काठमांडू,5 सितंबर (युआईटीवी)- नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और उसके बाद मची तबाही के बीच कई परिवार आज भी अपने लापता परिजनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। त्रिशूली और भोटेकोशी नदी के इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ ने जहाँ बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया,वहीं कई जलविद्युत परियोजनाओं और दूसरे बुनियादी ढाँचे भी इसकी चपेट में आ गए। इस प्राकृतिक आपदा के बीच शुक्रवार को एक ऐसी खबर सामने आई, जिसने कई दिनों से अपनों की तलाश कर रहे परिवारों के भीतर उम्मीद की नई किरण जगा दी। करीब 10 दिनों से लापता 45 वर्षीय कबीर महाजन को आखिरकार एक सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
कबीर के परिवार के लिए शुक्रवार की सुबह किसी चमत्कार से कम नहीं थी। बीते 10 दिनों से परिवार का हर दिन चिंता, बेचैनी और अनिश्चितता में गुजर रहा था। परिजनों को यह तक पता नहीं था कि कबीर किस स्थिति में हैं और वे उन्हें दोबारा देख भी पाएंगे या नहीं। परिवार के लोग लगातार टेलीविजन रिपोर्ट,सोशल मीडिया पोस्ट और अलग-अलग माध्यमों से मिलने वाली सूचनाओं पर नजर बनाए हुए थे। हर अपडेट के साथ उम्मीद और डर दोनों बढ़ते जा रहे थे। ऐसे में शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे उन्हें वह सूचना मिली, जिसका वे कई दिनों से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
कबीर के छोटे भाई आमिर महाजन ने कहा कि परिवार के लिए इस खुशी को शब्दों में बयान करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि 10 दिनों से लापता अपने बड़े भाई के सुरक्षित बचाए जाने की खबर मिलने के बाद परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके अनुसार, इतने लंबे समय तक जिस अनिश्चितता का सामना परिवार ने किया,उसके बाद कबीर के जीवित मिलने की खबर उनके लिए बेहद भावुक कर देने वाली थी।
परिवार के मुताबिक,कबीर के लापता होने के बाद किसी भी सदस्य के लिए सामान्य जीवन जीना आसान नहीं था। परिजनों की नींद लगभग गायब हो गई थी और चिंता के कारण भूख तक नहीं लगती थी। वे घंटों तक टीवी पर खबरें देखते रहते थे। सोशल मीडिया पर आने वाली हर पोस्ट और अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले अपडेट को खंगालते रहते थे। परिवार के सदस्यों को लगातार यह चिंता सताती रहती थी कि अगली खबर कबीर के बारे में क्या होगी। हर गुजरता दिन उनकी बेचैनी को और बढ़ा रहा था।
कबीर को सुरंग से सुरक्षित निकाले जाने के बाद इलाज के लिए काठमांडू स्थित छाउनी के नेपाल आर्मी हॉस्पिटल ले जाया गया। फिलहाल उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। परिवार के सदस्यों को अस्पताल के भीतर उनसे ज्यादा देर तक मिलने का मौका नहीं मिला,लेकिन उन्होंने उन्हें अस्पताल ले जाते समय कुछ क्षणों के लिए देखा। आमिर ने बताया कि कबीर की हालत पहली नजर में ठीक लग रही थी और डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। परिवार अस्पताल के बाहर इंतजार कर रहा है और उनके पूरी तरह स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहा है।
कबीर के परिवार की यह मुश्किल घड़ी 26 अगस्त को शुरू हुई थी। उस दिन त्रिशूली और भोटेकोशी नदी के इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। बाढ़ के पानी ने कई इलाकों को प्रभावित किया और जलविद्युत परियोजनाओं के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण ढाँचों को भी भारी नुकसान पहुँचाया। इसी दौरान कई लोग लापता हो गए और उनके परिवारों के सामने अपने परिजनों की तलाश की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।
आमिर ने बताया कि आपदा आने से ठीक एक दिन पहले उनकी अपने भाई कबीर से बातचीत हुई थी। इसके बाद अचानक संपर्क टूट गया। अगले 10 दिन परिवार के लिए बेहद दर्दनाक रहे। उन्होंने कहा कि परिवार लगातार मीडिया, फेसबुक और दूसरे स्रोतों से जानकारी हासिल करने की कोशिश करता रहा। हर दिन इस उम्मीद के साथ गुजरता था कि शायद आज कबीर के बारे में कोई खबर मिलेगी,लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी। इसी अनिश्चितता ने परिवार की चिंता और बढ़ा दी थी।
शुक्रवार की सुबह भी परिवार पिछले 10 दिनों की तरह ही बेचैनी में था। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि एक व्यक्ति को सुरंग से जीवित बाहर निकाला गया है। इसके कुछ ही समय बाद परिवार को पता चला कि बचाए गए व्यक्ति में कबीर भी शामिल हैं। यह खबर मिलते ही महाजन परिवार की चिंता खुशी में बदल गई। कुछ ही देर में परिवार को नेपाल विद्युत प्राधिकरण की ओर से फोन कर बचाव की पुष्टि की गई और यह भी बताया गया कि कबीर को इलाज के लिए किस अस्पताल ले जाया जा रहा है।
कबीर महाजन संबंधित परियोजना की हाइड्रोपावर ऑटोमेशन यूनिट में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे। उनके साथ 30 वर्षीय फोरमैन संजय साह को भी सुरंग से सुरक्षित बचाया गया। दोनों के जीवित बाहर आने की खबर ने न केवल उनके परिवारों को राहत दी, बल्कि उन तमाम लोगों के बीच भी उम्मीद पैदा कर दी,जिनके परिजन बाढ़ के बाद से लापता हैं।
संजय साह के परिवार ने भी उनके सुरक्षित बचाए जाने पर खुशी जताई। उनकी पत्नी लक्ष्मी कुमारी साह ने बताया कि सुबह करीब 8:30 बजे जब उन्हें अपने पति के बचाए जाने की सूचना मिली,तब वह घर पर थीं। खबर मिलते ही परिवार में खुशी छा गई। उन्होंने कहा कि पति के सुरक्षित बचने की खबर उनके लिए बेहद बड़ी राहत थी। कई दिनों से परिवार भी चिंता में था और संजय के सुरक्षित लौटने की उम्मीद कर रहा था।
कबीर और संजय को सुरंग से बाहर निकालने की सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस परियोजना में काम करने वाले अन्य लोगों के भी सुरंग के अंदर फँसे होने की आशंका जताई गई है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के अनुसार, संजय साह ने बताया कि उनकी यूनिट में तीन से चार लोग अभी भी मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के बाद 40 से अधिक लोग सुरंग से बाहर निकल चुके थे। इस जानकारी ने बचाव अभियान को लेकर नई उम्मीद पैदा की है और सुरंग के भीतर संभावित रूप से फँसे अन्य लोगों की तलाश को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
नेपाल में बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार दोपहर 2 बजे तक नेपाल पुलिस के ताजा आँकड़ों के अनुसार आपदा में कम-से-कम 1,295 लोगों की मौत हो चुकी थी। वहीं 4,898 लोग अभी भी संपर्क से बाहर बताए जा रहे थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने से उनके परिवारों पर चिंता का पहाड़ टूट पड़ा है। कबीर और संजय के जीवित बचाए जाने की घटना ऐसे परिवारों के लिए उम्मीद का महत्वपूर्ण संदेश लेकर आई है।
बाढ़ से त्रिशूली और भोटेकोशी नदी के आसपास का पूरा गलियारा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस क्षेत्र में कई जलविद्युत परियोजनाएँ स्थित हैं,जिनमें बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। बाढ़ ने इन परियोजनाओं के संचालन और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचाया है। कई परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के अब भी संपर्क में नहीं आने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में बचाव एजेंसियों के सामने एक ओर लोगों को सुरक्षित निकालने की चुनौती है,तो दूसरी ओर क्षतिग्रस्त इलाकों तक पहुँचना भी कठिन बना हुआ है।
निजी क्षेत्र के बिजली उत्पादकों के संगठन इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने गुरुवार शाम बताया था कि बाढ़ से प्रभावित 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 945 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। यह आँकड़ा बताता है कि लापता लोगों की तलाश का अभियान कितना व्यापक और चुनौतीपूर्ण है। कई परियोजनाओं के आसपास संचार व्यवस्था बाधित हुई है और बाढ़ तथा भूस्खलन के कारण सामान्य आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ऐसी स्थिति में बचाव दलों को कई स्थानों तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कबीर के परिवार ने उनकी तलाश में जुटे सभी बचावकर्मियों और सुरक्षा बलों के प्रति आभार जताया है। आमिर महाजन ने अपने परिवार की ओर से नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल की विशेषज्ञ टीमों,बचावकर्मियों और तलाशी एवं बचाव अभियान से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने देश-विदेश के उन लोगों के प्रति भी आभार व्यक्त किया,जिन्होंने इस कठिन समय में परिवार का हौसला बढ़ाया और कबीर की सुरक्षित वापसी की उम्मीद बनाए रखने में उनका साथ दिया।
कबीर और संजय का बचाया जाना नेपाल में जारी खोज एवं बचाव अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आपदा के कई दिन बीत जाने के बाद भी किसी व्यक्ति का जीवित मिलना इस संभावना को मजबूत करता है कि अन्य संभावित जीवित लोगों को भी खोजा जा सकता है। यही कारण है कि सुरंगों,परियोजना परिसरों और बाढ़ से प्रभावित अन्य इलाकों में तलाशी अभियान को लेकर परिवारों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
बाढ़ के बाद से लापता लोगों के परिजन लगातार बचाव दलों की ओर देख रहे हैं। हर फोन कॉल,हर आधिकारिक सूचना और हर बचाव अभियान की खबर उनके लिए उम्मीद और चिंता दोनों लेकर आती है। कबीर के परिवार ने जिन 10 दिनों को बेचैनी में बिताया,वही स्थिति हजारों अन्य परिवारों की भी है। किसी को अपने पिता का इंतजार है,किसी को भाई का,किसी को पति या बेटे का। ऐसे में कबीर और संजय की सुरक्षित वापसी इन परिवारों के लिए यह संदेश लेकर आई है कि लंबा इंतजार हमेशा निराशा में खत्म नहीं होता।
नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही के बीच राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने और जलविद्युत परियोजनाओं को हुए नुकसान के कारण आने वाले दिनों में भी व्यापक खोज अभियान चलाने की जरूरत होगी। कबीर महाजन को 10 दिन बाद सुरंग से जीवित निकालना इस अभियान की एक बड़ी सफलता है। अब उनके परिवार को उनके पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटने का इंतजार है,वहीं उनकी सुरक्षित वापसी ने उन हजारों परिवारों में भी नई उम्मीद जगाई है,जो अब भी अपनों की राह देख रहे हैं।
