हूतियों ने सऊदी शहरों पर दागीं मिसाइलें और ड्रोन (तस्वीर क्रेडिट@NewsDeshbandhu)

हूतियों ने सऊदी शहरों पर दागीं मिसाइलें और ड्रोन,यमन में भी बढ़ी जंग; हजारों परिवार विस्थापित

नई दिल्ली,10 सितंबर (युआईटीवी)- यमन की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन और हूती समूह एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। गठबंधन ने दावा किया है कि हूतियों ने सऊदी अरब के खमीस मुशेत, आभा और जाजान शहरों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। इन हमलों के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अपनी संप्रभुता, नागरिकों और राष्ट्रीय संपत्तियों की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम के बीच यमन के भीतर भी सरकारी बलों और हूतियों के बीच संघर्ष तेज होने की खबरें हैं।

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मालिकी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि हूती लगातार सऊदी अरब की राष्ट्रीय संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। उनके अनुसार, सऊदी शहरों पर किए गए ताजा मिसाइल और ड्रोन हमले क्षेत्र में तनाव बढ़ाने की हूतियों की कोशिश का हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से आम नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है और यह हूतियों की आक्रामक नीति को दर्शाती है।

गठबंधन के प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त सैन्य कमान सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब की राष्ट्रीय संपत्तियों,नागरिकों और नागरिक सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गठबंधन आवश्यक जवाबी कार्रवाई करेगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि सीमा पार से होने वाले हमलों के बाद सऊदी अरब और हूतियों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ सकता है।

बुधवार को स्थानीय समय के अनुसार हुए ये हमले ऐसे वक्त सामने आए हैं,जब यमन के हूती समूह और सऊदी अरब के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। सीमा पार से होने वाली सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ यमन के भीतर भी सरकारी बलों और हूतियों के बीच कई मोर्चों पर संघर्ष तेज हुआ है। इससे उस अपेक्षाकृत शांत माहौल के फिर से बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है,जो अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद बना था।

हूतियों ने भी सऊदी कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को समूह ने दावा किया कि उसके नियंत्रण वाले इलाकों में पिछले 12 घंटों के दौरान सऊदी अरब की ओर से दर्जनों हवाई हमले किए गए। हूतियों के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को जरूर बढ़ा दिया है। सीमा पार हमलों के साथ यमन के भीतर जारी लड़ाई ने संघर्ष को एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुँचा दिया है।

यमन के पश्चिमी हिस्सों में संघर्ष सबसे ज्यादा तेज होने की खबर है। सरकारी बल और हूती कई मोर्चों पर एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहे हैं। लंबे समय से जारी इस संघर्ष में आम नागरिक पहले ही भारी मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सैन्य गतिविधियों में नई तेजी ने नागरिक आबादी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

संयुक्त राष्ट्र भी यमन और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जाहिर कर चुका है। मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र ने दक्षिणी सऊदी अरब के कई इलाकों में हूतियों की ओर से किए गए सीमा पार हमलों की निंदा की थी। इन हमलों के कारण नागरिकों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े बुनियादी ढांचे के प्रभावित होने की खबरें सामने आई थीं। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय शांति और नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि संगठन को इन हमलों में आम नागरिकों के हताहत होने की खबरों को लेकर गहरी चिंता है। उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र यमन के भीतर कई मोर्चों पर बढ़ती सैन्य झड़पों की निगरानी कर रहा है। खासतौर पर उन रिपोर्टों को लेकर चिंता जताई गई है,जिनमें लड़ाई के कारण आम नागरिकों के प्रभावित होने की बात कही गई है।

यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग इस बीच दोनों पक्षों के संपर्क में बने हुए हैं। उनका प्रयास सैन्य तनाव को नियंत्रित करना और बातचीत के रास्ते खुले रखना है। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि मौजूदा हालात को सैन्य माध्यम से सुलझाने के बजाय राजनीतिक बातचीत के जरिए स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। दुजारिक ने सभी पक्षों से संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में चल रहे राजनीतिक प्रयासों में रचनात्मक सहयोग करने की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि सैन्य तनाव में लगातार बढ़ोतरी यमन को राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा के मोर्चे पर गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचे को बुरी तरह प्रभावित किया है। लाखों लोगों को मानवीय सहायता पर निर्भर रहना पड़ रहा है और लगातार संघर्ष के कारण आम लोगों के लिए सामान्य जीवन बहाल करना मुश्किल बना हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय ने भी यमन में हालात बिगड़ने को लेकर चिंता व्यक्त की है। कार्यालय के मुताबिक,लंबे समय से संघर्ष का सामना कर रहे समुदायों के लिए हालिया लड़ाई और भी विनाशकारी साबित हो रही है। गुरुवार से संघर्ष में तेजी आने के बाद ताइज प्रांत और दक्षिणी अल-हुदैदाह प्रांत में 5,600 से अधिक परिवारों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अचानक विस्थापन ने पहले से संकटग्रस्त लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय के अनुसार,पिछले एक सप्ताह के दौरान यमन में कम से कम 11 आम नागरिक हताहत हुए हैं। इनमें दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य लोग घायल हुए हैं। इन आँकड़ों ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है। लड़ाई बढ़ने के साथ लोगों के विस्थापन,सुरक्षा और जरूरी मानवीय सहायता तक पहुँच को लेकर भी चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।

यमन में मौजूदा स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि देश लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता और सशस्त्र संघर्ष का सामना कर रहा है। अप्रैल 2022 के युद्धविराम के बाद हिंसा में अपेक्षाकृत कमी आई थी और राजनीतिक समाधान की उम्मीद जगी थी। हालाँकि,समय-समय पर सीमा पार हमलों और यमन के भीतर संघर्ष में तेजी ने उस उम्मीद को कमजोर किया है। मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्र में बनी नाजुक शांति को कायम रखा जा सकेगा।

सऊदी अरब के शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के आरोप तथा यमन में बढ़ती जमीनी लड़ाई ने हालात को और जटिल बना दिया है। एक तरफ सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के नाम पर जवाबी कार्रवाई की तैयारी की बात कर रहा है,वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र सभी पक्षों से संयम बरतने और राजनीतिक प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की अपील कर रहा है।

यदि सीमा पार हमलों का सिलसिला जारी रहता है और यमन के भीतर भी सैन्य टकराव बढ़ता है,तो इसका असर केवल सुरक्षा स्थिति पर नहीं पड़ेगा,बल्कि मानवीय संकट भी गहरा सकता है। हजारों परिवारों के विस्थापन और नागरिकों के हताहत होने की ताजा खबरें इस खतरे का संकेत दे रही हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों और दोनों पक्षों के बीच बातचीत की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। फिलहाल,यमन में शांति की राह सैन्य तनाव के बीच बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है और आने वाले दिनों में यह तय होगा कि दोनों पक्ष टकराव बढ़ाते हैं या बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाते हैं।