डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@wsyx6)

ईरान के साथ बातचीत की संभावना से ट्रंप ने किया इनकार,बोले- सैन्य कार्रवाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई; तेहरान की क्षमता काफी घटी

वॉशिंगटन,28 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तत्काल किसी कूटनीतिक बातचीत की संभावना को खारिज करते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि हालिया टकराव के बाद ईरान गंभीर आर्थिक और सैन्य दबाव का सामना कर रहा है और उसकी क्षमताएं काफी सीमित हो गई हैं। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुल जाने को अमेरिकी कार्रवाई के अंत के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। हालाँकि,उन्होंने संभावित आगे की सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि तेहरान बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि वह अपने सैनिकों को वेतन तक नहीं दे पा रहा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान बड़ी मुश्किल में है और हालिया घटनाक्रम के बाद उसकी क्षमता पहले की तुलना में काफी कम रह गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की सैन्य क्षमता में आई कथित कमी को लेकर कोई विस्तृत आँकड़ा या जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह ईरान की किन सैन्य इकाइयों, ठिकानों, हथियार प्रणालियों या अन्य क्षमताओं की बात कर रहे हैं। इसके अलावा,उन्होंने यह भी नहीं बताया कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता किस स्तर तक प्रभावित हुई है।

ट्रंप ने विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि रणनीतिक समुद्री मार्ग के दोबारा खुल जाने का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई समाप्त हो गई है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई के विकल्प को अभी खुला रखना चाहता है।

होर्मुज स्ट्रेट अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के दौरान इस मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी रही है। ऐसे में इसके दोबारा खुलने को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालाँकि,ट्रंप ने इस घटनाक्रम के बावजूद यह संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के साथ अपने व्यापक विवाद को समाप्त मानकर नहीं चल रहा है।

ईरान के साथ तत्काल बातचीत की संभावना के सवाल पर ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि फिलहाल तेहरान से बातचीत करने के लिए बहुत ज्यादा कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी बैठक की तलाश में नहीं है और होर्मुज स्ट्रेट खुला हुआ है। उनके इस बयान से फिलहाल दोनों देशों के बीच तत्काल कूटनीतिक वार्ता की संभावना कमजोर होती दिखाई दे रही है।

ट्रंप की टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चिंता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति अपने प्रशासन के दौरान ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव,आर्थिक प्रतिबंधों और आगे की कार्रवाई की चेतावनियों का इस्तेमाल करते रहे हैं। ताजा बयान से भी यही संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है और तत्काल बातचीत के बजाय अपनी मौजूदा रणनीति को प्राथमिकता दे रहा है।

हालाँकि,ट्रंप ने यह नहीं बताया कि भविष्य में अमेरिका किन परिस्थितियों में ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कदम उठा सकता है। उन्होंने संभावित लक्ष्य,समयसीमा या कार्रवाई की प्रकृति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। इससे यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन की ओर से किसी नई कार्रवाई की तत्काल योजना है या केवल ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए सभी विकल्प खुले रखे जा रहे हैं।

राष्ट्रपति से रूस और ईरान के संबंधों को लेकर भी सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि यदि रूस ईरान के साथ अपने संबंधों को कम नहीं करता है तो क्या अमेरिका मॉस्को के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। उन्होंने हालाँकि,रूस के व्यवहार को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक टिप्पणी की।

ट्रंप ने कहा कि उनके आकलन के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट के मामले में रूस ने अब तक काफी अच्छा व्यवहार किया है। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूस ने ऐसा कौन सा कदम उठाया है जिसके आधार पर वह यह निष्कर्ष निकाल रहे हैं। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि क्या अमेरिका को मॉस्को की ओर से किसी तरह का आश्वासन मिला है।

यह भी स्पष्ट नहीं हुआ कि ट्रंप का रूस के प्रति यह आकलन केवल होर्मुज स्ट्रेट से संबंधित घटनाक्रम तक सीमित है या ईरान के साथ रूस के व्यापक संबंधों पर भी लागू होता है। रूस और ईरान के बीच लंबे समय से राजनीतिक,आर्थिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी को लेकर यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि वॉशिंगटन भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग को किस नजरिए से देखेगा।

ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप का बयान क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य पूर्व में किसी भी नए सैन्य टकराव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में किसी भी नए बदलाव पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट के खुलने को महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर स्वीकार किया,लेकिन उन्होंने यह कहने से परहेज किया कि संकट पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उनके अनुसार, ईरान अभी भी गंभीर आर्थिक और सैन्य दबाव में है और उसकी क्षमता पहले की तुलना में काफी कम हो चुकी है। इसके बावजूद उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका ईरान से आगे क्या अपेक्षा करता है या तनाव कम करने के लिए किन शर्तों को आवश्यक मानता है।

कूटनीतिक स्तर पर भी अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणियाँ महत्वपूर्ण हैं। आमतौर पर सैन्य टकराव के बाद बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश की जाती है,लेकिन ट्रंप ने फिलहाल इस विकल्प को प्राथमिकता नहीं देने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी बैठक की तलाश में नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन फिलहाल ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ सकता है।

हालाँकि,ट्रंप ने यह भी नहीं कहा कि अमेरिका हमेशा के लिए बातचीत का रास्ता बंद कर रहा है। उन्होंने केवल तत्काल बातचीत की संभावना से इनकार किया है। इसलिए भविष्य में परिस्थितियों के बदलने पर कूटनीतिक संपर्क की संभावना पूरी तरह समाप्त हुई है या नहीं,यह स्पष्ट नहीं है। इसी तरह,ईरान की ओर से संभावित प्रतिक्रिया को लेकर भी अमेरिकी प्रशासन ने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।

फिलहाल ट्रंप के बयान से तीन प्रमुख बातें सामने आती हैं। पहली,अमेरिका ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को कमजोर मान रहा है। दूसरी,होर्मुज स्ट्रेट के खुलने के बावजूद वॉशिंगटन ईरान के साथ अपने विवाद को समाप्त नहीं मानता। तीसरी,अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल बातचीत की कोई पहल करने की फिलहाल योजना नहीं दिखाई दे रही है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे अमेरिका और ईरान के संबंध किस दिशा में बढ़ेंगे। यदि सैन्य और आर्थिक दबाव जारी रहता है,तो क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ सकता है। दूसरी ओर,यदि दोनों पक्ष भविष्य में किसी समझौते या बातचीत के रास्ते पर लौटते हैं तो तनाव कम होने की संभावना बन सकती है। फिलहाल ट्रंप ने अपनी नीति के बारे में कोई विस्तृत रोडमैप पेश नहीं किया है और न ही यह बताया है कि आगे की कार्रवाई के लिए उनकी सरकार ने कौन से विकल्प तैयार रखे हैं।

ट्रंप की ताजा टिप्पणियों से इतना स्पष्ट है कि अमेरिका ईरान के मामले में अभी सतर्क और आक्रामक रुख बनाए रखना चाहता है। होर्मुज स्ट्रेट का खुलना भले ही व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति के लिए राहत की खबर हो,लेकिन अमेरिकी प्रशासन इसे ईरान के साथ पूरे संकट का अंत नहीं मान रहा। आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया,रूस की भूमिका और क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर होने वाले घटनाक्रम यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या एक बार फिर बढ़ता है।