पोलैंड के उप प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

भारत-पोलैंड संबंधों को मिलेगी नई मजबूती, साइबर सुरक्षा से अंतरिक्ष और महत्वपूर्ण खनिजों तक समझौतों पर काम

वारसॉ,5 सितंबर (युआईटीवी)- विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत और पोलैंड अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौतों पर काम कर रहे हैं। इनमें साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, स्वच्छ कोयला, वर्गीकृत जानकारी और महत्वपूर्ण खनिज जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रस्तावित समझौते दोनों देशों के संबंधों में न केवल गहराई बढ़ाएँगे,बल्कि सहयोग को ठोस आधार और नई दिशा भी देंगे। विदेश मंत्री ने यह बात वारसॉ में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ हुई वार्ता के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।

जयशंकर ने कहा कि भारत और पोलैंड के बीच लंबे समय से सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देशों ने वर्ष 2024 में अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुँचाया था। उनके मुताबिक,पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद और विभिन्न क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के बीच नियमित बैठकों और विभिन्न द्विपक्षीय तंत्रों की सक्रियता से दोनों देशों की बढ़ती निकटता स्पष्ट दिखाई देती है।

विदेश मंत्री ने कहा कि उनकी बैठक में भारत और पोलैंड के बीच दो साल पहले बनी कार्य योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। इस कार्य योजना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान सहमति बनी थी। उन्होंने कहा कि इसकी समीक्षा के दौरान सामने आया रिपोर्ट कार्ड काफी ठोस रहा। व्यापार और निवेश में बढ़ोतरी, रक्षा सहयोग में मजबूती तथा खनन और ऊर्जा जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार के साथ-साथ अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक,कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएँ सामने आई हैं।

जयशंकर ने कहा कि भारत और पोलैंड के बीच आर्थिक संबंधों में सकारात्मक प्रगति देखने को मिल रही है। व्यापार और निवेश में वृद्धि दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे द्विपक्षीय रिश्तों को आर्थिक आधार मिलता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक क्षेत्रों में सहयोग के साथ अब दोनों देश उभरती हुई तकनीकों और रणनीतिक क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इससे भारत और पोलैंड की साझेदारी आने वाले वर्षों में और व्यापक होने की संभावना है।

रक्षा सहयोग को भी दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। जयशंकर के अनुसार,रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार गहरा हुआ है और दोनों पक्ष इस क्षेत्र में आगे की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। भारत और पोलैंड के बीच रक्षा सहयोग के अलावा जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों को भी वार्ता में शामिल किया गया। दोनों देशों के बीच रक्षा कार्य समूह के जरिए सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को संस्थागत रूप देने के लिए कई तंत्र लगातार सक्रिय हैं। हाल ही में विदेश कार्यालय परामर्श आयोजित किया गया था और संयुक्त आयोग की बैठक भी हुई। इसके अलावा रक्षा कार्य समूह भी दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा,अंतरिक्ष,स्वच्छ कोयला,वर्गीकृत जानकारी और महत्वपूर्ण खनिजों समेत कई अन्य क्षेत्रों में समझौतों पर काम चल रहा है। इन समझौतों के लागू होने से दोनों देशों के संबंधों में ‘बनावट और सार’ दोनों जुड़ेंगे।

महत्वपूर्ण खनिजों का मुद्दा मौजूदा वैश्विक अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व रखता है। इलेक्ट्रिक वाहन, उन्नत तकनीक, ऊर्जा भंडारण और कई आधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण खनिज आवश्यक हैं। ऐसे में भारत और पोलैंड के बीच इस क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक और आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। इसी तरह साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्र तेजी से वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन रहे हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों के बीच तकनीकी और सुरक्षा साझेदारी को नई मजबूती मिल सकती है।

जयशंकर ने अपनी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क और शैक्षणिक सहयोग को भी महत्व दिया। उन्होंने घोषणा की कि जामसाहेब मेमोरियल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम का दूसरा संस्करण अक्टूबर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के जरिए भारत और पोलैंड के युवाओं के बीच संपर्क बढ़ाने और दोनों देशों की नई पीढ़ी को एक-दूसरे की संस्कृति तथा समाज को समझने का अवसर देने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने पोलिश विश्वविद्यालयों में भारत से जुड़े अध्ययन कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। जयशंकर ने कहा कि पोलैंड के विश्वविद्यालयों में भारत विद्या और संस्कृत के कार्यक्रम अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। यह दोनों देशों के बीच केवल राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को ही नहीं,बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षणिक संपर्कों को भी मजबूत करने में मदद कर रहा है। भारत और पोलैंड के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक संबंध रहे हैं और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग इन संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।

विदेश मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते संबंधों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच रिश्ते स्पष्ट रूप से गहरे हुए हैं। इस संदर्भ में उन्होंने हाल में हुए मुक्त व्यापार समझौते को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। जयशंकर ने कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के लिए बड़े आर्थिक अवसर पैदा करेगा।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के एक प्रमुख सदस्य के रूप में पोलैंड को भी भारत-यूरोपीय संघ के इस नए आर्थिक परिदृश्य से स्वाभाविक रूप से लाभ मिलेगा। इसलिए भारत और पोलैंड के बीच वार्ता में इस बात पर भी चर्चा हुई कि दोनों देश नए अवसरों का अधिकतम लाभ किस तरह उठा सकते हैं। व्यापार,निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के पास इस नए आर्थिक वातावरण का इस्तेमाल करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।

जयशंकर ने कहा कि भारत की यूरोपीय संघ के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी है और साथ ही उसके यूरोपीय देशों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय संबंध भी हैं। भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को इसी व्यापक यूरोपीय संबंधों के संदर्भ में देखा जा सकता है। उनके मुताबिक,द्विपक्षीय साझेदारी के सभी प्रमुख संकेतक निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

पोलैंड के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शुक्रवार को जयशंकर और रादोस्लाव सिकोरस्की के बीच हुई बातचीत में रणनीतिक साझेदारी को लागू करने से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा रक्षा, अंतरिक्ष और जहाज निर्माण जैसे चुनिंदा क्षेत्रों में सहयोग की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने यूरोप में सुरक्षा की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया। बहुपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दे भी बातचीत के प्रमुख विषयों में शामिल रहे।

बैठक में स्मारकों और स्मरणोत्सव से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही दोनों देशों के थिंक टैंकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत और पोलैंड अपनी साझेदारी को केवल सरकारी स्तर के संवाद तक सीमित रखने के बजाय रणनीतिक समुदाय,शोध संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच संपर्क को भी बढ़ाना चाहते हैं।

भारत और पोलैंड के बीच संबंधों में हाल के वर्षों में तेजी से विस्तार हुआ है। रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद दोनों देशों ने राजनीतिक संवाद के साथ-साथ रक्षा, ऊर्जा, तकनीक, व्यापार, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। अब साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और महत्वपूर्ण खनिज जैसे नए क्षेत्रों को साझेदारी में शामिल किए जाने से इसके और व्यापक होने की उम्मीद है।

जयशंकर की पोलैंड यात्रा के दौरान हुई बातचीत से यह स्पष्ट हुआ कि दोनों देश अपने पुराने और पारंपरिक सहयोग को बनाए रखते हुए नई वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप साझेदारी का विस्तार करना चाहते हैं। यूरोप में बदलती सुरक्षा स्थिति,वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव,तकनीकी प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों के बीच भारत और पोलैंड के लिए आपसी सहयोग का महत्व बढ़ गया है।

प्रस्तावित समझौतों के अलावा युवाओं,शिक्षा और सांस्कृतिक संपर्क को बढ़ावा देने की पहल दोनों देशों के संबंधों को व्यापक सामाजिक आधार दे सकती है। जामसाहेब मेमोरियल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम का दूसरा संस्करण और पोलिश विश्वविद्यालयों में भारत विद्या तथा संस्कृत कार्यक्रमों की सफलता इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा सकते हैं।

कुल मिलाकर,भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी अब पारंपरिक राजनीतिक और आर्थिक सहयोग से आगे बढ़कर तकनीक, सुरक्षा, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज और नवाचार जैसे क्षेत्रों तक पहुँच रही है। विदेश मंत्री जयशंकर का यह बयान कि दोनों देश कई महत्वपूर्ण समझौतों पर काम कर रहे हैं,आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों के और मजबूत होने का संकेत देता है। भारत और पोलैंड के बीच बढ़ता सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए नए आर्थिक और रणनीतिक अवसर पैदा कर सकता है,बल्कि भारत और यूरोप के बीच व्यापक साझेदारी को भी नई गति दे सकता है।