नई दिल्ली,21 अक्टूबर (युआईटीवी)- पंजाब के मानसा जिले में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला अब केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथों में पहुँच गया है। अधिकारियों के मुताबिक,केंद्रीय एजेंसी ने मामले की जाँच अपने हाथ में लेते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जाँच को आगे बढ़ाने और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों का पता लगाने के लिए सीबीआई की एक टीम पंजाब पहुँच चुकी है। इस घटनाक्रम के बाद मामले में निष्पक्ष जाँच और परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है। झोटा की हत्या ने राज्य में नशे के कारोबार,कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
सीबीआई को जाँच सौंपने का फैसला पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की उस घोषणा के एक दिन बाद आया,जिसमें उन्होंने मामले की जाँच केंद्रीय एजेंसी से कराने की बात कही थी। झोटा के परिवार की ओर से राज्य सरकार की जाँच पर भरोसा नहीं जताए जाने और केंद्रीय एजेंसी से जाँच कराने की माँग किए जाने के बाद यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब केंद्रीय एजेंसी हत्या से जुड़े घटनाक्रम, आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की जाँच करेगी। जाँच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें शामिल लोगों की भूमिका क्या थी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से परविंदर सिंह झोटा के परिवार के प्रति समर्थन जताया था। उन्होंने कहा था कि झोटा नशे के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे और राज्य सरकार उनके पिता तथा परिवार के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक,परिवार की माँग को ध्यान में रखते हुए हत्या के मामले की जाँच सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री ने पंजाब को नशामुक्त बनाने और नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जताई थी। राज्य में नशीले पदार्थों की समस्या लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक चिंता का विषय रही है। नशे की लत के कारण प्रभावित परिवारों,युवाओं और स्थानीय समुदायों की समस्याएँ समय-समय पर चर्चा में आती रही हैं। ऐसे माहौल में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक कार्यकर्ता की हत्या ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।
राज्य सरकार की ओर से सीबीआई जांच का फैसला ऐसे समय में आया है,जब परिवार न्याय की माँग कर रहा है। केंद्रीय एजेंसी के सामने अब मामले से संबंधित तथ्यों को स्वतंत्र रूप से परखने और जाँच की दिशा तय करने की जिम्मेदारी होगी। जाँच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े सभी सवालों के जवाब मिल सकेंगे।
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक,घटना उस समय हुई,जब वह एक केमिस्ट की दुकान के संचालक से नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर सवाल कर रहे थे। बताया गया कि एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीले पदार्थ बेचे जाने की बात को लेकर झोटा ने दुकान संचालक से जवाब माँगा था। इसी दौरान दोनों के बीच बहस हो गई।
आरोप है कि विवाद बढ़ने पर केमिस्ट दुकान के मालिक अश्वनी कुमार ने झोटा पर गोली चला दी। गोली लगने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया,लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना से इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल पैदा हो गया। नशे के खिलाफ सक्रिय रहने वाले झोटा की हत्या के बाद उनके समर्थकों और परिवार ने मामले में न्याय की माँग उठाई।
पुलिस ने घटना के बाद आरोपी की तलाश शुरू की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वारदात के 24 घंटे से भी कम समय में आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार कर लिया गया। अब सीबीआई इस मामले की जाँच के दौरान पुलिस की ओर से जुटाई गई जानकारी,घटनास्थल से संबंधित साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों की पड़ताल कर सकती है। एजेंसी की जाँच का उद्देश्य घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करना और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जाँच करना होगा।
झोटा की हत्या के बाद उनके परिवार की न्याय की माँग लगातार बनी हुई है। घटना के करीब एक सप्ताह बाद भी परिजनों ने उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार नहीं किया था। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय मिलना चाहिए और मामले की जाँच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। केंद्रीय एजेंसी से जाँच कराने की माँग भी इसी चिंता से जुड़ी थी कि मामले के सभी पहलुओं की स्वतंत्र रूप से पड़ताल की जाए।
इस बीच,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को झोटा के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस मुलाकात के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया। परिवार की माँग,केंद्रीय गृह मंत्री की मुलाकात और सीबीआई जाँच के फैसले ने मामले को नया मोड़ दिया है।
परिवार के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जाँच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और आरोपों से जुड़े तथ्यों को किस तरह स्थापित किया जाता है। किसी भी आपराधिक मामले में न्यायिक प्रक्रिया साक्ष्यों,जाँच और अदालत में पेश किए गए तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ती है। ऐसे में सीबीआई की जाँच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना के पीछे क्या परिस्थितियाँ थीं और मामले में आगे किन कानूनी कदमों की जरूरत है।
झोटा हत्याकांड ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर राजनीतिक टकराव भी बढ़ा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इससे पहले राज्य में नशे की स्थिति को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उनका कार्यालय झोटा हत्याकांड के संबंध में रिपोर्ट मांगेगा। वहीं,भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब सरकार पर नशे के कारोबार को नियंत्रित करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है।
दूसरी ओर,मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नशे के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने और पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही है। इस तरह मामला केवल हत्या की जाँच तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि राज्य में नशे के खिलाफ सरकारी प्रयासों और कानून-व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नशे का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। भाजपा राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है, जबकि आम आदमी पार्टी सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का दावा कर रही है। हालाँकि,राजनीतिक आरोपों से अलग इस हत्या के मामले में जाँच के निष्कर्ष और कानूनी कार्रवाई सबसे महत्वपूर्ण होंगे।
झोटा की हत्या के बाद पंजाब सरकार ने जाँच के लिए एक समिति भी गठित की थी,लेकिन परिवार ने राज्य स्तर पर हो रही जाँच पर भरोसा नहीं जताया और केंद्रीय एजेंसी से जाँच कराने की माँग की। अब सीबीआई द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर जाँच सँभालने के बाद मामले की दिशा और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
केंद्रीय एजेंसी को हत्या के घटनाक्रम,आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य संबंधित तथ्यों की जाँच करनी होगी। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जाँच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों को कानूनी प्रक्रिया के तहत किस तरह आगे बढ़ाया जाता है।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा और नशीले पदार्थों के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई जैसे सवालों को फिर सामने ला दिया है। परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है और अब सीबीआई जाँच से निष्पक्ष पड़ताल की उम्मीद की जा रही है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जाँच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएँगे।
