वाशिंगटन,21 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो देश और संस्थाएँ ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगी या उसकी मदद करेंगी,उन्हें गंभीर आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ सकता है। यह तेहरान के खिलाफ़ वॉशिंगटन के दबाव अभियान में तेज़ी का संकेत है।
ट्रंप ने इन प्रस्तावित कदमों को “आर्थिक डी-डे” बताया और कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ़ एक अभूतपूर्व आर्थिक अभियान की तैयारी कर रहा है। हालाँकि,उन्होंने उन खास कदमों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी जो लागू किए जाएंगे।
यह चेतावनी वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी तनाव और किसी व्यापक समझौते तक पहुँचने की रुकी हुई कोशिशों के बीच आई है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है,खासकर तेल से जुड़े व्यापार,वित्तीय लेन-देन और ऐसी अन्य गतिविधियों को निशाना बनाकर जिनसे तेहरान को कमाई हो सकती है।
ट्रंप ने दूसरे देशों को भी चेतावनी दी कि ईरान की मदद करने पर उन्हें अमेरिका की सज़ा का सामना करना पड़ सकता है। इस धमकी के व्यापक अंतर्राष्ट्रीय नतीजे हो सकते हैं, खासकर उन देशों के लिए जिनके तेहरान के साथ गहरे आर्थिक या ऊर्जा संबंध हैं।
अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से ईरान के तेल निर्यात और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क तक उसकी पहुँच पर पहले ही काफी रोक लगी हुई है। हालिया घोषणा से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन अब ईरान के साथ व्यापार में शामिल तीसरे देशों की कंपनियों और सरकारों पर दबाव बढ़ा सकता है और नियमों को सख्ती से लागू कर सकता है।
यह स्थिति होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तनाव से भी गहराई से जुड़ी है,जो तेल की ढुलाई के लिए दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता है। इस जलमार्ग को लेकर लगातार बनी अनिश्चितता के कारण ऊर्जा आपूर्ति और तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
ट्रंप के प्रस्तावित आर्थिक उपायों का दायरा और उन्हें लागू करने का तरीका अभी साफ नहीं है,लेकिन उनकी हालिया चेतावनी से पता चलता है कि ईरान के साथ टकराव में वॉशिंगटन अब आर्थिक और कूटनीतिक दबाव का इस्तेमाल एक अहम हथियार के तौर पर कर रहा है।
