नई दिल्ली,11 सितंबर (युआईटीवी)- भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए विदेशी मेहमानों का भारत पहुँचना शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह से ही नई दिल्ली में कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों का आगमन हुआ। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो समेत कई प्रमुख हस्तियाँ सम्मेलन में शामिल होने के लिए राजधानी पहुँचीं। विदेशी मेहमानों के स्वागत के साथ ही राजधानी में शिखर सम्मेलन की गतिविधियाँ तेज हो गई हैं।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा का नई दिल्ली पहुँचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने उनके आगमन की जानकारी साझा करते हुए भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों को रेखांकित किया। दोनों देशों के रिश्ते रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं और बहुपक्षीय मंचों पर भी दोनों एक-दूसरे के साथ सहयोग करते रहे हैं।
ब्रिक्स के संदर्भ में भारत और दक्षिण अफ्रीका की साझेदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। दोनों देश विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाते रहे हैं। ऐसे में शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक दक्षिण के हितों, आर्थिक विकास, बहुपक्षीय सहयोग और विकासशील देशों की प्राथमिकताओं से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत ने भी ब्रिक्स के मंच को विकासशील देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा है।
उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन भी शुक्रवार को नई दिल्ली पहुँचे। वह 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के संगठन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके आगमन के साथ सम्मेलन में लैटिन अमेरिकी क्षेत्र की भागीदारी भी महत्वपूर्ण हो गई है। भारत और इस क्षेत्र के देशों के बीच व्यापार,तकनीकी सहयोग और नवाचार के क्षेत्र में संबंधों को आगे बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
भारत और लैटिन अमेरिकी तथा कैरेबियाई देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग के विस्तार की काफी संभावनाएँ हैं। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच व्यापारिक संपर्क बढ़ाने,तकनीकी ज्ञान साझा करने और विकास के लिए सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर चर्चा हो सकती है। भारत की कोशिश ब्रिक्स के मंच के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के विकासशील देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने की भी है।
युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो भी शुक्रवार को नई दिल्ली पहुँचीं। भारत की ओर से उनके आगमन का स्वागत किया गया। भारत और युगांडा के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। दोनों देशों के रिश्ते साझा ऐतिहासिक जुड़ाव के साथ-साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग के आधार पर लगातार आगे बढ़े हैं। ब्रिक्स के व्यापक होते स्वरूप के बीच अफ्रीकी देशों की भागीदारी को भी खास महत्व मिल रहा है।
इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शुक्रवार सुबह भारत पहुँच चुके हैं। नई दिल्ली पहुंचने पर उनका स्वागत विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया। रूस के राष्ट्रपति का भारत आगमन शिखर सम्मेलन की प्रमुख घटनाओं में माना जा रहा है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के कारण पुतिन की मौजूदगी को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष, परमाणु सहयोग और रणनीतिक मामलों में व्यापक संबंध हैं। बदलते वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य के बीच दोनों देशों के बीच संवाद का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति पुतिन की भागीदारी भारत और रूस के बीच बहुपक्षीय सहयोग के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी नई दिशा देने का अवसर प्रदान कर सकती है।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। दोनों नेताओं के बीच बैठक में भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है। इसके साथ ही वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर रणनीतिक महत्व रखने वाले विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा संबंध और बदलती अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों को लेकर विचारों का आदान-प्रदान बैठक का अहम हिस्सा हो सकता है।
पुतिन के अलावा एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक की अध्यक्ष जू जियायी भी शुक्रवार सुबह भारत पहुँचीं। उनकी मौजूदगी से सम्मेलन में वित्तीय और विकास संबंधी विषयों पर चर्चा की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। ब्रिक्स मंच पर आर्थिक विकास, बुनियादी ढाँचे में निवेश और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए वित्तीय सहयोग जैसे विषय लगातार महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ उनकी भागीदारी भी सम्मेलन के व्यापक एजेंडे का हिस्सा हो सकती है।
भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। सम्मेलन में शामिल होने वाले देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के अलावा व्यापार, तकनीक, नवाचार, विकास, वित्तीय व्यवस्था और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच विकासशील देशों के हितों को अंतर्राष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी तरीके से रखने पर भी जोर दिया जा सकता है।
विदेशी नेताओं और प्रतिनिधियों के दिल्ली पहुँचने के साथ ही राजधानी में सम्मेलन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मेहमानों की सुरक्षा और उनके कार्यक्रमों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए व्यापक व्यवस्थाएँ की गई हैं। सम्मेलन में अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी इसे एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय आयोजन बना रही है।
भारत के लिए यह सम्मेलन इसलिए भी अहम है क्योंकि ब्रिक्स का दायरा लगातार बढ़ रहा है और संगठन वैश्विक आर्थिक तथा कूटनीतिक विमर्श में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। भारत इस मंच के जरिए विकासशील देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यवस्था में उनकी प्राथमिकताओं को अधिक प्रभावी ढंग से सामने रखने की कोशिश कर रहा है।
शुक्रवार को विदेशी मेहमानों के आगमन के साथ ही अब सभी की नजरें सम्मेलन के दौरान होने वाली उच्चस्तरीय द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों पर हैं। खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात को लेकर काफी उम्मीदें हैं। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत से भारत-रूस संबंधों की आगे की दिशा के साथ-साथ कई रणनीतिक मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण संकेत मिलने की संभावना है। वहीं, दक्षिण अफ्रीका, युगांडा और लैटिन अमेरिकी प्रतिनिधियों की भागीदारी से सम्मेलन में ग्लोबल साउथ के मुद्दों को भी प्रमुखता मिलने की उम्मीद है।
