नेपाल में बाढ़ त्रासदी पर राष्ट्रीय शोक (तस्वीर क्रेडिट@NewsDeshbandhu)

नेपाल में बाढ़ त्रासदी पर झुका राष्ट्रीय ध्वज, 1,353 लोगों की मौत

काठमांडू,7 सितंबर (युआईटीवी)- नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में जान गंवाने वाले लोगों के सम्मान में सोमवार को पूरे देश में राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है। इस दौरान नेपाल का राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका हुआ है। सरकार ने 3 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में बाढ़ में मारे गए लोगों की स्मृति में राष्ट्रीय शोक मनाने का फैसला किया था। इसके तहत नेपाल के सभी सरकारी कार्यालयों के साथ विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों और राजनयिक मिशनों पर भी राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया है। इस त्रासदी ने नेपाल में बड़े पैमाने पर जनजीवन को प्रभावित किया है और राहत एवं बचाव एजेंसियाँ अब भी लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

नेपाल पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक,रविवार शाम तक विनाशकारी बाढ़ में मरने वाले 1,353 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। बरामद शवों में 530 पुरुष और 328 महिलाएँ शामिल हैं। इसके अलावा 495 मानव अंग भी बरामद किए गए हैं, जिनकी अब तक पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस के अनुसार, बड़ी संख्या में शवों की पहचान की प्रक्रिया अभी जारी है और आपदा की व्यापकता के कारण प्रशासन के सामने शवों के प्रबंधन और अंतिम संस्कार की भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पुलिस ने बताया कि बाढ़ के बाद अब भी 3,992 लोग संपर्क में नहीं हैं। इनमें 595 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने से सुरक्षा एजेंसियों और बचाव दलों के सामने चुनौती लगातार बनी हुई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान को तेज किया गया है। विशेष रूप से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे स्थित जलविद्युत परियोजनाओं में लापता लोगों की तलाश पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि इन क्षेत्रों में बाढ़ और तेज बहाव के कारण भारी नुकसान हुआ है।

नेपाल पुलिस के अनुसार,बरामद किए गए 1,044 शवों को सुरक्षित रूप से दफना दिया गया है। वहीं,बाकी शवों की पहचान करने और उनके अंतिम संस्कार तथा प्रबंधन की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन शवों की पहचान करना है, जिनके पास कोई पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं मिले हैं। इसके लिए संबंधित एजेंसियाँ विभिन्न माध्यमों से जानकारी जुटा रही हैं,ताकि मृतकों के परिजनों तक सूचना पहुंचाई जा सके और अंतिम प्रक्रिया पूरी की जा सके।

इस बीच,नेपाल के निजी क्षेत्र के बिजली उत्पादकों के प्रतिनिधि संगठन स्वतंत्र विद्युत उत्पादक संघ नेपाल के मुताबिक,रविवार शाम तक 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 919 लोग संपर्क में नहीं थे। बाढ़ ने देश के महत्वपूर्ण जलविद्युत ढाँचे को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कई परियोजनाएँ नदी के किनारे या दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित हैं,जहाँ भारी बारिश,बाढ़ और भूस्खलन के कारण पहुँचना मुश्किल हो गया है। सुरक्षा एजेंसियाँ और बचाव दल ऐसे क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

हालाँकि,कुछ जलविद्युत परियोजनाओं में फँसे लोगों को सुरक्षित निकालने में सफलता भी मिली है। 4 सितंबर को 60 मेगावाट क्षमता वाली अपर त्रिशूली-3ए परियोजना से दो नेपाली नागरिकों को बचाया गया था। इसके बाद 5 सितंबर को 216 मेगावाट क्षमता वाली अपर त्रिशूली-1 परियोजना से एक चीनी नागरिक को सुरक्षित बचाने में कामयाबी मिली। इन अभियानों से राहत एवं बचाव दलों को उम्मीद मिली है कि दुर्गम इलाकों में फँसे अन्य लोगों को भी जल्द सुरक्षित निकाला जा सकता है।

राष्ट्रीय शोक के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बाढ़ से प्रभावित बुजुर्गों और परिवारों को भावनात्मक संदेश देते हुए उन्हें भरोसा दिलाया है कि सरकार और राज्य उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। सोमवार को सोशल मीडिया पर जारी संदेश में प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि प्रभावित लोगों को खुद को अकेला नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे अकेले नहीं हैं,बल्कि राज्य और सरकार उनके साथ है।

प्रधानमंत्री शाह ने अपने संदेश में बाढ़ के दौरान बुजुर्गों द्वारा झेली गई भयावह परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बुजुर्ग माता-पिता को अपनी जान की परवाह किए बिना कांपते हाथों से अपने पोते-पोतियों को पकड़कर सुरक्षित ऊँचे स्थानों की ओर भागना पड़ा। उन्होंने कहा कि अपने लंबे जीवन में इन बुजुर्गों ने शायद ही कभी ऐसी कठिन और भयावह परिस्थिति का सामना किया होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन बुजुर्गों के पैर बिना छड़ी के मुश्किल से दो कदम चल पाते थे, उन्होंने भी अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों को बचाने के लिए उस मुश्किल समय में असाधारण ताकत दिखाई। उनका यह बयान बाढ़ की त्रासदी के बीच आम लोगों के संघर्ष और परिवारों को बचाने के लिए किए गए प्रयासों को रेखांकित करता है।

नेपाल में राष्ट्रीय शोक का यह दिन आपदा में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ उन हजारों परिवारों के दर्द को साझा करने का अवसर भी है, जिन्होंने इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खो दिया या अब भी उनके लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। राहत एवं बचाव अभियान जारी है और सुरक्षा एजेंसियाँ लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। सरकार के सामने अब मृतकों की पहचान,लापता लोगों की खोज, प्रभावित परिवारों को राहत पहुँचाने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे को बहाल करने की बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में पूरे देश में झुका राष्ट्रीय ध्वज इस भीषण आपदा में जान गंवाने वालों के प्रति नेपाल की सामूहिक श्रद्धांजलि का प्रतीक बना हुआ है।