ट्रंप ने 'लेक ओंटारियो' का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' करने का दिया आदेश (तस्वीर क्रेडिट@LutochirT)

ट्रंप का बड़ा फैसला: लेक ओंटारियो का नाम बदलकर होगा ‘लेक अमेरिका’, 30 दिन में प्रक्रिया पूरी करने का आदेश

वाशिंगटन,28 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय सरकार को लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने का आदेश दिया है। ट्रंप प्रशासन ने इस फैसले के पीछे झील के आर्थिक महत्व,अमेरिकी इतिहास में इसकी भूमिका और ग्रेट लेक्स क्षेत्र की सुरक्षा में अमेरिका के योगदान को आधार बनाया है। राष्ट्रपति की ओर से जारी कार्यकारी आदेश में अमेरिकी आंतरिक मामलों के मंत्री को संघीय भौगोलिक नाम बोर्ड के साथ समन्वय कर 30 दिनों के भीतर नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

हालाँकि,यह आदेश केवल अमेरिकी संघीय सरकार के इस्तेमाल किए जाने वाले आधिकारिक नाम पर लागू होगा। इसका अर्थ है कि अमेरिका के संघीय विभागों और एजेंसियों को भविष्य में अपने नक्शों,दस्तावेजों,अनुबंधों और आधिकारिक संचार में ‘लेक अमेरिका’ नाम का इस्तेमाल करना होगा। दूसरी ओर, कनाडा सरकार, ओंटारियो प्रांत, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं या निजी नक्शा प्रदाताओं को इस नाम को अपनाने के लिए आदेश में बाध्य नहीं किया गया है। ऐसे में झील के नाम को लेकर दोनों देशों के बीच अलग-अलग आधिकारिक और गैर-आधिकारिक इस्तेमाल की स्थिति बन सकती है।

लेक ओंटारियो उत्तरी अमेरिका की ग्रेट लेक्स प्रणाली की प्रमुख झीलों में से एक है। यह अमेरिका और कनाडा के बीच साझा जल क्षेत्र है और दोनों देशों की अंतर्राष्ट्रीय सीमा इसके बीच से गुजरती है। इसलिए ट्रंप प्रशासन की ओर से झील का नाम बदलने का फैसला केवल अमेरिकी प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित होने के बावजूद इसके राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव भी हो सकते हैं।

कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने ग्रेट लेक्स क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका को विशेष महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ग्रेट लेक्स का सबसे बड़ा संरक्षक है और इसमें वह जल क्षेत्र भी शामिल है जिसे वर्तमान में लेक ओंटारियो के नाम से जाना जाता है। ट्रंप के मुताबिक, अगर अमेरिका इस क्षेत्र की सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे में निवेश नहीं करता तो यह विशाल मीठे पानी की प्रणाली आज की तरह शिपिंग,मनोरंजन और जिम्मेदार उपयोग के लिए खुली नहीं होती।

राष्ट्रपति ने ग्रेट लेक्स में अमेरिकी तटरक्षक बल की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस क्षेत्र में संचालित 11 आइस-ब्रेकिंग जहाजों में से नौ अमेरिकी तटरक्षक बल के नियंत्रण में हैं। ये जहाज सर्दियों के दौरान जमी हुई बर्फ को हटाकर व्यापारिक जहाजों के लिए जलमार्गों को खुला रखने में मदद करते हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी तटरक्षक बल व्यापारिक जहाजों के मार्गों को बिना किसी शुल्क के खुला रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यकारी आदेश में अमेरिका की ओर से ग्रेट लेक्स के मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा पर किए गए खर्च का भी उल्लेख किया गया है। ट्रंप ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में अमेरिका ने इस पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए लगभग चार अरब डॉलर खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा ने इसी तरह के कार्यक्रमों पर तुलनात्मक रूप से काफी कम निवेश किया है। हालाँकि,कार्यकारी आदेश में कनाडा के निवेश को लेकर कोई विशिष्ट आँकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए दोनों देशों के निवेश की तुलना को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ सकते हैं।

ट्रंप ने झील के भौगोलिक और आर्थिक महत्व पर भी जोर दिया। आदेश में दावा किया गया है कि लेक ओंटारियो का सबसे गहरा हिस्सा अमेरिकी क्षेत्र में स्थित है और झील के अधिकांश जल भंडार पर अमेरिका का अधिकार है। इसी आधार पर आदेश में झील को अमेरिकी खोज,बसावट,व्यापार और रक्षा इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस क्षेत्र ने अमेरिका के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा में लंबे समय से योगदान दिया है।

कार्यकारी आदेश में न्यूयॉर्क राज्य के ओस्वेगो शहर का भी विशेष उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार,यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से एक महत्वपूर्ण किले के रूप में विकसित हुआ और सेंट लॉरेंस सीवे के रास्ते आने वाले जहाजों के लिए अमेरिका का पहला बंदरगाह रहा है। इसके अलावा, 1812 के युद्ध के दौरान सैकेट्स हार्बर में जहाज निर्माण और नौसैनिक अभियानों का भी उल्लेख किया गया है। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के माध्यम से ट्रंप प्रशासन ने यह तर्क देने की कोशिश की है कि झील का संबंध अमेरिकी इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है।

ग्रेट लेक्स-सेंट लॉरेंस सीवे प्रणाली को अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक,यह जलमार्ग बड़ी संख्या में रोजगार को समर्थन देता है और हर साल अरबों डॉलर की आर्थिक गतिविधियों,माल ढुलाई और व्यापारिक आय को बढ़ावा देता है। इस जलमार्ग के माध्यम से बड़ी मात्रा में औद्योगिक और कृषि उत्पादों की आवाजाही होती है।

ग्रेट लेक्स क्षेत्र के जलमार्गों से लौह अयस्क,चूना पत्थर,कोयला और कृषि उत्पादों समेत कई महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई की जाती है। भारी माल को जलमार्ग से ले जाना कई मामलों में सड़क या रेल परिवहन की तुलना में अधिक सुविधाजनक और आर्थिक हो सकता है। इसलिए इस क्षेत्र का महत्व केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है,बल्कि यह अमेरिका की व्यापक औद्योगिक और व्यापारिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।

कार्यकारी आदेश में झील के पानी के अन्य उपयोगों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार,लेक ओंटारियो और ग्रेट लेक्स प्रणाली का पानी बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले परमाणु,प्राकृतिक गैस और तेल आधारित बिजली संयंत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा,आसपास रहने वाले समुदायों के लिए यह क्षेत्र पीने के पानी का एक प्रमुख स्रोत भी है। इस वजह से ग्रेट लेक्स का संरक्षण पर्यावरण के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

ट्रंप ने कहा कि लेक ओंटारियो अमेरिका के भविष्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने में आगे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी। उन्होंने इसे एक समृद्ध आर्थिक संसाधन बताते हुए कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नागरिकों के लिए इसके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए इसका आधिकारिक नाम ‘लेक अमेरिका’ किया जाना चाहिए।

नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर कार्यकारी आदेश में समयसीमा भी तय की गई है। अमेरिकी आंतरिक मामलों के मंत्री को संघीय भौगोलिक नाम बोर्ड के साथ मिलकर 30 दिनों के भीतर इस बदलाव को पूरा करना होगा। इसके बाद अमेरिकी संघीय सरकार के सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों को अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में नए नाम का इस्तेमाल करना होगा। इसमें नक्शे,सरकारी अनुबंध,दस्तावेज और आधिकारिक संचार शामिल हैं।

हालाँकि,आदेश की सीमा को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें कनाडा को नया नाम अपनाने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया गया है। चूँकि,लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा दोनों के बीच साझा जल क्षेत्र है,इसलिए कनाडाई सरकार और ओंटारियो प्रांत अपने आधिकारिक दस्तावेजों और नक्शों में पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और निजी नक्शा कंपनियों पर भी अमेरिकी आदेश सीधे लागू नहीं होगा।

इससे आने वाले समय में एक ही झील के लिए अलग-अलग नामों के इस्तेमाल की स्थिति देखने को मिल सकती है। अमेरिकी संघीय एजेंसियाँ इसे ‘लेक अमेरिका’ के नाम से संदर्भित करेंगी,जबकि कनाडा और संभवतः अन्य संस्थाएं इसे ‘लेक ओंटारियो’ के नाम से ही पहचानती रहेंगी। भौगोलिक नामों को लेकर ऐसी स्थिति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशासनिक और मानचित्रण संबंधी सवाल भी पैदा कर सकती है।

ट्रंप का यह फैसला अमेरिका और कनाडा के बीच पहले से चल रहे व्यापारिक और राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप पहले ही कनाडा की व्यापार नीतियों और अमेरिका के साथ उसके आर्थिक संबंधों पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में लेक ओंटारियो का नाम बदलने का फैसला दोनों देशों के बीच संबंधों में एक और संवेदनशील मुद्दा बन सकता है।

फिलहाल अमेरिकी प्रशासन का जोर इस बात पर है कि नाम परिवर्तन को संघीय स्तर पर लागू किया जाए और सरकारी रिकॉर्ड तथा आधिकारिक संचार में ‘लेक अमेरिका’ का इस्तेमाल शुरू किया जाए। दूसरी ओर,कनाडा की ओर से इस नाम परिवर्तन को किस तरह देखा जाता है और क्या वह इसे स्वीकार करता है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर,ट्रंप का यह कार्यकारी आदेश केवल किसी भौगोलिक नाम में बदलाव का मामला नहीं है। इसके पीछे अमेरिका की आर्थिक भूमिका,जल संसाधनों पर अधिकार, क्षेत्रीय सुरक्षा,व्यापारिक जलमार्ग और ऐतिहासिक विरासत जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में 30 दिन की समयसीमा के भीतर अमेरिकी संघीय एजेंसियों द्वारा इस बदलाव को लागू किए जाने के साथ यह भी देखा जाएगा कि कनाडा,अंतर्राष्ट्रीय संगठन और निजी मानचित्र सेवाएँ इस नए अमेरिकी नाम को लेकर क्या रुख अपनाती हैं।