बिश्केक,1 सितंबर (युआईटीवी)- किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई मुलाकात ने एक बार फिर भारत-रूस संबंधों की गर्मजोशी को सामने ला दिया। 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक की,जिसमें भारत और रूस के बीच संबंधों के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध और वैश्विक शांति के मुद्दे पर चर्चा हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की ‘कार डिप्लोमेसी’ भी देखने को मिली। दोनों नेता एक ही कार में बैठकर कार्यक्रम स्थल की ओर जाते नजर आए।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच व्यक्तिगत संबंधों की गर्मजोशी पहले भी कई मौकों पर दिखाई दे चुकी है। बिश्केक में एक ही कार में दोनों नेताओं का सफर इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच इस तरह का अनौपचारिक संपर्क अक्सर औपचारिक बैठकों से अलग एक विशेष संदेश देता है और आपसी विश्वास तथा सहजता को प्रदर्शित करता है।
इससे पहले दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति पुतिन भारत के दौरे पर आए थे। उस समय प्रधानमंत्री मोदी खुद उनका स्वागत करने के लिए दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पहुँचे थे। स्वागत के बाद दोनों नेता एक ही कार से आगे के कार्यक्रम के लिए रवाना हुए थे। उस समय भी दोनों नेताओं की साथ यात्रा ने काफी ध्यान आकर्षित किया था। अब बिश्केक में एक बार फिर दोनों नेताओं का एक ही वाहन में नजर आना भारत-रूस के शीर्ष नेतृत्व के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कार डिप्लोमेसी’ इससे पहले भी कई वैश्विक नेताओं के साथ देखने को मिल चुकी है। अलग-अलग मौकों पर उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा,जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, जर्मन चांसलर, जॉर्डन के राजकुमार अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय, सेशेल्स के राष्ट्रपति पेट्रिक हर्मिनी, जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ भी एक ही वाहन में यात्रा की है।
बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक कई लिहाज से महत्वपूर्ण रही। बैठक में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। खास तौर पर यूक्रेन में जारी युद्ध और शांति स्थापित करने के प्रयासों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का रुख स्पष्ट किया।
द्विपक्षीय बैठक से पहले अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि भारत शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और आगे भी शांति की दिशा में होने वाली हर कोशिश का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत लगातार इस मुद्दे पर चर्चा करता रहा है और पिछली मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युद्ध में बिताया गया प्रत्येक दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम नई आशा और उत्साह पैदा करता है। उनके इस बयान को भारत की उस नीति के अनुरूप देखा जा रहा है,जिसमें नई दिल्ली ने लगातार बातचीत और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान पर जोर दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया को कभी न खत्म होने वाले युद्ध से आगे बढ़कर युद्ध के अंत की दिशा में जाना ही होगा। उन्होंने इसे केवल किसी एक देश या क्षेत्र के हित के लिए नहीं,बल्कि पूरी मानवता के हित के लिए आवश्यक बताया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, सभी लंबित मुद्दों का जल्द से जल्द शांतिपूर्ण तरीके से समाधान होना चाहिए। उन्होंने इसे मानवता की पुकार और भारत का संदेश बताया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की शांति की परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की धरती और भगवान बुद्ध की धरती से दुनिया को शांति का संदेश मिलता है। भारत हमेशा संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी वह संवाद तथा कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात करता रहा है।
भारत का यह रुख यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से लगातार देखने को मिला है। नई दिल्ली ने रूस के साथ अपने पुराने और मजबूत संबंधों को बनाए रखते हुए यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की जरूरत पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर यह बात दोहरा चुके हैं कि युद्ध और हिंसा किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते।
राष्ट्रपति पुतिन के साथ बिश्केक में हुई बैठक के दौरान भारत-रूस संबंधों पर भी व्यापक चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, परमाणु सहयोग, शिक्षा और तकनीक सहित कई क्षेत्रों में लंबे समय से साझेदारी है। वैश्विक परिस्थितियों में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच भारत और रूस अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई परिस्थितियों के अनुरूप आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मुलाकात का एक महत्वपूर्ण पहलू दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संपर्क भी रहा। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच कई वर्षों से नियमित बातचीत और मुलाकात होती रही है। दोनों नेता विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान द्विपक्षीय बैठकों के अलावा अनौपचारिक बातचीत भी करते रहे हैं। यही वजह है कि बिश्केक में एक ही कार में यात्रा करते हुए दोनों नेताओं की तस्वीरें और वीडियो कूटनीतिक हलकों में खास चर्चा का विषय बने।
‘कार डिप्लोमेसी’ को आम तौर पर नेताओं के बीच अनौपचारिक संवाद और व्यक्तिगत विश्वास का प्रतीक माना जाता है। औपचारिक बैठकों में जहां एजेंडा और प्रोटोकॉल का पालन होता है,वहीं एक साथ यात्रा के दौरान नेताओं को अपेक्षाकृत सहज माहौल में बातचीत का अवसर मिलता है। प्रधानमंत्री मोदी की कई विदेशी नेताओं के साथ ऐसी यात्राएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं।
बिश्केक की बैठक ऐसे समय में हुई है,जब दुनिया कई गंभीर भू-राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रही है। यूक्रेन युद्ध के अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में भारत और रूस जैसे प्रमुख देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के जरिए यह स्पष्ट किया कि भारत युद्ध के बजाय शांति, संवाद और कूटनीति के रास्ते को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि दुनिया को संघर्षों को लंबा खींचने के बजाय उनके शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भारत का संदेश साफ है कि मानवता की प्रगति के लिए शांति आवश्यक है और युद्ध का अंत ही स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम है।
बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात इसलिए भी खास रही क्योंकि इसमें औपचारिक कूटनीति के साथ दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों की झलक भी दिखाई दी। एक ही कार में सफर और उसके बाद हुई द्विपक्षीय बैठक ने भारत-रूस संबंधों की निरंतरता को सामने रखा। वहीं यूक्रेन युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का शांति का संदेश यह बताता है कि भारत रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखते हुए वैश्विक शांति और बातचीत की आवश्यकता पर भी जोर देता रहेगा।
