अभिषेक बनर्जी के घर की छत से अवैध बिलबोर्ड हटाने पर विवाद (तस्वीर क्रेडिट@Santanurc1958)

अभिषेक बनर्जी के घर की छत से अवैध बिलबोर्ड हटाने पर विवाद,तृणमूल कांग्रेस के 13 कार्यकर्ता गिरफ्तार;तीन मामले दर्ज

कोलकाता,28 अगस्त (युआईटीवी)- मध्य कोलकाता के कैमक स्ट्रीट इलाके में डायमंड हार्बर से तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के घर की छत पर लगे एक कथित अवैध बिलबोर्ड को हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद देर रात तक चलता रहा। मामले में कोलकाता पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। पुलिस के मुताबिक,इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की कई ऐसी धाराएँ लगाई गई हैं, जिनमें जमानत का प्रावधान नहीं है।

विवाद गुरुवार दोपहर उस समय शुरू हुआ,जब कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों ने कैमक स्ट्रीट स्थित एक इमारत पर लगे अवैध होर्डिंग को हटाने के लिए पुलिस से लिखित सहायता मांगी। पुलिस के अनुसार,नगर निगम की ओर से मिली शिकायत और अनुरोध के बाद शेक्सपियर सरणी थाने के पुलिसकर्मी नगर निगम के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुँचे। इसके बाद वहाँ बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस के समर्थक और कार्यकर्ता जमा हो गए।

कोलकाता पुलिस का आरोप है कि समर्थकों ने नगर निगम के कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों को परिसर के अंदर जाने से रोकने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, सरकारी आदेश को लागू करने के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने अधिकारियों के काम में बाधा डाली। पुलिस का दावा है कि स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती गई और प्रदर्शनकारियों ने वहाँ मौजूद पुलिस अधिकारियों तथा नगर निगम के कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट की।

पुलिस की ओर से जारी बयान में गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट की गई और उनकी गरिमा को ठेस पहुँचाने की कोशिश की गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को धमकी देने का भी आरोप लगाया है। पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

इस मामले को लेकर शेक्सपियर सरणी थाने में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। इनमें से एक मामला उसी थाने के एक पुलिस अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया। दूसरा मामला पार्क स्ट्रीट थाने के एक पुलिसकर्मी की शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ, जबकि तीसरा मामला कोलकाता नगर निगम की शिकायत पर दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार,अलग-अलग शिकायतों के आधार पर दर्ज मामलों में घटना के विभिन्न पहलुओं की जाँच की जा रही है।

शेक्सपियर सरणी थाने के अधिकारी और कोलकाता नगर निगम की शिकायत के आधार पर दर्ज दो मामलों में अभिषेक बनर्जी,तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन और पार्टी नेता बैश्वानर चटर्जी समेत कई लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। वहीं,पार्क स्ट्रीट थाने के अधिकारी की शिकायत पर दर्ज तीसरे मामले में अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने कहा है कि गिरफ्तार किए गए 13 कार्यकर्ताओं की भूमिका की जाँच की जा रही है और घटना से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

हालाँकि,बिलबोर्ड हटाने की कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी सवाल उठाए गए। अभिषेक बनर्जी और उनके साथ मौजूद पार्टी नेताओं ने नगर निगम के उस आदेश की वैधता पर सवाल खड़ा किया,जिसके आधार पर बिलबोर्ड हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। बनर्जी का तर्क था कि नगर निगम का नोटिस वैध नहीं है,क्योंकि आदेश की प्रति के साथ संबंधित बिलबोर्ड की तस्वीर संलग्न नहीं की गई थी।

बनर्जी की आपत्ति के बाद नगर निगम के अधिकारी संशोधित आदेश लेने के लिए मौके से वापस चले गए। पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक,कुछ समय बाद अधिकारी संशोधित आदेश के साथ दोबारा वहाँ पहुँचे। इस बार पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी। पुलिसकर्मियों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की,ताकि नगर निगम के कर्मचारी बिलबोर्ड हटाने की कार्रवाई को पूरा कर सकें।

इसके बाद नगर निगम के अधिकारी पुलिस बल के साथ इमारत की छत की ओर बढ़े। बिलबोर्ड इमारत की छत पर लगा हुआ था,इसलिए अधिकारियों को सीढ़ियों के रास्ते ऊपर जाना था। पुलिस के अनुसार,अभिषेक बनर्जी के साथ मौजूद कुछ समर्थकों ने सीढ़ियों पर इंसानी दीवार बनाने की कोशिश की और नगर निगम के कर्मचारियों तथा पुलिसकर्मियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

पुलिस का कहना है कि रास्ता रोकने वालों में तृणमूल कांग्रेस की कुछ महिला कार्यकर्ता भी शामिल थीं। इसके बाद पुलिस और पार्टी समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और नगर निगम के अधिकारियों को आगे बढ़ने के लिए रास्ता उपलब्ध कराया। काफी प्रयास के बाद पुलिस ने सीढ़ियों से छत तक जाने का रास्ता साफ कराया।

आखिरकार नगर निगम के अधिकारी पुलिस की सुरक्षा में इमारत की छत तक पहुँचने में सफल रहे। वहाँ पहुँचने के बाद कथित अवैध बिलबोर्ड को तोड़ा गया और उसे हटाने की कार्रवाई पूरी की गई। पुलिस के अनुसार,पूरी कार्रवाई के दौरान स्थिति तनावपूर्ण बनी रही और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात करना पड़ा।

कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार सुबह जारी अपने बयान में कहा कि घटना को गंभीरता से लिया गया है। पुलिस के मुताबिक,सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्य के निर्वहन से रोकना,पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और धमकी देना तथा महिला पुलिस अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे आरोपों को ध्यान में रखते हुए कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि दर्ज मामलों में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएँ शामिल हैं और इनमें कुछ गैर-जमानती धाराएँ भी हैं।

यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि जिस इमारत की छत से बिलबोर्ड हटाया गया,वह अभिषेक बनर्जी से जुड़ी है। अभिषेक बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और पार्टी में उनका महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव है। ऐसे में नगर निगम की कार्रवाई के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुआ टकराव अब राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।

मामले में अभिषेक बनर्जी और अन्य नेताओं के नाम एफआईआर में शामिल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी इसे लेकर प्रतिक्रिया की संभावना है। दूसरी ओर,पुलिस का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और सरकारी आदेश को लागू करने में बाधा डालने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात कही है।

पूरे विवाद की शुरुआत हालाँकि एक बिलबोर्ड को हटाने के प्रशासनिक आदेश से हुई थी, लेकिन कुछ ही घंटों में मामला पुलिस,नगर निगम और सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव में बदल गया। पहले आदेश की वैधता को लेकर सवाल उठे,जिसके बाद नगर निगम अधिकारियों को संशोधित आदेश लेकर वापस आना पड़ा। इसके बाद सुरक्षा बढ़ाई गई और पुलिस की मौजूदगी में बिलबोर्ड हटाने की कार्रवाई की गई।

घटना के बाद अब तीन अलग-अलग मामलों के जरिए पुलिस पूरे घटनाक्रम की जाँच कर रही है। एक ओर पुलिस अधिकारियों और नगर निगम कर्मचारियों की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है,वहीं दूसरी ओर यह भी जाँच का विषय होगा कि मौके पर मौजूद लोगों की भूमिका क्या थी और कथित तौर पर किसने सरकारी काम में बाधा डाली।

फिलहाल 13 तृणमूल कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस की कार्रवाई और एफआईआर में अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के अन्य नेताओं के नाम शामिल होने से आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। वहीं,नगर निगम की ओर से जिस बिलबोर्ड को हटाया गया है,उसे लेकर उठे कानूनी सवाल भी आगे की जाँच और कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कोलकाता में प्रशासनिक कार्रवाई,राजनीतिक प्रभाव और कानून-व्यवस्था के बीच टकराव को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।