मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शेनबौम (तस्वीर क्रेडिट@XHIndonesia)

मेक्सिको में विदेशी हस्तक्षेप पर राष्ट्रपति शेनबौम का सख्त रुख,अमेरिका से सहयोग लेकिन बिना अधीनता के संबंधों पर जोर

मेक्सिको सिटी,15 सितंबर (युआईटीवी)- मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शेनबौम ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार देश के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि मेक्सिको और अमेरिका के बीच संबंध आपसी सहयोग,समन्वय और सम्मान पर आधारित होने चाहिए,लेकिन किसी भी स्थिति में मेक्सिको की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और प्रवासन समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर लगातार बातचीत होती रही है।

सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेनबौम ने उन लोगों पर भी निशाना साधा,जो उनके मुताबिक मेक्सिको के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप का समर्थन करते हैं। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की सोच रखने वाले लोग अमेरिका के कुछ वर्गों के साथ-साथ मेक्सिको के विपक्षी दलों में भी मौजूद हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार अपने उस सिद्धांत पर कायम रहेगी,जिसके तहत देश के फैसलों में किसी बाहरी शक्ति का दखल स्वीकार नहीं किया जाएगा।

शेनबौम ने कहा कि मेक्सिको अमेरिका के साथ सहयोग और समन्वय के लिए तैयार है, लेकिन यह संबंध किसी भी तरह की अधीनता पर आधारित नहीं हो सकते। उनके मुताबिक,यह रुख केवल मौजूदा सरकार की राजनीतिक सोच नहीं है,बल्कि मेक्सिको के इतिहास,उसके संवैधानिक सिद्धांतों और देश की संप्रभुता की भावना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेक्सिको दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करना चाहता है, लेकिन अपने आंतरिक मामलों में निर्णय लेने का अधिकार स्वयं के पास रखना चाहता है।

राष्ट्रपति ने अपने रुख के समर्थन में एक जनमत सर्वेक्षण का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण में शामिल करीब 91 प्रतिशत लोगों ने किसी विदेशी हस्तक्षेप का विरोध किया है। शेनबौम ने सवाल उठाया कि जब मेक्सिको की बड़ी आबादी विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ है, तो फिर ऐसी धारणा क्यों बनाई जा रही है कि देश के लोग किसी बाहरी दखल के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि इस तरह की धारणा फैलाने से आखिर किसे फायदा हो सकता है।

शेनबौम ने अमेरिका के कुछ समूहों और दक्षिणपंथी मीडिया पर भी आरोप लगाया कि वे मेक्सिको में विदेशी हस्तक्षेप की सोच को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय सहयोग और समन्वय की नीति पर जोर दिया। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि मेक्सिको सरकार दोनों देशों के बीच संबंधों को बनाए रखना चाहती है,लेकिन साथ ही अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।

मेक्सिको और अमेरिका के बीच संबंध आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार होता है और सुरक्षा तथा प्रवासन जैसे मुद्दे भी द्विपक्षीय संबंधों के केंद्र में रहते हैं। ऐसे में मेक्सिको की सरकार के लिए अमेरिका के साथ सहयोग बनाए रखना जरूरी है,लेकिन घरेलू राजनीति में किसी भी बाहरी प्रभाव की संभावना को लेकर शेनबौम लगातार सख्त रुख अपनाती रही हैं।

इसी बीच मेक्सिको की अर्थव्यवस्था को लेकर भी सोमवार को एक महत्वपूर्ण विश्लेषण सामने आया। निजी क्षेत्र के आर्थिक अध्ययन केंद्र ने कहा कि वर्ष 2027 के लिए सरकार की ओर से प्रस्तावित आर्थिक पैकेज पहले के मुकाबले ज्यादा यथार्थवादी आर्थिक तस्वीर पेश करता है। संगठन के मुताबिक,सरकार ने वर्ष 2026 और 2027 के आर्थिक विकास के अनुमान में कमी की है। इसके कारण सरकारी अनुमान अब वित्तीय विश्लेषकों तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के आकलन के ज्यादा करीब दिखाई दे रहे हैं।

केंद्र ने अपने साप्ताहिक आर्थिक विश्लेषण में कहा कि पिछले सप्ताह कांग्रेस में पेश किए गए बजट प्रस्ताव में आर्थिक विकास को लेकर पहले के अनुमानों को संशोधित किया गया है। संगठन का मानना है कि व्यापक आर्थिक ढाँचे से जुड़े आँकड़ों में किया गया बदलाव वास्तविक परिस्थितियों को ज्यादा बेहतर तरीके से दर्शाता है। हालाँकि,उसने यह भी चेतावनी दी कि बजट में अभी भी कुछ ऐसे अनुमान मौजूद हैं,जिन्हें जरूरत से ज्यादा आशावादी माना जा सकता है।

मेक्सिको सरकार पिछले कई वर्षों से वित्तीय अनुशासन मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार की कोशिश है कि बजट घाटे को धीरे-धीरे कम किया जाए और सार्वजनिक कर्ज को नियंत्रण में रखा जाए। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि सरकारी खर्चों को पूरा करने के लिए लगातार बढ़ते कर्ज पर निर्भरता कम हो और देश की वित्तीय स्थिति लंबे समय तक स्थिर बनी रहे।

आर्थिक अध्ययन केंद्र ने हालाँकि यह संकेत दिया है कि विकास अनुमानों को वास्तविक परिस्थितियों के करीब लाने के बावजूद सार्वजनिक कर्ज को लेकर चुनौतियाँ बनी हुई हैं। यदि आर्थिक वृद्धि उम्मीद से कम रहती है,तो सरकार के लिए राजस्व बढ़ाना और साथ ही खर्च को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में वित्तीय अनुशासन की नीति को प्रभावी तरीके से लागू करना सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

राष्ट्रपति शेनबौम के हालिया बयान और आर्थिक पैकेज को लेकर सामने आए विश्लेषण को एक साथ देखा जाए तो मेक्सिको सरकार के सामने दोहरी चुनौती दिखाई देती है। एक ओर उसे अमेरिका के साथ मजबूत आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बनाए रखते हुए अपनी संप्रभुता पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना है,वहीं दूसरी ओर घरेलू अर्थव्यवस्था को स्थिर रखते हुए विकास और सार्वजनिक वित्त के बीच संतुलन कायम करना है।

शेनबौम ने विदेशी हस्तक्षेप के मुद्दे पर सरकार की नीति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि मेक्सिको दूसरे देशों के साथ साझेदारी और सहयोग का पक्षधर है,लेकिन किसी भी प्रकार के दबाव या अधीनता को स्वीकार नहीं करेगा। वहीं आर्थिक मोर्चे पर सरकार द्वारा विकास अनुमानों में संशोधन को अपेक्षाकृत यथार्थवादी कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार संप्रभुता से जुड़े अपने सख्त रुख और आर्थिक चुनौतियों के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करती है।