ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम (तस्वीर क्रेडिट@RcbianOfficial)

खराब फॉर्म का खामियाजा,मार्नस लाबुशेन ऑस्ट्रेलियाई वनडे टीम से बाहर; विश्व कप की तैयारी में युवाओं पर भरोसा

नई दिल्ली,1 सितंबर (युआईटीवी)- खराब फॉर्म से जूझ रहे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने जिम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली छह मैचों की वनडे सीरीज के लिए टीम में शामिल नहीं किया है। लंबे समय से रनों के लिए संघर्ष कर रहे लाबुशेन को टीम से बाहर रखने का फैसला अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चयनकर्ताओं ने एक ओर जहाँ अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी कराई है,वहीं दूसरी तरफ युवा खिलाड़ियों को भी अपनी क्षमता साबित करने का मौका दिया है।

लाबुशेन का हालिया प्रदर्शन चयनकर्ताओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई तीन मैचों की वनडे सीरीज में उनका बल्ला पूरी तरह खामोश रहा था। इस सीरीज में उन्होंने सिर्फ 24 रन बनाए थे। इसके बाद जून में बांग्लादेश के खिलाफ मीरपुर में खेली गई तीन वनडे मैचों की सीरीज में भी वह अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे। इस सीरीज में उनके बल्ले से केवल एक अर्धशतक निकला। टेस्ट क्रिकेट में भी उनका खराब दौर जारी रहा और बांग्लादेश के खिलाफ हाल में समाप्त हुई दो टेस्ट मैचों की घरेलू सीरीज में वह बड़ी पारियाँ खेलने में असफल रहे।

लाबुशेन की लगातार खराब फॉर्म ने उनके लिए वनडे टीम में जगह बनाए रखना मुश्किल कर दिया। ऑस्ट्रेलिया के चयनकर्ताओं की नजर अब अगले साल होने वाले विश्व कप पर है और ऐसे में टीम में उन खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है,जो आने वाले महीनों में लगातार प्रदर्शन करके अपनी जगह मजबूत कर सकें। लाबुशेन के बाहर होने के पीछे यही रणनीति सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।

ऑस्ट्रेलिया की वनडे टीम में मिचेल मार्श और ट्रेविस हेड की वापसी ने भी लाबुशेन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दोनों खिलाड़ी टीम के अहम सदस्य हैं और उनकी वापसी से बल्लेबाजी क्रम में प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है। ऐसे में चयनकर्ताओं ने फिलहाल लाबुशेन को बाहर रखकर दूसरे विकल्पों को आजमाने का फैसला किया है। यह फैसला लाबुशेन के लिए एक चेतावनी के तौर पर भी देखा जा सकता है कि उन्हें घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार रन बनाकर टीम में वापसी का दावा मजबूत करना होगा।

चयनकर्ताओं ने इस दौरे के लिए युवा खिलाड़ियों पर भी भरोसा जताया है। बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने वाले गेंदबाज जोएल डेविस को वनडे टीम में मौका दिया गया है। उनके लिए यह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी क्षमता को बड़े मंच पर साबित करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। वहीं पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में पदार्पण करने वाले ओली पीक को भी टीम में बनाए रखा गया है। युवा खिलाड़ियों को लगातार अवसर देने की यह नीति ऑस्ट्रेलिया की विश्व कप से पहले मजबूत और संतुलित टीम तैयार करने की योजना का हिस्सा है।

ऑस्ट्रेलियाई टीम में अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी और युवाओं के मिश्रण पर मुख्य चयनकर्ता जॉर्ज बेली ने भी जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जिम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली छह मैचों की सीरीज अगले साल के विश्व कप की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक मिचेल मार्श,ट्रेविस हेड और जोश हेजलवुड की वापसी टीम के लिए अच्छी खबर है। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका सीरीज में पैट कमिंस और मिशेल स्टार्क की वापसी से टीम को अपने मुख्य खिलाड़ियों का बेहतर संयोजन तैयार करने का मौका मिलेगा।

जॉर्ज बेली ने युवा खिलाड़ियों ओली पीक और जोएल डेविस के लिए भी इस दौरे को शानदार अवसर बताया। उनका मानना है कि इन खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का मौका मिलना जरूरी है। चयनकर्ताओं की कोशिश है कि विश्व कप से पहले टीम के मुख्य खिलाड़ियों के साथ-साथ ऐसे युवा विकल्प भी तैयार रहें,जो जरूरत पड़ने पर जिम्मेदारी सँभाल सकें।

ऑस्ट्रेलियाई टीम के दौरे का कार्यक्रम भी काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज हरारे में खेलेगा। पहला मुकाबला 15 सितंबर को, दूसरा 18 सितंबर को और तीसरा वनडे 20 सितंबर को आयोजित होगा। इसके बाद टीम दक्षिण अफ्रीका का रुख करेगी,जहाँ तीन वनडे मैच खेले जाएँगे। यह सीरीज 24 सितंबर से शुरू होगी और इसके बाद 27 तथा 30 सितंबर को अगले दो मुकाबले होंगे।

दिलचस्प बात यह है कि जिम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका दोनों ही अगले वनडे विश्व कप के मेजबान हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के लिए इन दोनों टीमों के खिलाफ खेली जाने वाली सीरीज को विश्व कप की तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है। विदेशी परिस्थितियों में इन मुकाबलों के जरिए ऑस्ट्रेलियाई टीम को अपनी रणनीति,संयोजन और खिलाड़ियों की उपयोगिता परखने का अवसर मिलेगा।

गेंदबाजी विभाग में भी ऑस्ट्रेलिया ने अलग-अलग संयोजन तैयार करने की कोशिश की है। पैट कमिंस और मिशेल स्टार्क को केवल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज के लिए चुना गया है। वहीं जोश हेजलवुड दोनों सीरीज का हिस्सा होंगे। जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे सीरीज में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी पैट कमिंस की गैरमौजूदगी में मिचेल मार्श नहीं,बल्कि उपलब्ध नेतृत्व समूह के अनुसार तय संयोजन से होगी,जबकि चयन संबंधी योजना में कमिंस को जिम्बाब्वे सीरीज की कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ स्टार खिलाड़ियों की वापसी से टीम और मजबूत होगी।

लाबुशेन के लिए टीम से बाहर होना निश्चित रूप से बड़ा झटका है,लेकिन विश्व कप से काफी पहले यह फैसला उनके लिए वापसी का रास्ता भी खोल सकता है। अगर वह घरेलू क्रिकेट और आगामी मुकाबलों में लगातार रन बनाने में सफल रहते हैं,तो चयनकर्ताओं का ध्यान फिर से उनकी ओर जा सकता है। ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन के लिए फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता ऐसा बल्लेबाजी क्रम तैयार करना है,जो विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में दबाव झेल सके और लगातार रन बना सके।

ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा रणनीति से साफ है कि चयनकर्ता केवल नाम और पुराने प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों को जगह देने के बजाय मौजूदा फॉर्म और भविष्य की जरूरतों को प्राथमिकता दे रहे हैं। लाबुशेन जैसे अनुभवी खिलाड़ी का बाहर होना इसी सोच का उदाहरण है। वहीं युवा खिलाड़ियों को मौका देकर टीम प्रबंधन आने वाले समय के लिए विकल्प तैयार कर रहा है।

जिम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ छह वनडे मुकाबले ऑस्ट्रेलिया के लिए सिर्फ द्विपक्षीय सीरीज नहीं होंगे,बल्कि विश्व कप की तैयारी का अहम चरण भी साबित हो सकते हैं। अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी,युवाओं को अवसर और लाबुशेन जैसे स्थापित बल्लेबाज को बाहर रखने का फैसला बताता है कि ऑस्ट्रेलिया ने विश्व कप की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। अब इन सीरीज में खिलाड़ियों का प्रदर्शन ही तय करेगा कि कौन विश्व कप के लिए टीम के मुख्य दावेदारों में अपनी जगह पक्की कर पाता है और कौन चयनकर्ताओं की योजना से बाहर होता जाता है।