प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@PKVarmaRanchi)

‘स्क्रीन से ज्यादा खेल केंद्रों और प्ले स्टेशन से ज्यादा प्ले ग्राउंड की जरूरत’, प्रधानमंत्री मोदी ने युवा खिलाड़ियों को दिया 2036 ओलंपिक का मंत्र

नई दिल्ली,27 अगस्त (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से आयोजित ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ कार्यक्रम में देशभर के युवा खिलाड़ियों और एथलीटों को संबोधित किया। राष्ट्रीय खेल दिवस से पहले आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भारत में खेल संस्कृति को मजबूत करने, नई प्रतिभाओं की पहचान करने और वर्ष 2036 के ओलंपिक की तैयारी को लेकर सरकार की योजनाओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि खेलों को केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं किया जा सकता। खेल देश की युवा शक्ति को विकसित भारत के निर्माण से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों, केंद्रीय और राज्य मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, सांसदों तथा ‘माय भारत’ से जुड़े लाखों स्वयंसेवकों को बधाई दी। उन्होंने राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 29 अगस्त का दिन देश के महान हॉकी खिलाड़ी की उपलब्धियों को याद करने और खेलों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने का अवसर है।

मेजर ध्यानचंद का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने करीब सौ वर्ष पहले भारतीय सेना की हॉकी टीम के न्यूजीलैंड दौरे की याद दिलाई। उन्होंने बताया कि इस दौरे में मेजर ध्यानचंद भी टीम का हिस्सा थे और इस यात्रा ने भारत तथा न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में न्यूजीलैंड की यात्रा के दौरान भी उन्होंने मेजर ध्यानचंद को याद किया था। उन्होंने महान खिलाड़ी की उपलब्धियों को भारत की खेल विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए गए अपने स्पोर्ट्स विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि खेलों को देखने का नजरिया व्यापक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब वह खेल की बात करते हैं तो इसका मतलब केवल पदक जीतना नहीं है। यह भारत की खेल शक्ति और युवा शक्ति को विकसित भारत के निर्माण के साथ जोड़ने का अभियान है। उन्होंने ‘जो खेले वो खिले’ का संदेश देते हुए कहा कि खेल में खिलना केवल मैदान पर जीत हासिल करना नहीं है,बल्कि इससे व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है,परिवार का गौरव बढ़ता है और देश की प्रतिष्ठा मजबूत होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करता है तो उसका प्रभाव केवल उस खिलाड़ी तक सीमित नहीं रहता। उसके परिवार, स्कूल, जिले और राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ती है। दुनिया उस खिलाड़ी के माध्यम से उसके क्षेत्र और शहर को पहचानने लगती है। उन्होंने युवाओं से खेलों को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की अपील की और कहा कि खेल व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ देश की पहचान को भी मजबूत करते हैं।

ओलंपिक में भारत की भागीदारी का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देश के सामने बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि भारत अभी ओलंपिक में शामिल होने वाले लगभग आधे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेता। वर्ष 2012 के ओलंपिक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय भारत ने केवल 13 खेलों में भाग लिया था,जबकि 20 से अधिक खेलों में उसकी भागीदारी नहीं थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर भारत को खेलों में वैश्विक शक्ति बनना है,तो केवल कुछ लोकप्रिय खेलों तक सीमित रहने के बजाय ज्यादा से ज्यादा खेलों में अपनी उपस्थिति मजबूत करनी होगी।

उन्होंने सर्फिंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग जैसे खेलों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के पास जल खेलों और शीतकालीन खेलों के लिए उपयुक्त जनसंख्या,भौगोलिक विविधता और प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। इसके बावजूद इन क्षेत्रों में देश की उपस्थिति अभी मजबूत नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग जिलों में यह तलाश करनी होगी कि वहां कौन से खेल स्वाभाविक रूप से विकसित किए जा सकते हैं। इसके लिए स्थानीय प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें उचित प्रशिक्षण देने की जरूरत है।

वर्ष 2036 के ओलंपिक की तैयारियों को लेकर प्रधानमंत्री ने विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर भारत को 2036 के ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन करना है तो इसकी तैयारी आज से ही शुरू करनी होगी। जिन खिलाड़ियों को उस समय भारत का प्रतिनिधित्व करना है, उनमें से कई बच्चे आज स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इसलिए उनकी प्रतिभा की पहचान अभी से करनी होगी। प्रधानमंत्री ने बताया कि 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में खेल प्रतिभा खोजने के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट अभियान शुरू किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के अनुसार,इस अभियान का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं होगा कि बच्चे की किसी खेल में रुचि है या नहीं,बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि वह उस खेल के लिए कितना उपयुक्त है। बच्चे की शारीरिक क्षमता,प्राकृतिक प्रतिभा और संबंधित खेल के लिए उसकी योग्यता को ध्यान में रखते हुए उसे प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग उपलब्ध कराएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार 21वीं सदी के अनुरूप आधुनिक खेल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। खेल विश्वविद्यालयों से लेकर प्रशिक्षण केंद्रों तक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है,जिसमें प्रतिभा की पहचान से लेकर उसे शीर्ष स्तर का खिलाड़ी बनाने तक का पूरा रास्ता तैयार हो। उनका कहना था कि प्रतिभा की पहचान जितनी जल्दी होगी,उसे वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की संभावना उतनी ही बेहतर होगी।

उन्होंने खेलों में आधुनिक तकनीक,प्रशिक्षण और विज्ञान के महत्व पर भी बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल विज्ञान,खेल मनोविज्ञान और वैज्ञानिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। युवा केवल खिलाड़ी बनकर ही नहीं,बल्कि खेल से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी करियर बना सकते हैं। इससे देश में खेलों का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

प्रधानमंत्री ने अन्य देशों के साथ खेल सहयोग बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ भारतीय खिलाड़ियों को दिलाने की जरूरत है। अलग-अलग देशों के साथ खेल सहयोग बढ़ाकर प्रशिक्षण,तकनीक और खेल प्रबंधन के क्षेत्र में नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। इसका लाभ भारतीय खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में मिलेगा।

‘खेलो इंडिया संवाद’ को प्रधानमंत्री ने केवल बातचीत का कार्यक्रम मानने से इनकार किया। उन्होंने इसे युवा विचारों और देश की उम्मीदों को जोड़ने वाला मंच बताया। उन्होंने कहा कि इस मंच पर खेल पारिस्थितिकी तंत्र,प्रतिभा विकास,खेलों में शासन व्यवस्था और विकसित भारत जैसे विषयों पर युवाओं के सुझाव सुने जाएँगे। उन्होंने भरोसा जताया कि युवाओं के नए विचार देश की खेल नीति को और बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

खेल भावना के महत्व पर प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल हमें प्रतियोगिता के लिए तैयार करता है और जीत तथा हार दोनों को स्वीकार करना सिखाता है। खेल के मैदान में व्यक्ति कई बार गिरता है,लेकिन फिर उठकर आगे बढ़ने का जज्बा सीखता है। यही भावना जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी काम आती है। उन्होंने पैरा एथलीटों को इस जज्बे का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।

प्रधानमंत्री ने तीरंदाजी की खिलाड़ी शीतल,अवनी लेखड़ा,सुमित अंतिल,नितेश कुमार और झंडू कुमार जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों से यह साबित किया है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इन खिलाड़ियों की सफलता देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री ने उम्र को लेकर बनी धारणाओं का भी जिक्र किया और फौजा सिंह का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि खेल केवल युवाओं तक सीमित नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि व्यक्ति को बेहतर जीवन जीने और फिट रहने में मदद करती है। खेल और फिटनेस जीवनशैली का हिस्सा बनें तो इसका सकारात्मक प्रभाव लंबे समय तक रहता है।

उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने में खेलों की भूमिका पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल व्यक्ति में अनुशासन और इच्छाशक्ति विकसित करता है। मैदान पर नियमित अभ्यास और लक्ष्य के लिए मेहनत करने वाला युवा नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहने की क्षमता भी विकसित कर सकता है। इसलिए खेलों को केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि स्वस्थ और अनुशासित समाज बनाने के साधन के रूप में भी देखना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने समाज में खेलों के प्रति बदलते नजरिए की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि अब बड़ी संख्या में लोग दौड़, योग, पिकल बॉल और बैडमिंटन जैसी गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। इससे पता चलता है कि फिटनेस और खेलों को लेकर लोगों की सोच में बदलाव आया है। उन्होंने युवाओं को स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के बजाय मैदान और खेल गतिविधियों की ओर बढ़ने का संदेश दिया।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि “स्क्रीन से ज्यादा खेल केंद्रों की, प्ले स्टेशन से ज्यादा प्ले ग्राउंड की अहमियत है।” उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की शक्ति और सामर्थ्य पर उन्हें पूरा भरोसा है। खेल के मैदान में हो या समाज के किसी अन्य क्षेत्र में,युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही भारत की शक्ति है।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने युवा खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि भारत के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस प्रतिभा को समय पर पहचानने,सही दिशा देने और आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की है। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है,जिसमें देश के हर हिस्से से प्रतिभाशाली बच्चे सामने आएँ और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने का अवसर मिले।

प्रधानमंत्री के संबोधन में खेलों को पदक और प्रतियोगिता से आगे बढ़ाकर राष्ट्र निर्माण के व्यापक अभियान के रूप में पेश किया गया। 2036 ओलंपिक की तैयारी,5 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए प्रतिभा खोज अभियान,आधुनिक खेल पारिस्थितिकी तंत्र और खेल विज्ञान पर बढ़ता जोर भारत की दीर्घकालिक खेल रणनीति की दिशा को दर्शाता है। राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री का यह संदेश स्पष्ट रहा कि विकसित भारत के लक्ष्य में युवा शक्ति और खेल शक्ति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।