राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को दी रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ,बोलीं- रिश्तों की नींव विश्वास और संवेदनशीलता पर आधारित

नई दिल्ली,28 अगस्त (युआईटीवी)- रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में रक्षाबंधन को भारतीय उपासना,संस्कृति और सामाजिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है,बल्कि समाज में प्रेम,विश्वास, सम्मान,संवेदनशीलता और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। उन्होंने देशवासियों से रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर समाज और राष्ट्र की रक्षा का संकल्प लेने तथा इसी भावना के साथ विकसित भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने अपने संदेश की शुरुआत देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ देते हुए की। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन की पवित्र परंपरा प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति और उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। श्रद्धा और विश्वास के साथ हाथ पर बाँधे जाने वाले धागे को रक्षा के लिए पवित्र सूत्र-बंधन माना गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन श्लोकों और मंत्रों में भी रक्षा के इस पवित्र बंधन के अचल और स्थायी बने रहने की प्रार्थना की जाती रही है।

उन्होंने कहा कि समय के साथ रक्षाबंधन एक ऐसे भावपूर्ण सामाजिक पर्व के रूप में लोकप्रिय हुआ,जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधती है। इसके माध्यम से भाई-बहन के बीच प्रेम,स्नेह और एक-दूसरे की रक्षा तथा सहयोग का संकल्प मजबूत होता है। हालाँकि, राष्ट्रपति ने रक्षाबंधन के व्यापक सामाजिक महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह पर्व भाई-बहनों के साथ-साथ मित्रों,परिवार के सदस्यों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आत्मीयता और सम्मान की भावना को सुदृढ़ करता है।

राष्ट्रपति के अनुसार,रक्षाबंधन हमें यह याद दिलाता है कि जीवन के प्रत्येक रिश्ते की बुनियाद विश्वास,संवेदनशीलता और परस्पर सहयोग पर टिकी होती है। किसी भी रिश्ते की मजबूती केवल भावनात्मक जुड़ाव से नहीं,बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने,जिम्मेदारियों को समझने और जरूरत के समय सहयोग करने से होती है। ऐसे में रक्षाबंधन का पर्व इन मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।

राष्ट्रपति ने देशवासियों से अपील की कि रक्षाबंधन को केवल व्यक्तिगत रिश्तों का उत्सव न मानते हुए इसे सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना से भी जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि इस शुभ अवसर पर समाज और देश की रक्षा के लिए संकल्प लेना चाहिए। साथ ही,सभी नागरिकों को एकजुट होकर विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते रहना चाहिए।

राष्ट्रपति का यह संदेश ऐसे समय आया है,जब देशभर में रक्षाबंधन को लेकर उत्साह का माहौल है। यह पर्व भारतीय समाज में भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाता है। राखी बाँधने की परंपरा के साथ परिवार के सदस्यों के बीच शुभकामनाओं का आदान-प्रदान होता है और लोग एक-दूसरे के सुख, स्वास्थ्य तथा समृद्धि की कामना करते हैं।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी देशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि रक्षाबंधन का यह खुशी का अवसर प्यार,स्नेह और आपसी जुड़ाव के बंधन को मजबूत करे। उन्होंने देशवासियों से दया,सद्भाव और आपसी सम्मान जैसे मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रेरित होने की कामना की। उपराष्ट्रपति ने सभी के लिए सुख,शांति और समृद्धि की कामना करते हुए इस पर्व को सकारात्मक और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने वाला अवसर बताया।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी रक्षाबंधन के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि भाई-बहन के स्नेह,विश्वास और रक्षा के संकल्प का यह पर्व भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और पारिवारिक संबंधों को और मजबूत करता है। उन्होंने कामना की कि रक्षाबंधन का यह पावन अवसर सभी लोगों के जीवन में प्रेम,खुशियाँ और सुख-समृद्धि लेकर आए।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ देते हुए भाई-बहन के रिश्ते को अटूट प्रेम,विश्वास और स्नेह का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पवित्र बंधन लोगों के जीवन में प्रेम और खुशियों के साथ आपसी विश्वास को हमेशा बनाए रखे। उन्होंने देशवासियों के लिए सुखद और मंगलमय जीवन की कामना की।

संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी रक्षाबंधन पर देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने भाई-बहन के अटूट प्रेम,स्नेह और विश्वास को रक्षाबंधन की मूल भावना बताते हुए कहा कि यह पर्व रिश्तों की मिठास और समर्पण को और मजबूत करने वाला अवसर है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि रक्षाबंधन सभी के जीवन में सुख,समृद्धि और खुशियाँ लेकर आए।

रक्षाबंधन का पर्व भारतीय परंपरा में केवल एक धार्मिक या पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और पारस्परिक जिम्मेदारी की भावना का भी प्रतीक रहा है। राखी का धागा विश्वास और सुरक्षा की भावना से जुड़ा हुआ है। बदलते समय के साथ इस पर्व का स्वरूप भी व्यापक हुआ है और अब लोग इसे परिवार तथा समाज में आपसी संबंधों को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखते हैं।

राष्ट्रपति के संदेश में भी इसी व्यापक भावना को प्रमुखता दी गई है। उन्होंने रक्षा के विचार को केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा तक सीमित न रखते हुए समाज और राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़ा। उनका संदेश इस बात पर केंद्रित रहा कि मजबूत समाज का निर्माण तभी संभव है,जब नागरिक एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील रहें, परस्पर सम्मान करें और जरूरत के समय एक-दूसरे का सहयोग करें।

रक्षाबंधन के अवसर पर देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों की ओर से दी गई शुभकामनाओं में भी प्रेम,विश्वास,भाईचारे,सद्भाव और सामाजिक एकता की भावना प्रमुख रही। सभी नेताओं ने इस पर्व को परिवारों के बीच संबंध मजबूत करने और समाज में सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देने वाला अवसर बताया।

इस तरह रक्षाबंधन का पर्व एक बार फिर भारतीय संस्कृति के उन मूल्यों को सामने लाता है,जिनमें रिश्तों की मजबूती के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और सामूहिक जिम्मेदारी को महत्व दिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संदेश भी इसी विचार को आगे बढ़ाता है कि रक्षा का संकल्प केवल व्यक्तिगत रिश्तों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी में भी दिखाई दे। विकसित भारत के निर्माण के लिए विश्वास,सहयोग, संवेदनशीलता और एकजुटता जैसे मूल्यों को मजबूत करना ही इस पर्व की भावना को व्यापक अर्थ प्रदान कर सकता है।