वारसॉ,5 सितंबर (युआईटीवी)- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत और पोलैंड कई महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय बहसों और नीतिगत मुद्दों की दिशा तय करने में मिलकर अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था, खुले समाज और बहुपक्षीय सहयोग के साझा दृष्टिकोण से जुड़े हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
वारसॉ में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ विस्तृत वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। बातचीत में यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ पश्चिम एशिया,खाड़ी क्षेत्र और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियाँ बेहद जटिल हैं और कई क्षेत्रों में जारी संघर्षों का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह युद्ध अब पाँचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और वह स्वयं हाल ही में कीव की यात्रा करके लौटे हैं। भारत का स्पष्ट मत है कि युद्ध का अंत होना चाहिए,क्योंकि ऐसे संघर्ष में किसी की वास्तविक जीत नहीं होती। उन्होंने कहा कि युद्ध का हर अतिरिक्त दिन अधिक मौतें,ज्यादा तबाही और पूरी दुनिया पर बढ़ता आर्थिक बोझ लेकर आता है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि स्थायी समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है।
विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल ही में सार्वजनिक रूप से युद्ध को समाप्त करने की आवश्यकता को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं। भारत की नीति लगातार यह रही है कि संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जयशंकर ने कहा कि भारत संवाद और कूटनीति को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा। उनका कहना था कि किसी भी लंबे संघर्ष का समाधान केवल सैन्य माध्यमों से नहीं निकाला जा सकता और स्थायी शांति के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच बातचीत आवश्यक है।
वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में जारी घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय केवल कई युद्धों और भू-राजनीतिक तनावों से ही नहीं जूझ रही है,बल्कि खाद्य,ईंधन और उर्वरकों की उपलब्धता जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी सामने हैं। युद्ध और अस्थिरता के कारण इन आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर विकासशील देशों और आम लोगों पर पड़ सकता है। इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत और अधिक भरोसेमंद बनाना भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने बड़ी चुनौती है।
जयशंकर ने कहा कि भारत और पोलैंड राजनीतिक लोकतंत्र,बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और खुले समाज के सिद्धांतों को महत्व देते हैं। दोनों देशों के बीच इन साझा मूल्यों के कारण वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की पर्याप्त संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर सकारात्मक दिशा देने में योगदान कर सकते हैं। दोनों देश ऐसी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के पक्षधर हैं,जिसमें बहुपक्षीय सहयोग और नियम आधारित व्यवस्था को महत्व मिले।
विदेश मंत्री ने वैश्विक व्यवस्था में हो रहे बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत तथा यूरोपीय संघ के संबंध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार,भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी वैश्विक पुनर्संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूरोपीय संघ के भीतर पोलैंड की मजबूत भूमिका भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग को और गति दे सकती है।
भारत और पोलैंड के द्विपक्षीय संबंधों का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। वर्ष 2024 में इन संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो वर्ष पहले हुई पोलैंड यात्रा के दौरान जिन प्राथमिकताओं और लक्ष्यों पर सहमति बनी थी,बैठक में उनके आधार पर तैयार किए गए एक्शन प्लान की भी समीक्षा की गई।
जयशंकर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और पोलैंड के बीच व्यापार तथा निवेश में वृद्धि हुई है। रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग मजबूत हुआ है। पारंपरिक रूप से खनन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग करने वाले दोनों देश अब नए और उभरते क्षेत्रों में भी साझेदारी की संभावनाएँ तलाश रहे हैं। अंतरिक्ष,डिजिटल तकनीक,कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे क्षेत्रों को भविष्य के सहयोग के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई नए समझौतों पर काम चल रहा है। इनमें साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, स्वच्छ कोयला, गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन समझौतों के जरिए दोनों देश रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में भी योगदान दे सकता है।
रक्षा और ऊर्जा के साथ-साथ डिजिटल और तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग भारत-पोलैंड संबंधों के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। दोनों देश अपनी-अपनी क्षमताओं और विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए नई साझेदारियों की संभावनाएँ तलाश रहे हैं। जयशंकर के अनुसार, आने वाले समय में अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्र द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक बना सकते हैं।
जयशंकर की पोलैंड यात्रा ऐसे समय में हुई है,जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव,ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियाँ तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं में अस्थिरता ने दुनिया के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं। ऐसे माहौल में भारत और पोलैंड जैसे लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग को दोनों पक्ष रणनीतिक महत्व दे रहे हैं।
विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि भारत और पोलैंड के संबंध अब केवल पारंपरिक द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश वैश्विक स्तर पर साझा हितों और साझा मूल्यों के आधार पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रणनीतिक साझेदारी के बाद व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत कर सकती है। साथ ही बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाकर भारत और पोलैंड बदलती वैश्विक व्यवस्था में अपनी संयुक्त भूमिका को भी अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
