ईरान पर अमेरिका के नए हवाई हमले (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

ईरान-अमेरिका संघर्ष में बढ़ा तनाव,अमेरिकी हमलों में 18 की मौत और 108 घायल; जवाबी कार्रवाई का ईरान ने किया दावा

तेहरान,3 सितंबर (युआईटीवी)- ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। दोनों देशों के बीच रातभर चले हमलों और जवाबी हमलों ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों में उसके 18 लोगों की मौत हुई है,जबकि 108 अन्य लोग घायल हुए हैं। ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट पर स्वास्थ्य मंत्री मोहम्मद रेजा जफरगांदी के बयान के हवाले से यह जानकारी दी गई। ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमलों में नागरिक इलाकों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े ढाँचों को भी निशाना बनाया गया,जिससे जान-माल का नुकसान हुआ है। वहीं अमेरिका ने अपनी सैन्य कार्रवाई को ईरानी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी सैनिकों तथा व्यापारिक जहाजों के खिलाफ कथित हमलों की कोशिशों का जवाब बताया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उसका देश अपनी स्वतंत्रता,राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए दृढ़ता से जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सरकार ने मंगलवार रात एक बार फिर ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार,अमेरिकी कार्रवाई में कई नागरिक इलाकों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े ढाँचों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में कई लोग मारे गए और घायल हुए, जबकि सरकारी तथा निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुँचा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह इन हमलों को केवल सैन्य कार्रवाई के रूप में नहीं देखता,बल्कि इसे अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ सीधा हमला मानता है।

ईरानी स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार,अमेरिकी हमलों में 18 लोगों की जान गई और 108 लोग घायल हुए हैं। हालाँकि, ईरान की ओर से बताए गए इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संघर्ष के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई होने के कारण नुकसान का पूरा आकलन करना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ईरान का आरोप है कि हमलों का असर केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि आम नागरिकों और सार्वजनिक ढांचे पर भी पड़ा है। इसी संदर्भ में ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर अंतर्राष्ट्रीय नियमों और ईरान की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

दूसरी ओर,अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बुधवार को कहा कि उसकी सेनाओं ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमलों की एक सफल श्रृंखला पूरी की है। अमेरिकी पक्ष के अनुसार,यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की ओर से हमलों की कोशिशों के जवाब में की गई। अमेरिका का कहना है कि क्षेत्र में उसके सैन्य बलों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों के लिए उत्पन्न खतरे को देखते हुए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक और खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है।

ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में मध्य पूर्व के कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और संसाधनों को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरान के अनुसार,उसकी जवाबी कार्रवाई जॉर्डन,कुवैत, बहरीन, इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक पहुँची। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कई अलग-अलग सैन्य कार्रवाइयों का दावा करते हुए कहा है कि उसने अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया। हालाँकि,ईरान की ओर से किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी सामने नहीं आई है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने कुवैत में स्थित अली अल-सलेम अमेरिकी बेस में अमेरिकी कमांडर के आवास और कमांड पोस्ट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। ईरान की ओर से कहा गया कि यह कार्रवाई उस अभियान का हिस्सा थी,जो अली अल-सलेम बेस के खिलाफ चलाया जा रहा है। संगठन ने यह भी दावा किया कि इस कार्रवाई से यह साबित होता है कि उसे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की पूरी जानकारी है। यदि इस दावे की पुष्टि होती है,तो यह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार,इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जॉर्डन में अकाबा की खाड़ी के पास स्थित अमेरिकी मरीन बेस कैंप टिटियन पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने का भी दावा किया। ईरानी संगठन का कहना है कि यह हमला ईरान के सिरिक इलाके में एक शादी समारोह पर हुए कथित अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया। ईरान ने आरोप लगाया है कि शादी समारोह को निशाना बनाए जाने की घटना में आम नागरिक प्रभावित हुए। इसी को आधार बनाकर ईरानी पक्ष ने अपने जवाबी हमले को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया है।

ईरानी दावे के मुताबिक,जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकाने पर किए गए हमले में कई सैन्य सुविधाएं और हेलीकॉप्टर नष्ट हुए तथा अमेरिकी बलों को भारी नुकसान पहुँचा। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। युद्ध और सैन्य संघर्ष की परिस्थितियों में दोनों पक्ष अक्सर अपनी कार्रवाई की सफलता और दूसरे पक्ष को हुए नुकसान को लेकर अलग-अलग दावे करते हैं। ऐसे में वास्तविक स्थिति का आकलन स्वतंत्र जानकारी उपलब्ध होने के बाद ही संभव हो सकेगा। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से सामने आ रहे बयानों ने संघर्ष की गंभीरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

ईरान ने इराक के एरबिल में मौजूद एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को भी निशाना बनाने का दावा किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अनुसार,उसने वहाँ निगरानी गुब्बारे की नियंत्रण प्रणाली को नष्ट कर दिया। ईरान की ओर से यह भी दावा किया गया कि उसकी जमीनी सेना ने एरबिल में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया, जिसमें एक रखरखाव केंद्र और तकनीकी उपकरणों के गोदामों को नष्ट किया गया। संगठन ने दावा किया कि हमले के दौरान कई अमेरिकी कर्मियों की मौत हुई और ईंधन भंडारण सुविधाओं में आग लग गई। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ईरान की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि वह अमेरिकी हमलों का जवाब देना जारी रखेगा। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि संघर्ष केवल दोनों देशों के बीच सीमित सैन्य टकराव तक नहीं रहेगा,बल्कि मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों तक फैल सकता है। जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी होने के कारण वहाँ होने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसी वजह से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से तनाव कम करने और सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील कर रहा है।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच रातभर हुए नए हमलों और जवाबी हमलों पर गहरी चिंता जताई है। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव दोनों देशों के बीच हुई नई सैन्य कार्रवाइयों को लेकर बेहद चिंतित हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन खबरों पर चिंता जताई,जिनमें आम नागरिकों के हताहत होने की बात सामने आई है। इनमें ईरान में एक शादी समारोह को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने की घटना भी शामिल है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने कहा कि नागरिकों को निशाना बनाकर किए जाने वाले सभी हमलों की निंदा की जाती है। उन्होंने सभी पक्षों को अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने की याद दिलाई। इसके तहत सैन्य लक्ष्यों और नागरिकों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना,सैन्य कार्रवाई में संतुलन और अनुपात का ध्यान रखना तथा आम लोगों को नुकसान से बचाने के लिए हर संभव सावधानी बरतना शामिल है। संयुक्त राष्ट्र का यह रुख ऐसे समय में आया है,जब दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर रहे हैं और नागरिक इलाकों पर हमलों को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने इस बात पर भी जोर दिया कि मौजूदा हालात को और बिगड़ने से रोकना बेहद जरूरी है। महासचिव ने एक बार फिर तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और ऐसे कदमों तथा बयानों से बचने का आग्रह किया है, जो पहले से ही बेहद तनावपूर्ण स्थिति को और अधिक गंभीर बना सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र की चिंता केवल मौजूदा सैन्य कार्रवाइयों तक सीमित नहीं है,बल्कि यह भी है कि यदि जवाबी हमलों का सिलसिला जारी रहा तो इसका दायरा और बढ़ सकता है।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस संघर्ष में होर्मुज जलडमरूमध्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। अमेरिका ने अपनी सैन्य कार्रवाई को इस जलमार्ग में व्यापारिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ कथित खतरों से जोड़कर देखा है। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। ऐसे में यहाँ किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रह सकता। व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति में क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर आर्थिक तथा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बढ़ सकती हैं।

मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ी चिंता यह है कि दोनों पक्ष लगातार जवाबी कार्रवाई की बात कर रहे हैं। ईरान अमेरिकी हमलों का जवाब जारी रखने की बात कह रहा है,जबकि अमेरिका अपने सैन्य अभियानों को सुरक्षा और कथित हमलों के जवाब के रूप में उचित ठहरा रहा है। ऐसे माहौल में किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से तनाव और बढ़ सकता है। खासकर तब,जब क्षेत्र में कई अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं और ईरान उन्हें संभावित जवाबी हमलों का लक्ष्य मान रहा है।

नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता लगातार बढ़ रही है। ईरान ने अमेरिकी हमलों में 18 लोगों की मौत और 108 लोगों के घायल होने की जानकारी दी है। इसके अलावा नागरिक इलाकों और सार्वजनिक ढाँचे को नुकसान पहुँचने का दावा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी नागरिकों के हताहत होने की खबरों पर विशेष चिंता जताई है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन और आम नागरिकों को सैन्य संघर्ष से बचाने की मांग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

कुल मिलाकर,ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष अब केवल दो देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है। इसके प्रभाव पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर पड़ने की आशंका है। एक ओर अमेरिका ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है,वहीं दूसरी ओर ईरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा कर रहा है। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, लेकिन लगातार सामने आ रही सैन्य कार्रवाइयों ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने और संयम बरतने की अपील कर रहा है, जबकि ईरान अपने जवाबी अभियान को जारी रखने की प्रतिबद्धता जता चुका है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्ष तनाव कम करने की दिशा में कोई कदम उठाते हैं या जवाबी हमलों का सिलसिला और व्यापक रूप लेता है।