नई दिल्ली,20 अगस्त (युआईटीवी)- लगातार सात सेशन तक गिरावट के बाद,गुरुवार, 20 अगस्त को भारतीय शेयर बाज़ार में ज़बरदस्त रिकवरी देखने को मिली। ग्लोबल बाज़ार से मिले अच्छे संकेतों, आईटी और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी और बाज़ार की मज़बूत शुरुआत ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 500 से ज़्यादा अंक चढ़ा,जबकि निफ्टी 50 ने 24,200 का स्तर पार कर लिया। सुबह करीब 9:30 बजे सेंसेक्स लगभग 503 अंक बढ़कर 77,416 के आस-पास ट्रेड कर रहा था,वहीं निफ्टी करीब 118 अंक चढ़कर 24,196 पर पहुँच गया था।
भारतीय इक्विटी में सुधार दुनिया के बड़े बाज़ारों में आई तेज़ी के बाद हुआ। अमेरिकी शेयर बाज़ार रात में बढ़त के साथ बंद हुए,जबकि एशियाई बाज़ार भी ज़्यादातर पॉज़िटिव खुले। हाल ही में यील्ड बढ़ने को लेकर बनी चिंताओं के बाद, ग्लोबल बॉन्ड बाज़ारों में स्थिरता आने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
आईटी सेक्टर का प्रदर्शन मज़बूत रहा,जबकि फाइनेंशियल शेयरों में भी खरीदारी देखी गई। बुधवार को निफ्टी 0.32% गिरकर 24,078.30 पर बंद हुआ,जिससे लगातार सातवें सेशन में इसमें गिरावट दर्ज की गई।
अच्छी शुरुआत के बावजूद, कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और अमेरिका व ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव की वजह से निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
ब्रेंट क्रूड की कीमत $90 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताएँ वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर असर डाल रही हैं। तेल की ऊँची कीमतें भारत के लिए खास तौर पर अहम हैं क्योंकि देश आयातित कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर है, जिससे महँगाई,रुपये की कीमत और कंपनियों की लागत को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
बुधवार को ₹95.75 पर बंद होने के मुकाबले,भारतीय रुपया यूएस डॉलर के मुकाबले ₹95.56 के आसपास थोड़ी मजबूती के साथ खुला। रुपये में मजबूती और ग्लोबल मार्केट से मिले सकारात्मक संकेतों ने घरेलू इक्विटी को अतिरिक्त सहारा दिया।
बाज़ार में शामिल लोगों की नज़रें कच्चे तेल की कीमतों,अमेरिका-ईरान विवाद में हो रही हलचल,विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों,करेंसी में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर रहेंगी।
लगातार सात सेशन की गिरावट के बाद गुरुवार को आई तेज़ी से कुछ राहत तो मिली है, लेकिन जब तक जियोपॉलिटिकल रिस्क और तेल की कीमतों का दबाव कम नहीं होता, तब तक एनालिस्ट सतर्क ही रहेंगे।
भारतीय बाज़ार में ज़बरदस्त वापसी हुई है,लेकिन कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता दलाल स्ट्रीट के लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं।
