मोहन भागवत और जोहरान ममदानी (तस्वीर क्रेडिट@mahsharfatima86)

मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम से पहले हिंदू संगठनों की सुरक्षा सलाह,प्रदर्शन और कार्यक्रम रद्द करने की माँग के बीच बढ़ी सतर्कता

वॉशिंगटन,27 अगस्त (युआईटीवी)- न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित संबोधन से पहले सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। 29 अगस्त को होने वाले ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम को लेकर जहाँ कुछ संगठनों और कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है और कार्यक्रम को रद्द करने की माँग उठ रही है,वहीं दो हिंदू-अमेरिकी संगठनों ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों और न्यूयॉर्क के हिंदू संस्थानों के लिए सुरक्षा संबंधी सलाह जारी की है। संगठनों ने लोगों से किसी भी तरह के टकराव से बचने, आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी खतरे की स्थिति में तुरंत पुलिस से संपर्क करने की अपील की है।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने बुधवार को स्थानीय समयानुसार कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले समुदाय के लोगों के लिए ‘कम्युनिटी एडवाइजरी अलर्ट’ जारी किया। संगठन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लोगों से सतर्क रहने और अपने आसपास की स्थिति पर नजर रखने की अपील की। साथ ही प्रतिभागियों से सभी लोगों के साथ शांतिपूर्ण और सभ्य तरीके से व्यवहार करने को कहा गया है। संगठन ने कहा कि कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम को बाधित करने और इसे रद्द कराने की कोशिश की है। इसी वजह से कार्यक्रम में आने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

हालाँकि,हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने अपनी सलाह में किसी विशेष खतरे का उल्लेख नहीं किया है। संगठन ने यह भी नहीं कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़ी किसी एजेंसी ने कार्यक्रम को लेकर किसी विशेष सुरक्षा जोखिम की पुष्टि की है। एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य संभावित विरोध प्रदर्शनों के बीच कार्यक्रम में आने वाले लोगों को शांत रहने और किसी भी तनावपूर्ण स्थिति में सावधानी बरतने की सलाह देना है। संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया कि विरोध प्रदर्शन करना और अपनी राय व्यक्त करना भी लोगों का नागरिक अधिकार है और कार्यक्रम में आने वाले लोगों को दूसरे लोगों के इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।

संगठन ने प्रतिभागियों से कहा है कि वे उकसाने वाले या धमकी भरे बयान देने वाले लोगों के साथ किसी तरह के विवाद या टकराव में न पड़ें। यदि किसी व्यक्ति को कार्यक्रम स्थल पर किसी तरह का खतरा महसूस होता है,तो उसे तुरंत उस स्थान से हट जाने और कार्यक्रम की सुरक्षा टीम या पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी गई है। किसी आपात स्थिति में लोगों को 911 पर कॉल करने को कहा गया है। इसके साथ ही धमकी,तोड़फोड़, कथित घृणा-आधारित घटनाओं या किसी अन्य अपराध की जानकारी सुरक्षा कर्मियों अथवा कानून-व्यवस्था एजेंसियों को देने की अपील की गई है।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने केवल कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए ही सावधानी की सलाह नहीं दी,बल्कि न्यूयॉर्क के हिंदू मंदिरों और सामुदायिक केंद्रों से भी बड़े आयोजनों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है। संगठन का कहना है कि समुदाय से जुड़े संस्थानों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध या असामान्य गतिविधि को गंभीरता से लेना चाहिए। हालाँकि,संगठन ने स्पष्ट किया है कि उसकी सलाह किसी पुष्ट खतरे की सूचना पर आधारित नहीं है,बल्कि मौजूदा विरोध और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए एहतियाती कदम के तौर पर जारी की गई है।

एक अन्य हिंदू-अमेरिकी संगठन हिंदूएक्शन ने भी इसी तरह की सुरक्षा सलाह जारी की है। संगठन ने न्यूयॉर्क के हिंदू समुदाय और मोहन भागवत की यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोगों से किसी भी धमकी,उत्पीड़न या भेदभावपूर्ण व्यवहार का रिकॉर्ड रखने की अपील की है। संगठन ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जानकारी तुरंत न्यूयॉर्क पुलिस और संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए। उसने समुदाय के लोगों से सुरक्षित रहने और एक-दूसरे का ध्यान रखने की अपील भी की है।

इन संगठनों की सुरक्षा सलाह ऐसे समय में सामने आई है जब मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने भी उनकी यात्रा और कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्यों और कुछ भारतीय अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार करने का आग्रह किया है। आयोग की ओर से व्यक्त चिंताओं को लेकर भारत की ओर से पहले भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आती रही है। भारत ने आयोग की धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित रिपोर्टों और आकलनों को कई मौकों पर पक्षपातपूर्ण बताते हुए खारिज किया है और उन्हें भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है।

कार्यक्रम को लेकर विरोध करने वालों में सिएटल सिटी काउंसिल की पूर्व सदस्य क्षमा सावंत भी शामिल हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी से मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम को रोकने की माँग की है। उन्होंने हिंदू मानवाधिकार संगठन, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और अन्य संगठनों का आभार जताया है,जो कार्यक्रम के विरोध में अभियान चला रहे हैं। विरोध करने वाले संगठनों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि कार्यक्रम और मोहन भागवत की यात्रा को लेकर उनकी अपनी राजनीतिक और वैचारिक आपत्तियाँ हैं।

वहीं,न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भी कार्यक्रम के विरोध में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा है कि उन्हें नहीं पता कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं। यह बयान इस पूरे विवाद के कानूनी पक्ष को भी महत्वपूर्ण बना देता है। मैडिसन स्क्वायर गार्डन एक निजी आयोजन स्थल है और किसी निजी कार्यक्रम को प्रशासनिक स्तर पर रोकने के लिए कानूनी आधार और अधिकार क्षेत्र का सवाल सामने आता है। ऐसे में कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विरोध और प्रशासनिक अधिकारों के बीच संतुलन एक अहम मुद्दा बन गया है।

हिंदू संगठनों की ओर से जारी सुरक्षा सलाह का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने लोगों को विरोध प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। संगठनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि लोगों को दूसरों के इकट्ठा होने,विरोध करने और अपनी राय व्यक्त करने के अधिकार का सम्मान करना चाहिए। साथ ही किसी भी उकसावे का जवाब टकराव से नहीं देने की सलाह दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि आयोजक और समुदाय से जुड़े संगठन विरोध प्रदर्शन के बीच किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए शांतिपूर्ण रवैया अपनाने पर जोर दे रहे हैं।

कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों की गतिविधियों के बीच न्यूयॉर्क पुलिस और अन्य कानून-व्यवस्था एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि कार्यक्रम स्थल के आसपास प्रदर्शन होते हैं,तो अधिकारियों के सामने प्रदर्शनकारियों के अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार तथा कार्यक्रम में शामिल लोगों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार,किसी विशिष्ट सुरक्षा खतरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद हिंदू संगठनों ने समुदाय के लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

मोहन भागवत का न्यूयॉर्क कार्यक्रम भारतीय प्रवासी समुदाय के भीतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। जहाँ समर्थक इसे समुदाय और वैश्विक स्तर पर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर बता रहे हैं,वहीं विरोध करने वाले संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके प्रमुख से जुड़े वैचारिक तथा राजनीतिक मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। यही मतभेद अब कार्यक्रम के आयोजन और सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक बहस में बदल गया है।

29 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम से पहले आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन और हिंदूएक्शन ने समुदाय के लोगों से संयम और सतर्कता बरतने को कहा है। दूसरी ओर, कार्यक्रम का विरोध करने वाले संगठन इसे रोकने के लिए अपना अभियान जारी रखे हुए हैं। मेयर की ओर से कार्यक्रम को लेकर विरोध जताए जाने के बावजूद निजी आयोजन को रद्द करने के उनके अधिकार पर अनिश्चितता बनी हुई है।

ऐसे में अब सबकी नजर 29 अगस्त के कार्यक्रम पर है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती होगी कि वे प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा करते हुए कार्यक्रम में आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। वहीं,आयोजकों और समुदाय के लोगों से भी शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपेक्षा की जा रही है। फिलहाल दोनों हिंदू-अमेरिकी संगठनों की सलाह का संदेश यही है कि संभावित तनाव के बावजूद लोग किसी टकराव से बचें,किसी भी गंभीर घटना की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें और अपनी तथा दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।