विदेश मंत्री एस. जयशंकर और बीआटे माइनल-रीसिंगर (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को मिलेगी नई मजबूती, विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगी बीआटे माइनल-रीसिंगर

नई दिल्ली,28 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बुधवार को नई दिल्ली में अहम कूटनीतिक वार्ता होने जा रही है। भारत दौरे पर आईं ऑस्ट्रिया की यूरोपीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मामलों की संघीय मंत्री बीआटे माइनल-रीसिंगर अपने भारतीय समकक्ष विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच यह बैठक नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार और लोगों के आपसी संपर्क जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है।

बीआटे माइनल-रीसिंगर 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। नई दिल्ली में अपने निर्धारित कार्यक्रम पूरे करने के बाद वह 29 अक्टूबर से 2 नवंबर तक जयपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगी। उनकी इस यात्रा को भारत और ऑस्ट्रिया के बीच राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने तथा आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए अवसर तलाशने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और ऑस्ट्रिया पिछले कुछ वर्षों से अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के साथ-साथ रक्षा, तकनीक, नवाचार और औद्योगिक सहयोग की संभावनाएं भी मौजूद हैं। बुधवार को होने वाली बैठक में इन क्षेत्रों में साझेदारी को और प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार किया जा सकता है।

दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में व्यापार की महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्ष 2025 में भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3.47 अरब डॉलर रहा था। यह कारोबार दोनों देशों के बीच विकसित होते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। भारत की ओर से इलेक्ट्रॉनिक सामान, वस्त्र और मशीनरी का निर्यात किया जाता है,जबकि ऑस्ट्रिया से भारत में भारी मशीनरी, इस्पात और वाहन आयात किए जाते हैं।

दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए निवेशकों और कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना भी अहम विषय है। औद्योगिक उत्पादन, आधुनिक तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्रों में सहयोग से दोनों पक्षों को लाभ मिलने की संभावनाएं हैं। ऐसे में विदेश मंत्रियों की बातचीत आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

भारत और ऑस्ट्रिया ने अपने कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस दौरान दोनों देशों ने राजनीतिक संवाद और आपसी सहयोग के जरिए संबंधों को आगे बढ़ाया है। वर्तमान में दोनों देशों के संबंधों को ‘उन्नत साझेदारी’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। उच्चस्तरीय यात्राओं और नियमित बातचीत ने इस साझेदारी को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है।

जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना का दौरा किया था। यह 41 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली ऑस्ट्रिया यात्रा थी। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया। इसके बाद भारत और ऑस्ट्रिया के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिशें जारी रहीं।

उच्चस्तरीय मुलाकातों के जरिए दोनों देश अपनी प्राथमिकताओं पर चर्चा करने और भविष्य की साझेदारी के लिए नए रास्ते तलाशने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में बीआटे माइनल-रीसिंगर की मौजूदा भारत यात्रा को भी इसी व्यापक कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

अप्रैल 2026 में ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर भारत यात्रा पर आए थे। इस दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई थी। उनकी यात्रा के दौरान साइबर सुरक्षा संवाद शुरू करने और कंपनियों तथा निवेशकों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था स्थापित करने की घोषणा की गई थी।

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन कारोबार और तकनीकी प्रणालियों के विस्तार के साथ साइबर खतरों से निपटना देशों के लिए अहम चुनौती बन गया है। ऐसे में भारत और ऑस्ट्रिया के बीच नियमित संवाद और अनुभव साझा करने से इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।

वहीं,कंपनियों और निवेशकों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था का उद्देश्य कारोबारी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाना है। इससे निवेश से जुड़े मामलों में समन्वय बेहतर करने और व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है। अब विदेश मंत्रियों की बैठक में इन पहलों को आगे बढ़ाने और अन्य संभावित क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा किए जाने की संभावना है।

भारत और ऑस्ट्रिया के बीच तकनीकी सहयोग की भी व्यापक संभावनाएं हैं। दोनों देश आधुनिक उद्योग, मशीनरी, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक-दूसरे के अनुभवों से लाभ उठा सकते हैं। भारत का बड़ा बाजार और तेजी से विकसित होता तकनीकी क्षेत्र ऑस्ट्रियाई कंपनियों के लिए अवसर प्रदान करता है। वहीं,ऑस्ट्रिया की औद्योगिक विशेषज्ञता और उन्नत मशीनरी भारतीय उद्योगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग भी द्विपक्षीय वार्ता के व्यापक एजेंडे का हिस्सा है। इसके अलावा शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने से दोनों देशों के समाजों के बीच आपसी समझ मजबूत हो सकती है। हालाँकि,बुधवार की बैठक के विस्तृत परिणाम सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों में नई पहल या ठोस निर्णय लिए जाते हैं।

नई दिल्ली में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद बीआटे माइनल-रीसिंगर 29 अक्टूबर से 2 नवंबर तक जयपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। उनकी यात्रा का यह चरण भी भारत और ऑस्ट्रिया के बीच संपर्क बढ़ाने के अवसर प्रदान करेगा।

कुल मिलाकर,ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर है। व्यापार, निवेश, साइबर सुरक्षा, तकनीक और नवाचार जैसे विषयों पर सहयोग को मजबूत करने की साझा कोशिशें इस साझेदारी को अधिक व्यापक बना सकती हैं। बुधवार को एस. जयशंकर के साथ होने वाली मुलाकात से दोनों देशों के बीच जारी संवाद को आगे बढ़ाने और भविष्य के सहयोग की दिशा तय करने पर नजर रहेगी।