भारतीय महिला हॉकी टीम (तस्वीर क्रेडिट@kreedajagat)

जर्मनी को 3-1 से हराकर भारत ने रचा इतिहास,महिला हॉकी विश्व कप 2026 में पाँचवें स्थान पर रहा; नवनीत कौर का शानदार प्रदर्शन

एमस्टेलवीन,28 अगस्त (युआईटीवी)- एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपने ऐतिहासिक अभियान का शानदार अंदाज में समापन किया। गुरुवार को पाँचवें और छठे स्थान के लिए खेले गए मुकाबले में भारत ने दुनिया की पाँचवें नंबर की टीम जर्मनी को 3-1 से हराकर टूर्नामेंट में पाँचवां स्थान हासिल किया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने विश्व कप में अपना अब तक का दूसरा सबसे बेहतरीन प्रदर्शन दर्ज किया। इससे पहले भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1974 में खेले गए पहले महिला हॉकी विश्व कप में रहा था,जब टीम चौथे स्थान पर रही थी। करीब पाँच दशक बाद भारतीय महिला टीम ने एक बार फिर विश्व मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

नीदरलैंड के एम्सटेलवीन में खेले गए इस मुकाबले के शुरुआती दो क्वार्टर में दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। पहले 30 मिनट तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। जर्मनी ने शुरुआत में गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और कई बार भारतीय सर्किल में पहुँचने की कोशिश की,लेकिन भारतीय डिफेंस ने बेहद अनुशासित प्रदर्शन करते हुए जर्मन आक्रमण को गोल में बदलने नहीं दिया। जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा,भारतीय टीम ने अपनी लय हासिल की और तीसरे क्वार्टर में पूरी तरह आक्रामक अंदाज में नजर आई।

भारत की जीत में नवनीत कौर सबसे बड़ी स्टार बनकर उभरीं। उन्होंने मैच में दो गोल किए और जर्मनी के खिलाफ भारतीय आक्रमण को लगातार धार दी। उनके अलावा इशिका ने भी एक शानदार गोल करके टीम की जीत की नींव मजबूत की। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे मुकाबले में आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए जर्मनी को लगातार दबाव में रखा। आखिरी मिनटों में जर्मनी ने वापसी की कोशिश जरूर की,लेकिन भारतीय डिफेंस ने अंतिम क्षणों तक मजबूती बनाए रखी।

मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों ने काफी सावधानी के साथ की। जर्मनी ने गेंद पर अधिक कब्जा रखते हुए भारतीय रक्षापंक्ति को परखने की कोशिश की। 11वें मिनट में जर्मनी के पास गोल करने का अच्छा मौका आया। जोहाना हैचेनबर्ग ने रिवर्स हिट के जरिए भारतीय गोलपोस्ट को निशाना बनाने का प्रयास किया,लेकिन भारतीय डिफेंडर ने समय रहते खतरे को टाल दिया।

भारत ने इसके तुरंत बाद जवाबी हमला किया। 13वें मिनट में लालरेम्सियामी को शिल्पी डबास से एक अच्छा हिट मिला। उन्होंने जर्मनी के 23 मीटर क्षेत्र में प्रवेश करते हुए नवनीत कौर को गेंद पहुँचाने की कोशिश की,लेकिन पास भारतीय खिलाड़ी तक नहीं पहुँच सका। इस मौके से भारत को गोल तो नहीं मिला,लेकिन टीम ने यह संकेत जरूर दे दिया कि वह जर्मनी के खिलाफ सिर्फ रक्षात्मक खेल तक सीमित नहीं रहने वाली है।

15वें मिनट में जर्मनी को मुकाबले का पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला। भारतीय गोलकीपर बिचू देवी ने शुरुआती खतरे को अच्छी तरह टाल दिया। हालाँकि,इसके बाद हुई गहमागहमी में गेंद एक भारतीय खिलाड़ी की स्टिक से ऊपर उठ गई,जिसके कारण जर्मनी को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिल गया। जर्मन टीम ने इस बार अलग रणनीति के साथ वैरिएशन आजमाया,लेकिन खिलाड़ियों के बीच तालमेल सही नहीं रहा और गेंद खेल के दायरे से बाहर चली गई। इस तरह पहला क्वार्टर गोलरहित बराबरी पर समाप्त हुआ।

दूसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने अपनी आक्रामकता बढ़ाई। भारत को इस अवधि में सबसे अच्छा मौका उस समय मिला,जब दीपिका ने नवनीत कौर को गेंद दी। नवनीत ने लालरेम्सियामी के लिए शानदार मौका बनाने की कोशिश की,लेकिन उनका शॉट लक्ष्य से बाहर चला गया। भारत के इस हमले ने जर्मन डिफेंस पर दबाव बढ़ाया। इसके कुछ ही देर बाद जर्मनी को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला,लेकिन भारतीय डिफेंस ने एक बार फिर शानदार बचाव करते हुए खतरे को समाप्त कर दिया।

पहले हाफ में दोनों टीमों ने कई प्रयास किए,लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली। भारतीय टीम के लिए यह सकारात्मक संकेत था कि उसने जर्मनी जैसी मजबूत टीम को पहले 30 मिनट में गोल करने से रोककर रखा। दूसरी ओर,भारत को भी अपने आक्रमण को और प्रभावी बनाने की जरूरत थी। मैच का असली रोमांच तीसरे क्वार्टर में देखने को मिला,जब भारतीय खिलाड़ियों ने अपने खेल का स्तर अचानक ऊँचा कर दिया।

43वें मिनट में भारत को आखिरकार सफलता मिली। नेहा ने गेंद पर नियंत्रण हासिल किया और उसे इशिका तक पहुँचाया। इशिका के पास आगे बढ़ने के दौरान दोनों ओर विकल्प मौजूद थे,लेकिन उन्होंने खुद जर्मन डिफेंस का सामना करने का फैसला किया। उन्होंने शानदार गति से आगे बढ़ते हुए विरोधी रक्षापंक्ति को छकाया और अपनी दौड़ का अंत बेहतरीन फिनिश के साथ किया। उनकी इस शानदार कोशिश ने भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी।

पहले गोल के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास और बढ़ गया। जर्मनी अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाया था कि भारत ने एक मिनट के भीतर अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। भारतीय टीम ने लगातार दबाव बनाए रखा और उसे पेनल्टी कॉर्नर मिला। इस मौके का फायदा उठाने की जिम्मेदारी नवनीत कौर ने सँभाली। उन्होंने जोरदार शॉट लगाकर जर्मन डिफेंस को भेद दिया और गेंद को गोल में पहुँचा दिया। भारत अब 2-0 से आगे था।

तीसरे क्वार्टर के बाकी समय में भी भारतीय टीम ने जर्मनी पर दबाव बनाए रखा। 2-0 की बढ़त के साथ भारत ने तीसरे क्वार्टर का अंत किया। अब जर्मनी के सामने आखिरी 15 मिनट में वापसी करने की कठिन चुनौती थी,जबकि भारतीय टीम के पास इतिहास रचने का सुनहरा अवसर था।

चौथे क्वार्टर की शुरुआत में भी भारत ने अपने आक्रामक तेवर बरकरार रखे। 47वें मिनट में भारतीय टीम ने अपना तीसरा गोल कर मुकाबले पर लगभग पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया। सलीमा ने बेसलाइन के पास से नवनीत कौर को गेंद दी। नवनीत ने शानदार व्यक्तिगत कौशल का प्रदर्शन करते हुए दो जर्मन डिफेंडरों को छकाया और गेंद को गोलपोस्ट के भीतर पहुँचा दिया। यह उनका मैच का दूसरा गोल था और भारत की बढ़त 3-0 हो गई।

तीन गोल से पिछड़ने के बाद जर्मनी ने आक्रामक रुख अपनाया। उसने लगातार भारतीय सर्किल में प्रवेश करने की कोशिश की और भारतीय डिफेंस पर दबाव बनाया। आखिरकार 59वें मिनट में जर्मनी को सफलता मिली और क्रिंग्स ने टीम के लिए एक गोल दाग दिया। इस गोल से जर्मनी की उम्मीदें थोड़ी जरूर जगीं,लेकिन समय बेहद कम बचा था।

मुकाबला समाप्त होने से केवल 12 सेकंड पहले जर्मनी को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। भारतीय टीम के लिए यह बेहद तनावपूर्ण क्षण था। अगर जर्मनी इस मौके को गोल में बदल देता तो मुकाबले का अंतिम पल बेहद रोमांचक हो सकता था,लेकिन भारतीय डिफेंस ने पूरी मजबूती के साथ खतरे को टाल दिया। आखिरी सीटी बजते ही भारतीय खिलाड़ियों ने 3-1 की शानदार जीत का जश्न मनाया।

इस जीत के साथ भारतीय टीम ने छह मैचों में दो जीत,तीन ड्रॉ और एक हार के रिकॉर्ड के साथ विश्व कप अभियान समाप्त किया। टीम को टूर्नामेंट में केवल एक मुकाबले में हार मिली और वह मौजूदा चैंपियन नीदरलैंड्स के खिलाफ थी। इसके अलावा भारत ने कई मजबूत टीमों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। चीन,इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी बेहतर रैंकिंग वाली टीमों के खिलाफ भारतीय टीम ने मुकाबले ड्रॉ कराए। इससे भारतीय टीम की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का पता चलता है।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत ने 6-1 की जबरदस्त जीत दर्ज की थी। यह विश्व कप में भारतीय महिला टीम की सबसे बड़ी जीत रही। इस मुकाबले में टीम के आक्रामक खेल और गोल करने की क्षमता ने सभी को प्रभावित किया। पूरे टूर्नामेंट में भारत ने कई मौकों पर दिखाया कि वह दुनिया की शीर्ष टीमों को कड़ी चुनौती देने में सक्षम है।

हालाँकि,भारतीय टीम सेमीफाइनल में पहुँचने से बेहद मामूली अंतर से चूक गई। टीम के लिए यह निराशाजनक जरूर रहा होगा,लेकिन पाँचवें स्थान पर रहना भारतीय महिला हॉकी के लिए बड़ी उपलब्धि है। खासकर जिस तरह टीम ने मजबूत विरोधियों के खिलाफ प्रदर्शन किया,उससे आने वाले समय के लिए उम्मीदें बढ़ी हैं।

इस ऐतिहासिक अभियान में भारतीय खिलाड़ियों ने न केवल परिणाम हासिल किए,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता भी साबित की। गोलकीपर से लेकर डिफेंस और फॉरवर्ड लाइन तक टीम ने कई मुकाबलों में संतुलित प्रदर्शन किया। जर्मनी के खिलाफ निर्णायक मुकाबले में भी भारत ने पहले दो क्वार्टर में धैर्य रखा और सही समय पर आक्रमण तेज करके मैच को अपने पक्ष में कर लिया।

नवनीत कौर का प्रदर्शन इस मुकाबले की सबसे खास उपलब्धियों में रहा। उनके दो गोलों ने भारत की जीत को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इशिका का पहला गोल भी बेहद महत्वपूर्ण रहा,जिसने भारत को लंबे समय तक चले गोलरहित मुकाबले में बढ़त दिलाई। इसके बाद भारतीय टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

भारतीय महिला हॉकी टीम अब इस प्रदर्शन से मिले आत्मविश्वास के साथ अगले बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ेगी। अगले महीने होने वाले एशियन गेम्स से पहले विश्व कप में पाँचवां स्थान हासिल करना टीम के मनोबल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विश्व कप में शीर्ष टीमों के खिलाफ किए गए प्रदर्शन ने भारतीय खिलाड़ियों को यह विश्वास दिया है कि वे बड़े टूर्नामेंटों में किसी भी मजबूत प्रतिद्वंद्वी को चुनौती दे सकती हैं।

भारत का यह अभियान भले ही सेमीफाइनल तक नहीं पहुँच सका,लेकिन पाँचवें स्थान के साथ टीम ने महिला हॉकी विश्व कप में अपने लिए एक नई उपलब्धि दर्ज की है। 1974 के चौथे स्थान के प्रदर्शन के बाद यह विश्व कप में भारत का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। जर्मनी के खिलाफ 3-1 की जीत ने इस यादगार अभियान को शानदार अंत दिया और भारतीय महिला हॉकी को आगे की चुनौतियों के लिए नई ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान किया।