक मंगलवार को संसद पुस्तकालय भवन में आयोजित की जाएगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है,जब मानसून सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिला है। ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन आने वाले दस दिनों के लिए अपनी संसदीय रणनीति को अंतिम रूप देने और सदन के भीतर बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की तैयारी कर रहा है।
संसद में भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय की ओर से लोकसभा और राज्यसभा के सभी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सांसदों को बैठक में शामिल होने के लिए आधिकारिक सूचना भेजी गई है। जारी नोट में सभी सांसदों से अनुरोध किया गया है कि वे निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित रहें और बैठक में सक्रिय रूप से भाग लें। माना जा रहा है कि इस बैठक में आगामी संसदीय कार्यों,महत्वपूर्ण विधेयकों,विपक्ष की रणनीति और सत्ता पक्ष की जवाबी तैयारी पर विस्तार से चर्चा होगी।
संसद में भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय सचिव के अनुसार,बैठक मंगलवार सुबह 9:30 बजे संसद पुस्तकालय भवन स्थित जी.एम.सी. बालयोगी ऑडिटोरियम में शुरू होगी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है। उनके अलावा केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू,केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल,केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी,केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के सांसद भी मौजूद रहेंगे।
‘मंगल मिलन’ बैठक को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संसदीय दल के नियमित साप्ताहिक रणनीति सत्र का नया स्वरूप माना जाता है। इसका उद्देश्य केवल संसदीय रणनीति तैयार करना ही नहीं,बल्कि गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय स्थापित करना भी है। इस बैठक के माध्यम से सरकार संसद में अपने विधायी कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के साथ-साथ सहयोगी दलों की राय और सुझावों को भी शामिल करने का प्रयास करती है।
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा विभिन्न मुद्दों पर लगातार विरोध और हंगामे के बीच सरकार के सामने सदन का कामकाज सुचारु रूप से चलाने की चुनौती रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि ‘मंगल मिलन’ बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा होगी कि शेष सत्र के दौरान महत्वपूर्ण विधेयकों को किस प्रकार पारित कराया जाए और विपक्ष के उठाए जाने वाले मुद्दों का प्रभावी ढंग से जवाब कैसे दिया जाए। इसके अलावा सांसदों को सदन में चर्चा के दौरान किन विषयों पर सरकार का पक्ष रखना है,इस संबंध में भी दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
इस बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के विभिन्न सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना भी है। गठबंधन में शामिल विभिन्न क्षेत्रीय दलों के सांसदों को अलग-अलग विषयों पर सदन में बोलने की जिम्मेदारी दी जाती है,ताकि सरकार का पक्ष व्यापक और प्रभावी ढंग से सामने रखा जा सके। शिवसेना,लोक जनशक्ति पार्टी,तेलुगु देशम पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड) और अन्य सहयोगी दलों की भूमिका इस दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। बैठक के दौरान इन्हीं दलों के प्रतिनिधियों के बीच संसदीय जिम्मेदारियों का समन्वय भी किया जाएगा।
संसदीय कार्यों के प्रबंधन के अलावा ‘मंगल मिलन’ बैठक गठबंधन के भीतर संवाद को मजबूत करने का भी एक मंच बन चुकी है। इसमें सहयोगी दलों के सांसद अपने सुझाव रखते हैं और विभिन्न राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं। इससे सरकार को विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में सहयोग मिलता है और गठबंधन के भीतर एकजुटता का संदेश भी जाता है।
पिछली ‘मंगल मिलन’ बैठक 28 जुलाई को आयोजित की गई थी,जिसमें कई नए सांसद पहली बार शामिल हुए थे। उस बैठक में नेशनल नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया की सांसद काकोली घोष,शताब्दी रॉय और सायोनी घोष ने पहली बार भाग लिया था। ये सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी रही थीं और बाद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दल का हिस्सा बनीं। उनके पहली बार इस बैठक में शामिल होने को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा हुई थी।
पिछली बैठक के बाद नेशनल नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया के कई सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संसदीय दल की कार्यशैली की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि गठबंधन के भीतर संसदीय कार्यों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाता है और सभी सहयोगी दलों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलता है। सांसदों ने यह भी कहा था कि इस प्रकार की बैठकों से संसदीय समन्वय मजबूत होता है और सभी दलों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के शेष दस दिनों को देखते हुए यह बैठक सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण है। मानसून सत्र के दौरान कई अहम विधेयकों और सरकारी कार्यों पर चर्चा प्रस्तावित है। ऐसे में सरकार चाहती है कि गठबंधन के सभी सांसद एकजुट होकर सदन में प्रभावी भूमिका निभाएँ और विधायी एजेंडे को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाया जा सके।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठक में सांसदों को संबोधित करते हुए संसद की कार्यवाही के दौरान अनुशासन,सक्रिय भागीदारी और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने पर जोर दे सकते हैं। इसके साथ ही गठबंधन के सभी घटक दलों से आपसी समन्वय बनाए रखने और विपक्ष के सवालों का तथ्यों के साथ जवाब देने का भी आग्रह किया जा सकता है।
संसद के मानसून सत्र का अंतिम चरण राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में ‘मंगल मिलन’ बैठक केवल रणनीति तय करने तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि यह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की एकजुटता,संसदीय समन्वय और आगामी विधायी कार्यक्रमों की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। आने वाले दिनों में इस बैठक में लिए गए निर्णयों का असर संसद की कार्यवाही और सरकार की संसदीय रणनीति में स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
