अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

ट्रंप की कनाडा को चेतावनी,अमेरिकी बाजार के लिए कार बनाने पर लगाया जाएगा टैरिफ; ईरान-रूस और नेपाल बाढ़ पर भी दिया बयान

वॉशिंगटन,28 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा में निर्मित कारों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी देकर दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि कनाडा अमेरिका के साथ उचित व्यवहार नहीं कर रहा है और अमेरिकी बाजार के लिए कनाडा में कारों का निर्माण किया जाना वॉशिंगटन के हित में नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका कनाडा से आने वाली कारों पर शुल्क लगाने जा रहा है। हालाँकि,उन्होंने प्रस्तावित टैरिफ की दर और इसे लागू करने की संभावित तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

ओवल ऑफिस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप से कनाडा में निर्मित कारों को लेकर सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका कनाडा की कारों पर टैरिफ लगाने जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि कनाडा अमेरिकी बाजार के लिए कारों का निर्माण करे। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में कनाडा के ऑटोमोबाइल उद्योग को अमेरिकी व्यापार नीति में एक बार फिर निशाना बनाया जा सकता है।

कनाडा और अमेरिका के बीच ऑटोमोबाइल उद्योग का रिश्ता बेहद गहरा है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएँ लंबे समय से एक-दूसरे के साथ जुड़ी हुई हैं और वाहन निर्माण तथा ऑटो पार्ट्स की आपूर्ति के लिए दोनों देश एक-दूसरे पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में कनाडा में निर्मित वाहनों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला केवल कनाडाई कंपनियों को ही प्रभावित नहीं करेगा,बल्कि अमेरिकी वाहन उद्योग और उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालाँकि,ट्रंप ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनका प्रशासन किस तरह के वाहनों या किन कंपनियों को प्रस्तावित टैरिफ के दायरे में लाएगा।

ट्रंप की यह नई चेतावनी ऐसे समय सामने आई जब उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया। इस आदेश के तहत अमेरिकी सरकार को लेक ओंटारियो को ‘लेक अमेरिका’ के नाम से संबोधित करने का निर्देश दिया गया है। हस्ताक्षर समारोह के दौरान ट्रंप ने कनाडा पर व्यापार के मामले में अमेरिका का फायदा उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कनाडा चाहता है कि उसके साथ अमेरिका के एक राज्य जैसा व्यवहार किया जाए,लेकिन अब अमेरिका ऐसा नहीं कर सकता।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों में लंबे समय से असंतुलन रहा है और उनका प्रशासन अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देगा। राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिका को अपने बाजार और उद्योगों की रक्षा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। कनाडा के साथ व्यापार को लेकर ट्रंप की यह सख्त भाषा उनके उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है,जिसमें वे अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देने और विदेशी उत्पादन पर निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देते रहे हैं।

कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर के दौरान अमेरिकी आंतरिक मंत्री डग बर्गम, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर और व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टाफ स्टीफन मिलर भी मौजूद थे। व्हाइट हाउस ने इस आदेश को ग्रेट लेक्स के अमेरिकी इतिहास का सम्मान करने और लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने की कार्रवाई के रूप में पेश किया है। हालाँकि,यह तत्काल स्पष्ट नहीं किया गया कि अमेरिका और कनाडा के बीच साझा इस झील के लिए नया नाम व्यवहार में किस तरह इस्तेमाल किया जाएगा।

लेक ओंटारियो का एक हिस्सा अमेरिकी और दूसरा हिस्सा कनाडाई क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसके नाम को लेकर लिया गया अमेरिकी प्रशासन का फैसला प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संवेदनशीलता को भी दर्शाता है। ट्रंप के बयान और कार्यकारी आदेश को एक साथ देखा जाए तो यह स्पष्ट है कि कनाडा के साथ संबंधों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति अपने दूसरे कार्यकाल में अधिक आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दे रहे हैं।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कनाडा के अलावा कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका ने नेपाल सरकार से संपर्क किया है और आपदा से निपटने के लिए हर संभव सहायता की पेशकश की है। ट्रंप ने बाढ़ की स्थिति को बेहद भयावह बताया और कहा कि अमेरिका नेपाल की जरूरत के अनुसार मदद उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ के कारण कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। बाढ़ और उससे जुड़ी परिस्थितियों के बाद अमेरिका की ओर से पहले ही आपातकालीन सहायता और आपदा प्रबंधन से जुड़े एक सलाहकार की तैनाती की घोषणा की जा चुकी है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका नेपाल की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर सहायता को आगे बढ़ाया जा सकता है।

ईरान को लेकर भी ट्रंप ने बेहद सख्त रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने के बावजूद ईरान अभी भी गंभीर आर्थिक और सैन्य दबाव का सामना कर रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अपने सैनिकों को वेतन देने में भी कठिनाई का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान मुश्किल स्थिति में है और उसकी क्षमता पहले की तुलना में काफी कम हो गई है।

ट्रंप ने साथ ही चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट का खुलना इस बात का संकेत नहीं माना जाना चाहिए कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई समाप्त हो गई है। उनके मुताबिक,ईरान के खिलाफ अमेरिकी दबाव जारी रहेगा और केवल समुद्री मार्ग के खुलने से परिस्थितियों में बड़ा बदलाव नहीं माना जा सकता।

ईरान के साथ तत्काल बातचीत की संभावना को भी ट्रंप ने खारिज कर दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका तेहरान के साथ बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रहा है, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ईरान से बातचीत करने के लिए बहुत कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी बैठक की तलाश में नहीं है और होर्मुज स्ट्रेट फिलहाल खुला हुआ है।

रूस और ईरान के संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने अपना रुख कुछ हद तक सशर्त रखा। उनसे पूछा गया कि यदि रूस ईरान के साथ अपने संबंधों को कम नहीं करता है तो क्या अमेरिका उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि यह रूस के व्यवहार पर निर्भर करेगा। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के मामले में रूस ने अब तक काफी अच्छा व्यवहार किया है।

ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से जुड़े एक अन्य सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें आशंका है कि रूस नाटो क्षेत्र पर हमला करने का आदेश दे सकता है,तो ट्रंप ने ऐसी चिंताओं को खारिज कर दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस,ईरान और पश्चिमी देशों के बीच संबंधों को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना हुआ है।

ट्रंप के ताजा बयानों से यह संकेत मिलता है कि उनका प्रशासन व्यापार और विदेश नीति दोनों मोर्चों पर दबाव की रणनीति को प्राथमिकता दे रहा है। कनाडा के खिलाफ संभावित ऑटोमोबाइल टैरिफ,ईरान पर जारी दबाव और रूस के व्यवहार पर निगरानी उनके व्यापक अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे का हिस्सा हैं। हालाँकि,कनाडाई कारों पर प्रस्तावित शुल्क की दर और समयसीमा के बारे में अभी कोई आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

यदि ट्रंप प्रशासन वास्तव में कनाडा निर्मित कारों पर नया टैरिफ लागू करता है,तो इसका असर उत्तर अमेरिकी ऑटोमोबाइल आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच वर्षों से चल रहे औद्योगिक सहयोग को देखते हुए इस तरह का शुल्क वाहन निर्माताओं, ऑटो पार्ट्स आपूर्तिकर्ताओं और उपभोक्ताओं के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि ट्रंप प्रशासन अपनी इस चेतावनी को कब और किस रूप में लागू करता है।