तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (तस्वीर क्रेडिट@Imdineshpurohit)

तमिलनाडु विधानसभा में सी. विजय का डीएमके पर हमला,भ्रष्टाचार के आरोपों पर माँगा जवाब,’महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ बर्दाश्त नहीं की जाने की बात कही

चेन्नई,7 सितंबर (युआईटीवी)- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में विपक्षी दल डीएमके पर तीखा हमला बोला। पुलिस विभाग के लिए अनुदान की माँग पर हुई बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने डीएमके और उसके कई वरिष्ठ नेताओं पर सत्ता में रहते हुए भ्रष्टाचार और पद के कथित दुरुपयोग में शामिल होने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है,लेकिन महिलाओं के खिलाफ अश्लील,अपमानजनक या आपत्तिजनक टिप्पणियों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली टिप्पणी करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

विधानसभा में अपने जवाब के दौरान मुख्यमंत्री विजय और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। विजय ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच नीतियों और कामकाज को लेकर मतभेद हो सकते हैं और आलोचना भी की जा सकती है,लेकिन महिलाओं को निशाना बनाकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी टिप्पणियों को गंभीरता से लेगी और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने डीएमके के कुछ पदाधिकारियों की ओर से कथित तौर पर उन लोगों के खिलाफ की गई टिप्पणियों का भी जिक्र किया,जिन्होंने पार्टी को वोट नहीं दिया था। विजय ने कहा कि मतदाताओं के राजनीतिक फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में किसी पार्टी को समर्थन नहीं देने वाले नागरिकों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना जनता के फैसले का अनादर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही रवैया किसी राजनीतिक दल को जनता से दूर कर सकता है और डीएमके के विपक्ष में बैठने के पीछे भी जनता का फैसला महत्वपूर्ण है।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कई पुराने और कथित आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जिन दस्तावेजों और मामलों का वह उल्लेख कर रहे हैं,उनमें से कई आधिकारिक रिकॉर्ड और विधानसभा पुस्तकालय में उपलब्ध हैं। विजय ने वर्ष 1977 की सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए तत्कालीन वीरनम पाइपलाइन परियोजना में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उनके मुताबिक,इस परियोजना से संबंधित ठेका देने की प्रक्रिया में कथित तौर पर कमीशन की माँग की गई थी।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय का कथित तौर पर एक विशेष कंपनी को लाभ पहुँचाने के लिए गलत इस्तेमाल किया गया। उन्होंने विधानसभा में इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर चर्चा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके पीछे ऐसे रिकॉर्ड मौजूद हैं,जिन्हें सार्वजनिक दस्तावेजों के माध्यम से देखा जा सकता है।

विजय ने पार्टी फंड के नाम पर धन एकत्र करने से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ कथित लेनदेन में 7.5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने की बात सामने आई थी। मुख्यमंत्री ने पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी पर भी अपने आधिकारिक पद का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व मंत्री से जुड़े कुछ अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका भी कथित लेनदेन में सामने आई थी।

मुख्यमंत्री ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन और पार्टी नेता उदयनिधि स्टालिन के नाम भी लिए। हालाँकि,विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए ये आरोप फिलहाल आरोप ही हैं और किसी अदालत द्वारा संबंधित व्यक्तियों को इन आरोपों में दोषी नहीं ठहराया गया है। ऐसे में इन दावों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता। संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया और अदालतों के निर्णय ही आरोपों की वास्तविक स्थिति तय करेंगे।

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि उनके पास मौजूद रिकॉर्ड काफी विस्तृत हैं और यदि उन्हें पूरा पढ़कर सुनाया जाए तो इसमें लगभग दो दिन लग सकते हैं। इसलिए उन्होंने विधानसभा के सामने दस्तावेजों का केवल सारांश प्रस्तुत किया। उन्होंने विपक्षी डीएमके को चुनौती देते हुए कहा कि वह केवल सबूत माँगने के बजाय उन आरोपों का जवाब दे,जिनका उल्लेख उन्होंने सदन में किया है। विजय के अनुसार,जिन मामलों और दस्तावेजों का उन्होंने जिक्र किया है,उनसे जुड़े रिकॉर्ड पहले से ही सार्वजनिक व्यवस्था और विधानसभा पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान यह भी कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े मामलों को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने संकेत दिया कि पुराने मामलों और आधिकारिक रिकॉर्ड को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने के पीछे उनका उद्देश्य केवल विपक्ष पर हमला करना नहीं,बल्कि जनता के सामने शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा उठाना है। हालाँकि,इन आरोपों पर डीएमके की ओर से क्या विस्तृत प्रतिक्रिया आती है,यह राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विधानसभा में मुख्यमंत्री का भाषण केवल भ्रष्टाचार के आरोपों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपनी राजनीतिक विचारधारा और सार्वजनिक जीवन में आने के उद्देश्य का भी उल्लेख किया। विजय ने कहा कि वह राजनीति में न तो किसी पद को हासिल करने के लिए आए हैं और न ही सत्ता का आनंद लेने के लिए। उनके मुताबिक,उनका उद्देश्य लोगों की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होता है और किसी भी नेता की अंतिम जवाबदेही जनता के प्रति ही होती है।

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु की राजनीतिक विरासत से जुड़े प्रमुख नेताओं का उल्लेख किया। उन्होंने सी.एन. अन्नादुरई, एम.जी. रामचंद्रन और एन.टी. रामाराव की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि राजनीति में विचारों और दलों के बीच संघर्ष चलता रहता है,लेकिन अंततः जनता का समर्थन और प्रेम ही सबसे बड़ी ताकत होती है। विजय ने कहा कि राजनीतिक विरोध चाहे जितना भी तीखा क्यों न हो, लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता ही करती है।

तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। एक ओर विजय ने डीएमके के पुराने शासन और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को सदन में उठाकर विपक्ष को घेरने की कोशिश की है,वहीं दूसरी ओर इन आरोपों पर डीएमके का जवाब राजनीतिक बहस की अगली दिशा तय कर सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता और संबंधित मामलों में अंतिम स्थिति अदालतों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी। विधानसभा की कार्यवाही में सामने आया यह टकराव आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।