अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

ईरान आर्थिक ‘मौत के भंवर’ में फँसा,प्रतिबंधों और सैन्य दबाव से बातचीत की मेज पर लौटने को होगा मजबूर: स्कॉट बेसेंट

एशविले,2 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा दावा किया है। बेसेंट ने कहा है कि ईरान इस समय आर्थिक रूप से ‘मौत के भंवर’ में फँस चुका है और अमेरिका की ओर से बढ़ते आर्थिक दबाव तथा सैन्य कार्रवाई का असर आखिरकार ईरानी नेतृत्व को दोबारा बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने का दावा सही नहीं है और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अमेरिका का नियंत्रण बना हुआ है।

जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के बाद एशविल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिविधियों और अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और उसकी सरकार पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। बेसेंट के मुताबिक, यही दबाव ईरानी नेतृत्व को सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

बेसेंट ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के दावे को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि ईरान के पास इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण नहीं है। उनके अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का नियंत्रण है और यह दावा गलत है कि ईरान ने इस जलमार्ग को सफलतापूर्वक बंद कर दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग से तेल का आवागमन जारी है।

अमेरिकी वित्त मंत्री ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों के दौरान करीब 1.7 करोड़ बैरल कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरा। उनके मुताबिक, यह आँकड़ा इस बात का संकेत है कि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह बंद करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रख रहा है और ईरान की ओर से होर्मुज के आसपास सैन्य क्षमताओं को फिर से स्थापित करने के प्रयासों का जवाब दिया जा रहा है।

बेसेंट ने बताया कि अमेरिकी सेना की सीमित सैन्य कार्रवाई में उन रडार प्रणालियों को निशाना बनाया गया,जिन्हें ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास दोबारा स्थापित करने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, इन प्रणालियों का इस्तेमाल समुद्री मार्ग में गतिविधियों पर नजर रखने और क्षेत्र में सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सकता था। बेसेंट ने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य दबाव बनाए रखना है,ताकि ईरान अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर हो।

ईरान की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वहाँ की सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक,ईरानी नेतृत्व आर्थिक संकट के कारण परेशान है और इसी वजह से वह सैन्य कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान में हालात इस कदर कठिन हो रहे हैं कि सरकार को कई मोर्चों पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

बेसेंट ने ईरान में ईंधन की कमी और लंबी कतारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईरान दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों वाले देशों में शामिल है,लेकिन इसके बावजूद वहां ईंधन को लेकर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री के अनुसार,यह स्थिति ईरान की अर्थव्यवस्था में मौजूद गंभीर असंतुलन को दिखाती है। उनका तर्क है कि ऊर्जा संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद यदि किसी देश में ईंधन की कमी और लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं,तो यह उसकी आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव का संकेत है।

स्कॉट बेसेंट ने ईरानी नेतृत्व के सामने संभावित तीन रास्तों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, लगातार बढ़ते दबाव के बीच तीन में से कोई एक स्थिति पैदा हो सकती है। पहला,इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के भीतर फूट पड़ सकती है। दूसरा,ईरान की जनता सरकार के खिलाफ विरोध तेज कर सकती है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण विकल्प यह हो सकता है कि ईरानी नेतृत्व अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर वापस आए और ऐसा समझौता करने की कोशिश करे जिसका पालन दोनों पक्षों की ओर से किया जा सके।

बेसेंट ने कहा कि किसी न किसी समय ऐसा मोड़ आएगा,जब आईआरजीसी के भीतर लोग आपस में बँट सकते हैं,जनता ईरानी नेतृत्व के खिलाफ खड़ी हो सकती है या फिर ईरानी सरकार बातचीत के रास्ते को चुन सकती है। अमेरिकी वित्त मंत्री के अनुसार, आर्थिक दबाव का अंतिम उद्देश्य ईरान को ऐसी स्थिति में लाना है,जहाँ वह अपने फैसलों पर पुनर्विचार करे और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के लिए तैयार हो।

अमेरिका की रणनीति का एक अहम हिस्सा ईरान की डॉलर तक पहुँच को सीमित करना भी है। बेसेंट ने कहा कि अमेरिका उन वित्तीय रास्तों को बंद करने की कोशिश कर रहा है, जिनके जरिए ईरान को विदेशी मुद्रा तक पहुँच मिलती है। उन्होंने विशेष रूप से चीनी मुद्रा रेनमिनबी में होने वाले भुगतान का जिक्र किया। उनके मुताबिक,चीन ईरान को रेनमिनबी में भुगतान करता है और इसके बाद यह राशि खाड़ी क्षेत्र के वित्तीय नेटवर्क के माध्यम से दूसरी मुद्राओं में बदली जाती है।

अमेरिका अब इसी वित्तीय व्यवस्था को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। बेसेंट के अनुसार,अमेरिकी कार्रवाई उन बैंकों,नकद लेनदेन केंद्रों और आपूर्ति नेटवर्क पर केंद्रित है,जिनका इस्तेमाल इन पैसों को दूसरी मुद्राओं में बदलने या एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले शुक्रवार को दुबई के एक बैंक के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी,हालाँकि,उन्होंने बैंक का नाम सार्वजनिक नहीं किया।

बेसेंट ने कहा कि यदि ईरान को अपने रेनमिनबी भुगतान को डॉलर या अन्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाली मुद्राओं में बदलने में मुश्किल होती है तो इससे ईरानी सरकार की आर्थिक क्षमता और कमजोर होगी। उनके मुताबिक,विदेशी मुद्रा तक पहुँच सीमित होने से ईरान के लिए अंतर्राष्ट्रीय कारोबार,आयात और वित्तीय लेनदेन को संचालित करना मुश्किल हो सकता है।

ईरानी मुद्रा के मूल्य में आई तेज गिरावट को भी बेसेंट ने आर्थिक संकट का महत्वपूर्ण संकेत बताया। उन्होंने कहा कि करीब 16 महीने पहले एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा की विनिमय दर लगभग 8 लाख के स्तर पर थी,जबकि अब यह करीब 2.10 लाख प्रति डॉलर के आसपास पहुँच गई है। बेसेंट ने इस बदलाव को ईरान की विदेशी मुद्रा तक कमजोर होती पहुँच से जोड़ते हुए कहा कि यह आर्थिक दबाव की गंभीरता को दर्शाता है।

अमेरिकी वित्त मंत्री ने हालाँकि,यह भी स्वीकार किया कि बढ़ते आर्थिक और सैन्य दबाव के बावजूद ईरान आगे और सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उनका कहना है कि दबाव बढ़ने पर ईरान की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता,लेकिन बेसेंट का मानना है कि लंबे समय तक आर्थिक संकट को बनाए रखना ईरानी सरकार के लिए मुश्किल होगा और अंततः उसे अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व सबसे ज्यादा है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके जरिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है। ऐसे में यहाँ किसी भी तरह का लंबा व्यवधान अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में इस समुद्री मार्ग की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

बेसेंट के बयानों से स्पष्ट है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर सैन्य दबाव के साथ-साथ वित्तीय और आर्थिक दबाव को भी अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बनाए हुए है। डॉलर तक ईरान की पहुँच सीमित करने,वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई करने और प्रतिबंधों के जरिए आर्थिक संसाधनों को प्रभावित करने की कोशिश का उद्देश्य ईरानी सरकार की क्षमता को कमजोर करना है। वहीं,सैन्य कार्रवाई के जरिए अमेरिका क्षेत्र में ईरान की रणनीतिक क्षमताओं पर भी दबाव बनाए रखना चाहता है।

हालाँकि,इस रणनीति का अगला परिणाम क्या होगा, यह काफी हद तक ईरानी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। यदि आर्थिक संकट और सैन्य दबाव बढ़ता है,तो ईरान के सामने घरेलू स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर, ईरान अगर बातचीत का रास्ता अपनाता है,तो दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की संभावना बन सकती है।

फिलहाल अमेरिकी वित्त मंत्री का संदेश साफ है कि वाशिंगटन ईरान पर आर्थिक दबाव कम करने के पक्ष में नहीं है। बेसेंट का मानना है कि लगातार बढ़ते वित्तीय संकट,विदेशी मुद्रा की कमी और सैन्य दबाव के बीच अंततः ईरान को ऐसा रास्ता तलाशना होगा जो उसे बातचीत की मेज तक वापस ले आए। वहीं,ईरान की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति किस दिशा में जाती है,यह आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।