भारत मंडपम में 12-13 सितंबर को होगा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

भारत मंडपम में 12-13 सितंबर को होगा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,मानव केंद्रित एजेंडे पर रहेगा जोर

नई दिल्ली,27 अगस्त (युआईटीवी)- नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में किया जाएगा। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और राजधानी में होने वाला यह शिखर सम्मेलन उसकी अध्यक्षता का सबसे प्रमुख उच्चस्तरीय आयोजन होगा। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के नेता हिस्सा लेंगे। इसके अलावा आउटरीच के लिए आमंत्रित किए गए देशों के नेता भी शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। बैठक के दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ-साथ ब्रिक्स के भीतर सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की इस वर्ष की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य विषय “लचीलेपन,नवाचार,सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखा गया है। यह विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मानव केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है और “मानवता सर्वोपरि” की भावना पर आधारित है। भारत का प्रयास है कि ब्रिक्स सहयोग को केवल सरकारों और संस्थागत स्तर तक सीमित न रखते हुए आम लोगों के विकास,आर्थिक अवसरों, तकनीकी प्रगति और वैश्विक चुनौतियों के समाधान से जोड़ा जाए।

शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स नेता साझा प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करेंगे। इसके साथ ही आपसी हितों से जुड़े वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा किए जाएँगे। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक स्थिरता,ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा,जलवायु परिवर्तन,आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था जैसे विषय ब्रिक्स के एजेंडे में महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली बैठक को संगठन के भविष्य के सहयोग और प्राथमिकताओं को दिशा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को तीन प्रमुख स्तंभों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग,आर्थिक और वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क शामिल हैं। भारत का कहना है कि इन तीनों क्षेत्रों को मजबूत करके ब्रिक्स देशों के बीच व्यावहारिक और विकासोन्मुख सहयोग को आगे बढ़ाया जा सकता है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक,भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इन बैठकों में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बिजनेस-टू-बिजनेस संपर्क और लोगों के बीच संवाद बढ़ाने से जुड़ी पहलों के माध्यम से भी ब्रिक्स सहयोग को व्यापक बनाने का प्रयास किया गया है। भारत की अध्यक्षता का जोर ऐसे परिणामों पर रहा है जिनका प्रभाव सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं,समाजों और आम लोगों के जीवन पर दिखाई दे सके।

भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है। इससे पहले वह 2012, 2016 और 2021 में संगठन की अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। इस लिहाज से वर्ष 2026 भारत के लिए ही नहीं,बल्कि पूरे ब्रिक्स संगठन के लिए भी विशेष महत्व रखता है। इसी वर्ष ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। दो दशक की यात्रा के दौरान संगठन ने आर्थिक सहयोग के शुरुआती दायरे से आगे बढ़कर राजनीतिक,वित्तीय,सामाजिक,तकनीकी और वैश्विक शासन से जुड़े कई मुद्दों पर अपना प्रभाव बढ़ाया है।

भारत की अध्यक्षता वाले ब्रिक्स के लोगो में भी परंपरा और आधुनिकता के मेल को प्रदर्शित किया गया है। लोगो की पंखुड़ियाँ ब्रिक्स सदस्य देशों के जीवंत रंगों को दर्शाती हैं। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक विवरण के अनुसार, ये रंग संगठन की सामूहिक शक्ति और एकता का प्रतीक हैं। लोगो के केंद्र में “नमस्ते” की मुद्रा भारत की गर्मजोशी,सम्मान और मिलजुलकर काम करने की भावना को प्रदर्शित करती है। इसके जरिए भारत ने अपनी अध्यक्षता की मूल भावना को सांस्कृतिक प्रतीक के साथ जोड़ने की कोशिश की है।

वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। संगठन के सहयोगी देशों में बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। सदस्य और सहयोगी देशों के विस्तार के साथ ब्रिक्स का भौगोलिक और आर्थिक दायरा पहले की तुलना में काफी व्यापक हुआ है।

ब्रिक्स की बढ़ती सदस्यता ने संगठन के एजेंडे को भी व्यापक बनाया है। अब इसका सहयोग केवल व्यापार और आर्थिक मामलों तक सीमित नहीं है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों जैसे मुद्दे भी संगठन की चर्चाओं का हिस्सा हैं। इसके अलावा दूरसंचार,कृषि,श्रम और रोजगार,अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय ढाँचे,व्यापार और विश्व व्यापार संगठन से जुड़े विषयों पर भी सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी ब्रिक्स की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हुई है। विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना संगठन के प्रमुख उद्देश्यों में रहा है। भारत की अध्यक्षता में भी आर्थिक और वित्तीय सहयोग को प्रमुख स्तंभ के रूप में रखा गया है। ऐसे में आगामी शिखर सम्मेलन में व्यापार,निवेश, वित्तीय सहयोग और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श होने की संभावना है।

राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग भी भारत की अध्यक्षता के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच संवाद को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच ब्रिक्स देशों की अलग-अलग प्राथमिकताओं और दृष्टिकोणों के बावजूद साझा हितों वाले विषयों पर सहमति बनाने की चुनौती भी महत्वपूर्ण होगी।

इसके साथ ही सांस्कृतिक और लोगों के बीच आदान-प्रदान को भी भारत ने विशेष महत्व दिया है। भारत का मानना है कि मजबूत अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी केवल सरकारी स्तर की बैठकों से नहीं बनती,बल्कि लोगों,व्यवसायों,छात्रों,शोधकर्ताओं और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच संपर्क से भी संबंध मजबूत होते हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में इसी व्यापक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाला शिखर सम्मेलन इन सभी गतिविधियों का उच्चस्तरीय समापन होगा। इसमें सदस्य और सहयोगी देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर जुटेंगे। नेताओं के बीच होने वाली चर्चा से आने वाले समय में ब्रिक्स के सहयोग की प्राथमिकताएँ तय होने की उम्मीद है। साथ ही वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर सदस्य देशों के दृष्टिकोण भी सामने आएँगे।

भारत के लिए यह शिखर सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय में हो रहा है,जब वैश्विक अर्थव्यवस्था,सुरक्षा,जलवायु परिवर्तन और खाद्य एवं ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियाँ लगातार जटिल हो रही हैं। भारत अपनी अध्यक्षता के माध्यम से ब्रिक्स को व्यावहारिक सहयोग और विकास के लिए प्रभावी मंच के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। “लचीलेपन,नवाचार,सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” की थीम इसी दिशा को रेखांकित करती है।

दो दशक पूरे कर चुके ब्रिक्स के इस शिखर सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता का मानव केंद्रित दृष्टिकोण भी प्रमुखता से दिखाई देने की उम्मीद है। नई दिल्ली में होने वाली बैठक से न केवल सदस्य देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है,बल्कि वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने के प्रयासों को भी गति मिल सकती है। ऐसे में 12-13 सितंबर का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की कूटनीतिक सक्रियता और संगठन के अगले चरण की प्राथमिकताओं के लिहाज से बेहद अहम आयोजन बनने जा रहा है।