ब्रिक्स 2026 सम्मेलन के स्वागत के लिए पूरी तरह सजा भारत मंडपम (तस्वीर क्रेडिट@MEAIndia)

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए सजकर तैयार दिल्ली,भारत मंडपम में जुटेंगे दुनिया के दिग्गज नेता

नई दिल्ली,11 सितंबर (युआईटीवी)- 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन का समय करीब आते ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पूरी तरह तैयारियों में जुट गई है। भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के लिए नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम को विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों, साझेदार देशों और आमंत्रित प्रतिनिधियों के साथ दुनिया के कई प्रमुख नेता एक मंच पर दिखाई देंगे। सम्मेलन को लेकर राजधानी में तैयारियाँ अंतिम चरण में पहुँच गई हैं और भारत इस महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के जरिए वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को मजबूती से रखने की तैयारी कर रहा है।

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से गुरुवार को दिल्ली और भारत मंडपम की तैयारियों को लेकर जानकारी साझा की गई। संदेश में कहा गया कि दिल्ली अपनी विरासत की चमक और भारत मंडपम की तैयारियों के साथ 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए अंतिम तैयारियाँ पूरी कर रही है। इससे पहले भी सम्मेलन के आधिकारिक हैंडल से कहा गया था कि दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तैयार हो रही है और जल्द ही दुनिया एक मेज पर साथ बैठेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए बताया कि भारत ब्रिक्स 2026 के लिए पूरी तरह तैयार है। वीडियो में सम्मेलन स्थल भारत मंडपम को दुनिया भर से आने वाले नेताओं के स्वागत के लिए सजाया हुआ दिखाया गया। प्रधानमंत्री ने इसके साथ संदेश दिया कि ब्रिक्स 2026 के लिए तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। राजधानी में सम्मेलन को लेकर बढ़ती गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि भारत इस आयोजन को बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है।

भारत ने इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता सँभाली है और इसी के तहत 12 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों के अलावा साझेदार देशों और आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। इस दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर सामने आ रही प्रमुख चुनौतियों के साथ-साथ आर्थिक सहयोग, विकास, नवाचार, सतत विकास और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सहित कई प्रमुख नेताओं के शामिल होने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस सम्मेलन के महत्व को और बढ़ा रही है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली चर्चाओं पर वैश्विक समुदाय की भी नजर रहेगी।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम ‘मजबूती, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण’ रखी गई है। यह थीम भारत की उन प्राथमिकताओं को सामने रखती है, जिनमें वैश्विक सहयोग को मजबूत करने, नई तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा देने तथा टिकाऊ विकास के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए ‘मानवता सबसे पहले’ की भावना पर आधारित लोगों-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रमुखता दी है। इसका उद्देश्य वैश्विक सहयोग को केवल आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों तक सीमित न रखते हुए आम लोगों के जीवन से जुड़े विकासात्मक मुद्दों से जोड़ना है।

सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देश आपसी सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विचार करेंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव, विकासशील देशों के सामने मौजूद चुनौतियाँ, व्यापार और निवेश, तकनीकी सहयोग, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा तथा सतत विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा सदस्य देश आपसी महत्व के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच ब्रिक्स की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों पर भी नेताओं के बीच विचार-विमर्श होने की संभावना है।

ब्रिक्स का मौजूदा स्वरूप पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तारित हुआ है। समूह में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इसके अलावा बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को साझेदार देशों के रूप में शामिल किया गया है। इस विस्तार के बाद ब्रिक्स का दायरा पहले की तुलना में काफी व्यापक हो गया है और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने में समूह की भूमिका पर भी जोर बढ़ा है।

भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले वर्ष 2012, 2016 तथा 2021 में समूह की अध्यक्षता कर चुका है। इस वर्ष 1 जनवरी को भारत ने चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता सँभाली। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला शिखर सम्मेलन भारत के लिए अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं और वैश्विक दृष्टिकोण को सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर है। सम्मेलन की मेजबानी के जरिए भारत विभिन्न सदस्य और साझेदार देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने तथा बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर देगा।

वर्ष 2026 ब्रिक्स के लिए भी विशेष महत्व रखता है,क्योंकि इसी वर्ष समूह अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। दो दशक के सफर में ब्रिक्स ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसे समय में भारत की अध्यक्षता में होने वाला 18वां शिखर सम्मेलन समूह के भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नई दिल्ली में सम्मेलन की तैयारियाँ अंतिम दौर में पहुँचने के साथ भारत की निगाहें अब 12 और 13 सितंबर पर टिकी हैं। भारत मंडपम में दुनिया के कई प्रभावशाली नेताओं का जुटना न केवल भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका को दर्शाएगा,बल्कि ब्रिक्स के अगले चरण की प्राथमिकताओं को भी आकार दे सकता है। सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं और नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय मुलाकातों पर भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष नजर रहने की उम्मीद है।