अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@pkray11)

नेतन्याहू के समर्थन में ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- मेरे ऐलान से बदला चुनावी माहौल; शुरुआती रुझानों में 57 सीटों पर बढ़त

वाशिंगटन,28 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन में किए गए अपने प्रचार को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि नेतन्याहू के पक्ष में उनके समर्थन के ऐलान के बाद इजरायल में चुनावी माहौल बदल गया और उनकी स्थिति पहले के मुकाबले मजबूत हुई। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि जिस मुकाबले में नेतन्याहू की हार की आशंका जताई जा रही थी, वह अब बराबरी की स्थिति में पहुँच गया है और उनके जीतने की संभावना भी दिखाई दे रही है। हालाँकि, इजरायल के चुनाव से जुड़े शुरुआती आँकड़े अभी अंतिम नतीजे नहीं हैं। मतगणना पूरी होने और सभी मतों की गिनती के बाद ही स्पष्ट होगा कि अलग-अलग राजनीतिक खेमों को कितनी सीटें मिलती हैं।

ट्रंप ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर यह पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने इर्विंग सी. श्वार्ट्ज के हवाले से नेतन्याहू के समर्थन में किए गए अपने प्रयासों की सराहना की। ट्रंप के इस बयान ने इजरायल की राजनीति में अमेरिकी राष्ट्रपति की भूमिका और दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि नेतन्याहू के समर्थन में उनके बयान के बाद चुनावी समीकरण बदल गए। पोस्ट में कहा गया कि पहले नेतन्याहू की करारी हार की आशंका जताई जा रही थी,लेकिन अब मुकाबला बराबरी का दिखाई दे रहा है और संभव है कि नेतन्याहू जीत भी हासिल कर लें।

ट्रंप ने लिखा कि जब उन्होंने नेतन्याहू का समर्थन किया,तो पूरी स्थिति बदल गई। उन्होंने नेतन्याहू को एक महान प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का समर्थन मध्य पूर्व, इजरायल और अमेरिका के हित में है। इस बयान के जरिए ट्रंप ने अपने राजनीतिक समर्थन को नेतन्याहू की चुनावी स्थिति में सुधार से जोड़ने की कोशिश की।

हालाँकि,ट्रंप का यह दावा उनका अपना आकलन है। शुरुआती चुनावी आँकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि किसी एक नेता के समर्थन में दिए गए बयान से मतदाताओं के रुख में कितना बदलाव आया। इसके लिए चुनाव के अंतिम नतीजों और अन्य राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण जरूरी होगा।

इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग के शुरुआती आँकड़ों के अनुसार,सुबह 5 बजकर 58 मिनट तक 41.9 प्रतिशत मतपेटियों की गिनती पूरी हो चुकी थी। इन आँकड़ों में बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थक राजनीतिक खेमे को 57 सीटों पर बढ़त मिलती दिखाई गई,जबकि उनके विरोधी खेमे के खाते में 47 सीटें दर्ज थीं।

इसके अलावा,मुख्य रूप से अरब दलों वाले जॉइंट लिस्ट और राम गुटों को संयुक्त रूप से 16 सीटें मिलती दिखाई गईं। इन आँकड़ों से संकेत मिलता है कि चुनावी मुकाबले में अलग-अलग राजनीतिक समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालाँकि,मतगणना के शुरुआती चरण में सामने आए आँकड़ों को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता।

इजरायल की संसद में बहुमत हासिल करने के लिए किसी राजनीतिक खेमे को 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में शुरुआती आँकड़ों में 57 सीटों पर बढ़त के बावजूद नेतन्याहू समर्थक खेमे की बहुमत की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। अंतिम सीटों का बँटवारा और अन्य दलों का रुख सरकार गठन की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।

मतगणना के शुरुआती आँकड़ों में कुछ राजनीतिक दल संसद में प्रतिनिधित्व के लिए निर्धारित न्यूनतम मत प्रतिशत की सीमा से नीचे दिखाई दिए। इजरायल में किसी दल को संसद में सीटें हासिल करने के लिए कम से कम 3.25 प्रतिशत मत प्राप्त करना जरूरी होता है।

शुरुआती आँकड़ों के मुताबिक,रिजर्विस्ट्स को 2.7 प्रतिशत, पीपल ऑफ इजरायल को 1.8 प्रतिशत और चारेदी पब्लिक को 0.3 प्रतिशत मत मिले थे। यदि अंतिम परिणामों में भी ये दल निर्धारित सीमा पार नहीं कर पाते हैं,तो उन्हें संसद में प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकेगा।

इस न्यूनतम सीमा का चुनावी समीकरणों पर असर पड़ सकता है,क्योंकि छोटे दलों को मिले मतों और सीटों के वितरण से बड़े राजनीतिक खेमों की वास्तविक स्थिति बदल सकती है। इसलिए मतगणना के दौरान सामने आने वाले आँकड़ों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।

इजरायल के चुनावी नतीजों को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। शुरुआती मतगणना में नेतन्याहू समर्थक खेमे को 57 सीटों पर बढ़त मिलने के बावजूद बहुमत का आंकड़ा हासिल करने की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। वहीं, उनके विरोधी खेमे और अरब दलों की स्थिति भी अंतिम परिणाम आने के बाद ही बेहतर तरीके से समझी जा सकेगी।

इसके अलावा,सैनिकों के मतों सहित दोहरे लिफाफों में डाले गए मतों की गिनती बाद में की जाती है। इन मतों को शामिल किए जाने के बाद सीटों के वितरण में बदलाव संभव है। ऐसे में मौजूदा आँकड़ों के आधार पर किसी राजनीतिक खेमे की जीत या हार का अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू के समर्थन में अपने बयान को चुनावी माहौल में बदलाव से जोड़ते हुए इसे अपनी राजनीतिक पहल की सफलता बताया है। हालाँकि,उनके दावे की वास्तविकता का आकलन अंतिम चुनावी नतीजों के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल, इजरायल की संसद में किस राजनीतिक खेमे को बहुमत मिलेगा और सरकार गठन की स्थिति क्या होगी,इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।