विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (तस्वीर क्रेडिट@sanjoychakra)

मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाने के पाकिस्तान के फैसले पर भारत सख्त, कहा- खोखली घोषणाओं से नहीं चलेगा काम

नई दिल्ली,16 सितंबर (युआईटीवी)- भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी मसूद अजहर के बारे में पाकिस्तान की ओर से इनाम की राशि बढ़ाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी ने मसूद अजहर के बारे में सूचना देने पर मिलने वाले इनाम को बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया है। भारत ने इस घोषणा को महज दिखावटी कदम बताते हुए पाकिस्तान से आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने को कहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में कहा कि इस तरह की घोषणाएँ और लोगों को गुमराह करने की कोशिश पाकिस्तान की ओर से पहले भी की जाती रही हैं।

रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवादियों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई करनी चाहिए,न कि ऐसे ऐलान करने चाहिए जिनका जमीन पर कोई असर दिखाई न दे। उन्होंने पाकिस्तान के इस कदम को लेकर कहा कि ऐसी चालें और लोगों की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। भारत ने पहले भी इस तरह के कदम देखे हैं और इन घोषणाओं में कोई ठोस आधार नजर नहीं आता। भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है,जब पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी की नई रेड बुक में मसूद अजहर को वांछित आतंकवादियों की सूची में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी ने मसूद अजहर के बारे में जानकारी देने पर इनाम की राशि 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी है। एजेंसी ने उसे भगोड़े के तौर पर सूचीबद्ध किया है। यह कदम अक्टूबर में होने वाली वित्तीय कार्रवाई कार्यबल की पूर्ण बैठक से कुछ सप्ताह पहले सामने आया है। पाकिस्तान इससे पहले भी मसूद अजहर के खिलाफ इसी तरह का इनाम घोषित कर चुका है। वर्ष 2021 में एजेंसी ने उसके बारे में जानकारी देने पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये के इनाम की घोषणा की थी। उस समय भी पाकिस्तान ने दावा किया था कि मसूद अजहर देश में मौजूद नहीं है।

पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से लगातार यह दावा किया जाता रहा है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में छिपा हुआ है और पाकिस्तान में नहीं है। हालाँकि,इस दावे को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ इस दावे पर सवाल उठाती रही हैं और उनका कहना है कि मसूद अजहर पाकिस्तान में ही मौजूद हो सकता है। दूसरी ओर,पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर उसके अफगानिस्तान में होने की बात कही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार,अफगान तालिबान ने भी पहले मसूद अजहर के अफगानिस्तान में होने के दावे को खारिज किया है। ऐसे में उसके वास्तविक ठिकाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

मसूद अजहर का नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी मामलों से जुड़ा रहा है। जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक और प्रमुख के तौर पर वह लंबे समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर है। भारत ने उस पर संसद हमले सहित कई आतंकी मामलों में भूमिका का आरोप लगाया है। वर्ष 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भी मसूद अजहर और जैश-ए-मोहम्मद का नाम प्रमुखता से सामने आया था। संयुक्त राष्ट्र ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी के तौर पर सूचीबद्ध किया है।

मसूद अजहर का नाम पाकिस्तान की नई रेड बुक में शामिल किया जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी की यह सूची देश में वांछित आतंकवादियों और भगोड़ों से संबंधित है। रिपोर्टों के अनुसार,मसूद अजहर के अलावा 26/11 मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े कई अन्य आरोपियों के नाम भी इस सूची में शामिल किए गए हैं। इस कदम को लेकर पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई और उसकी प्रभावशीलता पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम का संबंध वित्तीय कार्रवाई कार्यबल की आगामी समीक्षा से भी जोड़ा जा रहा है। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल आतंकवाद के वित्तपोषण और धनशोधन से जुड़े जोखिमों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर काम करने वाली संस्था है। पाकिस्तान पहले 2018 से 2022 तक उसकी बढ़ी हुई निगरानी सूची में रहा था। अब अक्टूबर में होने वाली अगली पूर्ण बैठक से पहले मसूद अजहर को वांछित आतंकवादी के तौर पर सूचीबद्ध करने और उसके ऊपर इनाम बढ़ाने के कदम को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई दिखाने की कोशिश के रूप में देखा गया है। हालाँकि,पाकिस्तान की ओर से इन कदमों को लेकर आधिकारिक तौर पर यही कहा गया है कि मसूद अजहर उसके लिए वांछित है।

भारत का कहना है कि केवल इनाम घोषित करने से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई साबित नहीं होती। नई दिल्ली का जोर इस बात पर है कि पाकिस्तान को आतंकवादी संगठनों और उनके नेतृत्व के खिलाफ वास्तविक कानूनी एवं सुरक्षा कार्रवाई करनी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने इसी संदर्भ में पाकिस्तान की घोषणा को लेकर सवाल उठाए हैं। भारत के अनुसार,पहले भी पाकिस्तान की ओर से इसी तरह के ऐलान सामने आ चुके हैं, लेकिन उनके बाद ऐसी ठोस कार्रवाई नहीं हुई,जिसे आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कदम माना जा सके।

मसूद अजहर के मामले में वर्ष 2021 की घोषणा का भी हवाला दिया जा रहा है। उस समय पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी ने उसके बारे में सूचना देने पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया था। अब करीब पाँच साल बाद इनाम की राशि बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी गई है। इस बदलाव के बावजूद मसूद अजहर की गिरफ्तारी या उसके खिलाफ पाकिस्तान में किसी ठोस कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि भारत ने नई घोषणा की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई को प्राथमिकता देने की बात कही है।

जैश-ए-मोहम्मद को लेकर भी भारत की चिंता केवल उसके प्रमुख तक सीमित नहीं है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ लंबे समय से सीमा पार सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उनके सहयोगी ढाँचों को लेकर पाकिस्तान पर सवाल उठाती रही हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के लिए अलग-अलग नामों और संगठनों के इस्तेमाल को लेकर भी भारतीय एजेंसियों ने कई बार जानकारी साझा की है। भारत का आरोप है कि प्रतिबंधित संगठनों के नेटवर्क नए नामों या दूसरे मंचों के जरिए अपनी गतिविधियां जारी रखने की कोशिश करते हैं। इन दावों पर पाकिस्तान की ओर से अलग-अलग मौकों पर भारत के आरोपों को खारिज किया जाता रहा है।

मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाए जाने का मामला ऐसे समय सामने आया है,जब भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर मतभेद लगातार गंभीर बने हुए हैं। नई दिल्ली लंबे समय से पाकिस्तान से आतंकवादी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई की माँग करता रहा है। वहीं,पाकिस्तान की ओर से मसूद अजहर के अफगानिस्तान में होने का दावा किया जाता रहा है। अब नई रेड बुक में उसका नाम शामिल करने और इनाम बढ़ाने के फैसले के बाद दोनों देशों के बयानों में एक बार फिर अंतर दिखाई दे रहा है।

आने वाले समय में इस मामले का महत्व इसलिए भी बढ़ सकता है क्योंकि वित्तीय कार्रवाई कार्यबल की अगली बैठक में आतंकवाद के वित्तपोषण और उससे जुड़े कदमों की समीक्षा होनी है। पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह देखा जाता है,यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल भारत ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ केवल घोषणाएँ पर्याप्त नहीं हैं और वास्तविक कार्रवाई की जरूरत है। मसूद अजहर के खिलाफ पाकिस्तान का नया कदम इसी व्यापक संदर्भ में जाँच और अंतर्राष्ट्रीय निगरानी के दायरे में रहेगा।