प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (तस्वीर क्रेडिट@SUNILPHALWAN3)

भारत-रूस संबंधों को लेकर पुतिन का बड़ा बयान, बोले- पीएम मोदी के व्यक्तिगत ध्यान से मजबूत हुई रणनीतिक साझेदारी

बिश्केक,1 सितंबर (युआईटीवी)- किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन से इतर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक के दौरान रूसी राष्ट्रपति ने भारत और रूस के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों की सराहना की और कहा कि दोनों देशों के रिश्ते विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के सिद्धांतों के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने भारत-रूस संबंधों के विकास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत ध्यान को महत्वपूर्ण बताया।

राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात के दौरान कहा कि उन्हें एक बार फिर भारतीय प्रधानमंत्री से मिलकर बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तिगत ध्यान और दोनों नेताओं के बीच विकसित हुए गर्मजोशी भरे व्यक्तिगत एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों की अहम भूमिका रही है। पुतिन ने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और रूस के बीच संबंध केवल आधिकारिक या व्यावसायिक स्तर तक सीमित नहीं हैं,बल्कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित हुए हैं। उनके मुताबिक,यही विश्वास और आपसी समझ द्विपक्षीय संबंधों को लगातार आगे बढ़ाने में मदद कर रही है।

पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण बताया जब दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि एससीओ ऐसा संगठन है जो वैश्विक दक्षिण और पूर्व के देशों के बीच संबंधों तथा संपर्कों को गहरा करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके साथ ही संगठन क्षेत्र के सामाजिक,आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने तथा अधिक न्यायपूर्ण और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की मॉस्को यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने जो बातें कही थीं, वह उनसे पूरी तरह सहमत हैं। पुतिन के इस बयान से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद लगातार जारी है और दोनों पक्ष अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नियमित संपर्क में हैं।

बैठक के दौरान रूस और भारत के बीच राजनयिक संबंधों की आगामी महत्वपूर्ण वर्षगांठ का भी उल्लेख हुआ। पुतिन ने कहा कि वर्ष 2027 में दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ मनाएँगे। उन्होंने इस अवसर को दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। भारत और रूस के बीच दशकों से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों की पृष्ठभूमि में यह वर्षगांठ दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखती है।

रूसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि रूस सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की गंभीरता से तैयारी कर रहा है। ब्रिक्स के मंच पर भारत और रूस पहले से ही महत्वपूर्ण साझेदार हैं। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन दोनों देशों के साथ-साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है।

भारत और रूस के आर्थिक संबंधों पर भी बैठक में चर्चा हुई। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग में आम तौर पर सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष द्विपक्षीय व्यापार में कुछ गिरावट दर्ज की गई थी,लेकिन इस वर्ष के पहले छह महीनों में व्यापार में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पुतिन ने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।

रूसी राष्ट्रपति ने मॉस्को में हाल ही में हुई भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करीब एक सप्ताह पहले मॉस्को में हुई इस बैठक में अच्छे परिणाम सामने आए। भारत और रूस के बीच यह आयोग व्यापार, निवेश, औद्योगिक सहयोग और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करता है। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और मौजूदा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में इसकी भूमिका अहम रही है।

बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में भारत और रूस के बीच बढ़ते संबंधों का भी उल्लेख किया गया। पुतिन ने कहा कि रूस में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या के मामले में भारत प्रमुख देशों में शामिल है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या लगभग सात गुना बढ़ी है।

रूसी राष्ट्रपति के मुताबिक,फिलहाल करीब 40 हजार भारतीय छात्र रूस में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या को उल्लेखनीय उपलब्धि बताया। यह आँकड़ा दोनों देशों के बीच शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ने को दर्शाता है। चिकित्सा, तकनीकी शिक्षा और अन्य उच्च शिक्षा क्षेत्रों में रूस लंबे समय से भारतीय छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई इस बैठक को भारत-रूस संबंधों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, शिक्षा,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग सहित कई क्षेत्रों में लंबे समय से साझेदारी रही है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों देश अपने पारंपरिक संबंधों को नए क्षेत्रों में विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं।

बिश्केक में हुई मुलाकात के दौरान पुतिन की टिप्पणियों ने यह स्पष्ट किया कि रूस भारत के साथ अपने संबंधों को विशेष महत्व देता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बना हुआ है। वहीं आगामी वर्षों में राजनयिक संबंधों की 80वीं वर्षगांठ और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण अवसर भारत-रूस साझेदारी को नई दिशा देने का मंच उपलब्ध करा सकते हैं।

कुल मिलाकर,बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक में राजनीतिक विश्वास से लेकर व्यापार, शिक्षा और बहुपक्षीय सहयोग तक कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। पुतिन का यह कहना कि प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत ध्यान ने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है,भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के महत्व को रेखांकित करता है। दोनों देशों की कोशिश अब इस लंबे समय से चले आ रहे संबंध को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप और व्यापक तथा मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ाने की है।