यूपीआई (तस्वीर क्रेडिट@kuch_nya03)

यूपीआई के नियमों में बड़ा बदलाव, 2,000 रुपये से अधिक के कुछ भुगतान पर लगेगा एमडीआर

नई दिल्ली,16 सितंबर (युआईटीवी)- नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने यूपीआई से जुड़े मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर के ढांचे में बदलाव का ऐलान किया है। नए नियमों के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर एमडीआर लगाया जाएगा,जबकि छोटे व्यापारियों और कम मूल्य वाले लेनदेन के लिए शून्य एमडीआर की व्यवस्था जारी रहेगी। संशोधित ढाँचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। हालाँकि,आम ग्राहकों के लिए यूपीआई से भुगतान करने की सुविधा पहले की तरह मुफ्त रहेगी और उनसे सीधे कोई लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाएगा।

एनपीसीआई के नए ढाँचे का मुख्य उद्देश्य बड़े मूल्य वाले चुनिंदा व्यापारिक लेनदेन से मिलने वाले शुल्क के जरिए यूपीआई के पूरे भुगतान तंत्र को मजबूत करना है। इसके साथ ही छोटे कारोबारियों और कम मूल्य वाले डिजिटल भुगतान को शुल्क से बाहर रखने की कोशिश की गई है। नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि 2,000 रुपये तक के पर्सन-टू-मर्चेंट यानी पी2एम यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर नहीं लगाया जाएगा। इसका अर्थ है कि सामान्य तौर पर छोटे मूल्य के भुगतान करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों पर इस बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

संशोधित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ निर्धारित पी2एम यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर लागू होगा। हालाँकि, एक लेनदेन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। यानी प्रतिशत के हिसाब से गणना होने के बावजूद किसी एक योग्य लेनदेन पर इससे अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। यह शुल्क ग्राहकों से सीधे वसूले जाने वाले यूपीआई लेनदेन शुल्क के रूप में नहीं होगा,बल्कि मर्चेंट भुगतान से जुड़े शुल्क ढाँचे का हिस्सा होगा।

एनपीसीआई ने कुछ विशेष कारोबारी श्रेणियों के लिए अलग व्यवस्था भी की है। रेलवे, दूरसंचार सेवाओं, बीमा और ईंधन जैसी चुनिंदा मर्चेंट कैटेगरी में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 5 रुपये प्रति लेनदेन का फ्लैट एमडीआर लगाया जाएगा। इन क्षेत्रों के लिए प्रतिशत आधारित शुल्क की जगह निश्चित राशि का प्रावधान किया गया है। इससे इन श्रेणियों में बड़े मूल्य वाले यूपीआई भुगतान के लिए एमडीआर की गणना एक तय राशि के आधार पर होगी।

पर्सन-टू-पर्सन यानी पी2पी यूपीआई लेनदेन पर नए बदलाव का असर नहीं पड़ेगा। ये भुगतान पहले की तरह मुफ्त बने रहेंगे। इसी तरह 2,000 रुपये तक के पी2एम लेनदेन भी एमडीआर के दायरे से बाहर रखे गए हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने या किसी व्यापारी को 2,000 रुपये तक का भुगतान करने पर ग्राहक को कोई अतिरिक्त यूपीआई शुल्क नहीं देना होगा। यूपीआई की रोजमर्रा की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था छोटे मूल्य वाले डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

छोटे व्यापारियों को भी संशोधित ढाँचे में राहत दी गई है। पर्सन-टू-पर्सन मर्चेंट यानी पी2पीएम व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों को शून्य एमडीआर का लाभ मिलता रहेगा। इस श्रेणी में ऐसे छोटे वेंडर शामिल हैं,जो यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से सीधे अपने बैंक खाते में हर महीने एक लाख रुपये तक की राशि प्राप्त करते हैं। छोटे दुकानदारों और असंगठित खुदरा कारोबार से जुड़े व्यापारियों के लिए यह प्रावधान महत्वपूर्ण है,क्योंकि इससे उन्हें डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर अतिरिक्त शुल्क के दबाव से बचाने की कोशिश की गई है।

नए ढाँचे में छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए एक विशेष फंड बनाने का भी प्रस्ताव है। यह फंड मौजूदा मर्चेंट नेटवर्क के साथ-साथ टियर-3 और उससे छोटे बाजारों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना है, जहां छोटे कारोबारी अभी भी नकद लेनदेन पर अधिक निर्भर हो सकते हैं।

एनपीसीआई के अनुसार,इस पहल के जरिए अधिक से अधिक छोटे व्यवसायों को यूपीआई अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ व्यापारियों के लिए भुगतान स्वीकार करने की सुविधा,बैंकिंग से जुड़ाव और लेनदेन का रिकॉर्ड रखने जैसी सुविधाएँ भी बढ़ती हैं। विशेष रूप से छोटे शहरों और कस्बों में यूपीआई का नेटवर्क मजबूत करने से डिजिटल भुगतान को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

संशोधित एमडीआर ढाँचे के तहत बड़े मूल्य वाले पात्र लेनदेन से मिलने वाली राशि को यूपीआई इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच वितरित किया जाएगा। इसमें भुगतान से जुड़े नेटवर्क और अन्य भागीदार शामिल होंगे। इस राशि का इस्तेमाल भुगतान बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने,साइबर सुरक्षा बढ़ाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसके अलावा, नए उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों के बीच यूपीआई को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने पर भी जोर दिया जाएगा।

यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है और इसके जरिए हर दिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े लेनदेन होते हैं। ऐसे में एमडीआर ढाँचे में बदलाव का उद्देश्य एक तरफ भुगतान व्यवस्था के लिए आर्थिक संसाधन तैयार करना और दूसरी तरफ छोटे कारोबारियों तथा कम मूल्य वाले भुगतान को सुरक्षित रखना है। एनपीसीआई ने नए नियमों में ग्राहक स्तर पर मुफ्त यूपीआई भुगतान की व्यवस्था को बरकरार रखा है।

इस तरह 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला संशोधित ढाँचा मुख्य रूप से चुनिंदा 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट भुगतान को प्रभावित करेगा। वहीं,पी2पी लेनदेन, 2,000 रुपये तक के पी2एम भुगतान और निर्धारित सीमा के भीतर छोटे व्यापारियों द्वारा प्राप्त यूपीआई भुगतान पर शून्य एमडीआर की व्यवस्था जारी रहेगी। एनपीसीआई का कहना है कि इस बदलाव के जरिए यूपीआई इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ डिजिटल भुगतान के विस्तार और छोटे कारोबारियों की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।