ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई (तस्वीर क्रेडिट@misra_amaresh)

ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमले से भड़का ईरान,आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

मॉस्को,10 सितंबर (युआईटीवी)- ईरान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार शाम फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कई ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी सेना की ओर से किए गए हमलों की कड़ी निंदा की। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार देते हुए कहा कि वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईरान की सशस्त्र सेनाएँ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने में किसी तरह की हिचक नहीं दिखाएँगी।

भारत स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान साझा किया। बयान में कहा गया कि ईरानी कारोबारी जहाजों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अलग-थलग घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता। ईरान के अनुसार,यह उसके खिलाफ चल रही अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, नौसैनिक नाकाबंदी और आर्थिक दबाव बढ़ाने के अभियान का हिस्सा है। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करती है।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसके कारोबारी जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाकर की गई अमेरिकी कार्रवाई ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और खतरनाक बना दिया है। मंत्रालय के मुताबिक,फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

बयान में ईरान ने अपनी ओर से की गई जवाबी सैन्य कार्रवाई का भी उल्लेख किया। मंत्रालय के अनुसार, ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सुविधाओं पर रक्षात्मक हमले किए। ईरान का दावा है कि ये कार्रवाई अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई और इसका उद्देश्य अपनी सुरक्षा तथा संप्रभुता की रक्षा करना था।

ईरान ने जॉर्डन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जॉर्डन ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों का समर्थन करता रहा है। इसी संदर्भ में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को जवाबी कार्रवाई का लक्ष्य बताया। मंत्रालय ने यह भी कहा कि अमेरिका के कुछ ऐसे जहाजों को निशाना बनाया गया,जो कथित तौर पर आक्रामक गतिविधियों में शामिल थे।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया कि देश अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने कहा कि ईरान किसी भी ऐसी सैन्य कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा,जिसे वह अपनी सुरक्षा, क्षेत्रीय हितों या संप्रभु अधिकारों के खिलाफ मानता है। ईरान ने चेतावनी दी कि उसकी सशस्त्र सेनाएँ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगी और विरोधी पक्ष की किसी भी सैन्य कार्रवाई का उचित और दृढ़ जवाब दिया जाएगा।

मंत्रालय की ओर से जारी बयान में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को लेकर भी कड़ा संदेश दिया गया। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव से अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ तत्काल कदम उठाने की माँग की। तेहरान का कहना है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों से अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुँचा है और ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारी बनती है कि वे स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।

ईरान ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मामले को गंभीरता से लेने और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर तत्काल प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया। मंत्रालय के अनुसार, यदि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने ऐसी कार्रवाइयों को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए,तो क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ सकता है। ईरान ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां व्यापक संघर्ष का कारण बन सकती हैं,जिसका असर क्षेत्रीय देशों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देगा।

ईरानी बयान में यह भी संकेत दिया गया कि मौजूदा स्थिति को केवल आर्थिक या समुद्री विवाद के रूप में नहीं देखा जा सकता। तेहरान के मुताबिक,तेल टैंकरों और कारोबारी जहाजों पर कार्रवाई के साथ सैन्य दबाव बढ़ाना व्यापक टकराव का रूप ले रहा है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका एक तरफ आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है और दूसरी तरफ समुद्री तथा सैन्य कार्रवाई के जरिए उसके हितों को निशाना बना रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। इन समुद्री मार्गों का क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर केवल संबंधित देशों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहने की आशंका है। ईरान ने अपने बयान के जरिए यह साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के सामने पीछे हटने के बजाय जवाब देने की नीति पर कायम है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासचिव से स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की। वहीं,ईरान की ओर से आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल जारी रखने की चेतावनी ने आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका को और मजबूत कर दिया है। तेहरान का संदेश स्पष्ट है कि उसकी संप्रभुता,सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के लिए उसकी सेनाएँ तैयार हैं।