राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के बीच काँटे की टक्कर (तस्वीर क्रेडिट@BhajanlalBjp)

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में बड़ा उलटफेर,कई शहरों में भाजपा-कांग्रेस के बीच काँटे की टक्कर

जयपुर,14 सितंबर (युआईटीवी)- राजस्थान में 10 नगर निगमों समेत 309 शहरी निकायों के लिए जारी मतगणना के बीच प्रदेश की सियासत में कई बड़े उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। शुरुआती रुझानों में पिछड़ती नजर आई कांग्रेस ने कई नगर निगमों में वापसी करते हुए अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। पाली, बीकानेर और अजमेर नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालाँकि,इन निकायों में अभी स्पष्ट बहुमत का आँकड़ा दूर है। दूसरी ओर,भाजपा ने उदयपुर और भीलवाड़ा नगर निगम में बहुमत हासिल कर बोर्ड बनाने की स्थिति मजबूत कर ली है। अलवर में भी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई है। वहीं जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े नगर निगमों में दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला बेहद करीबी बना हुआ है।

इन चुनाव परिणामों ने प्रदेश की स्थानीय राजनीति में नए समीकरणों की संभावना पैदा कर दी है। खासतौर पर उन नगर निगमों में जहाँ भाजपा या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों दल अब निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहे हैं। 21 सितंबर को होने वाले महापौर चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की सक्रियता और बढ़ने की संभावना है।

राजधानी जयपुर के 150 वार्ड वाले नगर निगम में भाजपा ने अब तक 32 सीटों पर जीत दर्ज की है,जबकि कांग्रेस के खाते में 23 सीटें आई हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी चार वार्डों में जीत हासिल की है। हालाँकि,कई सीटों पर मुकाबला अभी जारी है और अंतिम तस्वीर पूरी तरह साफ होने में समय लग रहा है। जयपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच महापौर पद को लेकर भी मुकाबला दिलचस्प रहने की उम्मीद है।

जयपुर में भाजपा के महापौर पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल सुनील कोठारी ने वार्ड संख्या 112 से जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 905 मतों के अंतर से हराया। सुनील कोठारी को भाजपा ने निवर्तमान महापौर कुसुम यादव का टिकट काटकर मैदान में उतारा था। ऐसे में उनकी जीत को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है और महापौर पद की दौड़ में उनकी दावेदारी मजबूत हुई है।

जयपुर में सबसे बड़ी जीत वार्ड संख्या 113 में देखने को मिली,जहाँ कांग्रेस के गजनफर अली ने 10,014 मतों के विशाल अंतर से जीत दर्ज की। यह जीत मुकाबले में एकतरफा बढ़त का संकेत देती है। वहीं वार्ड 51 में कांग्रेस के मनमोहन गुर्जर ने भाजपा के महेंद्र छीपा को 1,686 मतों से पराजित किया। इसके विपरीत वार्ड 101 में भाजपा के रविशंकर ने कांग्रेस के दुर्गेश शर्मा को महज 76 मतों के अंतर से हराया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजधानी के कई वार्डों में मुकाबला कितना करीबी रहा।

जयपुर में अन्य प्रमुख विजेताओं में वार्ड 1 से निर्दलीय मोहनलाल कुमावत, वार्ड 3 से भाजपा के भवानी शंकर शर्मा,वार्ड 4 से भाजपा की पिंकी देवी, वार्ड 21 से कांग्रेस के राकेश लाटा, वार्ड 31 से भाजपा के विजय अग्रवाल और वार्ड 32 से कांग्रेस की सीमा शर्मा शामिल हैं। सीमा शर्मा ने 859 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। इसके अलावा वार्ड 41 से भाजपा के दया सिंह, वार्ड 42 से भाजपा के अशोक रावतानी, वार्ड 43 से भाजपा के शैलेंद्र भार्गव, वार्ड 111 से भाजपा के संजय जायसवाल, वार्ड 122 से भाजपा के घनश्याम और वार्ड 141 से भाजपा के सतीश शर्मा ने भी जीत हासिल की है।

जोधपुर में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक बना हुआ है। 100 वार्ड वाले इस नगर निगम में अब तक भाजपा ने 44 और कांग्रेस ने 43 सीटों पर जीत दर्ज की है। निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में नौ सीटें गई हैं,जबकि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने एक वार्ड में जीत हासिल की है। इस तरह भाजपा और कांग्रेस के बीच फिलहाल सिर्फ एक सीट का अंतर है। अंतिम परिणामों के साथ यहाँ राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव संभव है।

जोधपुर में कांग्रेस के लिए वार्ड 42 का परिणाम बड़ा झटका माना जा रहा है। यहाँ कांग्रेस के शहर जिलाध्यक्ष ओंकार वर्मा को पूर्व राज्यमंत्री और भाजपा नेता मेघराज लोहिया ने 279 मतों के अंतर से हरा दिया। पार्टी के एक प्रमुख पदाधिकारी की हार ने स्थानीय कांग्रेस संगठन के लिए चुनौती बढ़ा दी है। वहीं वार्ड 51 का परिणाम भी खास रहा, जहाँ कांग्रेस की 21 वर्षीय सरस्वती प्रजापत ने जीत दर्ज की। वह यूपीएससी की अभ्यर्थी भी हैं और उनकी जीत को जोधपुर चुनाव के उल्लेखनीय परिणामों में गिना जा रहा है।

वार्ड 91 में कांग्रेस की कांता नवल ने 2,000 से अधिक मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। वहीं वार्ड 66 में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मोहम्मद इरफान ने कांग्रेस के शेर मोहम्मद को 1,672 मतों से पराजित किया। जोधपुर में भाजपा के कई उम्मीदवारों ने भी महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है। वार्ड 1 से कांग्रेस के जगदीश, वार्ड 3 से भाजपा की मोनिका व्यास, वार्ड 4 से कांग्रेस की मोना राठौड़, वार्ड 9 से भाजपा के संजय विश्नोई, वार्ड 12 से भाजपा की प्रियंका बाहेती और वार्ड 14 से भाजपा की सोनिया रामचंदानी विजयी रही हैं।

इसी तरह वार्ड 23 से भाजपा के अशोक सिंह चौहान,वार्ड 28 से भाजपा के विकास राघवानी, वार्ड 39 से भाजपा के अमरलाल ने 2,601 मतों से, वार्ड 49 से कांग्रेस के श्यामलाल विश्नोई ने 1,611 मतों से, वार्ड 72 से कांग्रेस के इरफान अब्बासी और वार्ड 82 से भाजपा के प्रसंचंद मेहता ने जीत दर्ज की है। जोधपुर में कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद कम अंतर होने के कारण निर्दलीय पार्षदों का महत्व भी बढ़ गया है।

उदयपुर में भाजपा ने नगर निगम पर अपना नियंत्रण बरकरार रखने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। 80 वार्ड वाले नगर निगम में भाजपा ने 45 सीटें जीत ली हैं, जबकि बहुमत के लिए 41 सीटों की जरूरत थी। इस तरह भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए बोर्ड बनाने की स्थिति सुनिश्चित कर ली है। कांग्रेस को 21 सीटें मिली हैं,जबकि तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे हैं। उपलब्ध परिणामों के आधार पर उदयपुर में भाजपा लगातार सातवीं बार अपना बोर्ड बनाने की स्थिति में है।

उदयपुर में महापौर पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल प्रमोद सामर ने वार्ड 51 से जीत दर्ज की है। वहीं पारस सिंघवी ने वार्ड 24 से अपनी सीट बचाने में सफलता हासिल की। दोनों नेताओं की जीत ने महापौर पद के लिए भाजपा के भीतर चल रही संभावित दावेदारी को और दिलचस्प बना दिया है। दूसरी ओर, वार्ड 17 से कांग्रेस जिलाध्यक्ष की पत्नी डॉ. पूनम राठौड़ और वार्ड 73 से डॉ. हितांशी शर्मा ने भी जीत हासिल की है।

राजस्थान के अन्य नगर निगमों में भी परिणामों ने राजनीतिक दलों की रणनीति को प्रभावित किया है। पाली,बीकानेर और अजमेर में कांग्रेस ने सबसे बड़ी पार्टी बनने में सफलता हासिल की है,लेकिन स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण इन नगर निगमों में सत्ता का अंतिम फैसला आसान नहीं होगा। भाजपा ने उदयपुर और भीलवाड़ा में बहुमत हासिल कर जहाँ अपनी स्थिति मजबूत की है,वहीं अलवर में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आने से पार्टी के लिए उम्मीदें बढ़ी हैं।

इन चुनावों में मतदान प्रतिशत भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार भरतपुर में सबसे अधिक 73.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया,जबकि जोधपुर में 71.95 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। अधिक मतदान वाले निकायों के परिणामों पर भी राजनीतिक दलों की नजर है, क्योंकि मतदान प्रतिशत को स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं की सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

अब चुनावी मुकाबले का अगला चरण महापौर पद के चुनाव पर केंद्रित हो गया है। 21 सितंबर को होने वाले महापौर चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुट गई हैं। जिन नगर निगमों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है,वहाँ निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। यही वजह है कि दोनों दल संभावित समर्थकों से संपर्क साधने और अपने खेमे को मजबूत करने की कवायद में जुट गए हैं।

स्थानीय निकाय चुनाव के परिणाम प्रदेश की व्यापक राजनीति के लिए भी अहम माने जा रहे हैं। नगर निगमों में पार्षदों की संख्या और महापौर पद के लिए बनने वाले समीकरण आने वाले समय में भाजपा और कांग्रेस दोनों के संगठनात्मक प्रदर्शन का संकेत देंगे। जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े शहरों में काँटे की टक्कर ने मुकाबले को और महत्वपूर्ण बना दिया है,जबकि उदयपुर और भीलवाड़ा में भाजपा की स्पष्ट बढ़त पार्टी के लिए राहत लेकर आई है। दूसरी तरफ पाली,बीकानेर और अजमेर में कांग्रेस की बढ़त ने पार्टी को वापसी का मौका दिया है।

मतगणना के अंतिम परिणाम आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी,लेकिन अभी तक सामने आए नतीजों ने यह जरूर दिखा दिया है कि राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में मुकाबला एकतरफा नहीं रहा। कई जगह भाजपा मजबूत स्थिति में है तो कई नगर निगमों में कांग्रेस ने अपनी पकड़ बनाई है। जहाँ बहुमत का आँकड़ा किसी एक दल के पक्ष में नहीं है,वहाँ निर्दलीय और छोटे दलों के पार्षद सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में 21 सितंबर को होने वाला महापौर चुनाव राजस्थान की शहरी राजनीति के लिए सबसे अहम पड़ाव साबित हो सकता है।