वाशिंगटन,31 अक्टूबर (युआईटीवी)- ब्राजील की राजनीति से जुड़े बोल्सोनारो परिवार को लेकर एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में करारी हार का सामना करने वाले फ्लावियो बोल्सोनारो ने गिरफ्तारी की आशंका के बीच अपने परिवार के साथ देश छोड़ दिया है। वह पत्नी और दो बेटियों के साथ अमेरिका के मियामी पहुँच गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लावियो और उनके परिवार को अमेरिका पहुँचने में मदद की। बताया जा रहा है कि ब्राजील से अमेरिका तक का उनका सफर करीब 72 घंटे में पूरा हुआ और इसके लिए उन्हें तीन देशों से होकर गुजरना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लावियो ने ब्राजील छोड़ने के बाद सबसे पहले अर्जेंटीना का रुख किया। इसके बाद उनका परिवार इक्वाडोर पहुँचा और वहाँ से निजी विमान के जरिए अमेरिका के मियामी के लिए रवाना हुआ। फ्लावियो ने यात्रा के दौरान इटली के पासपोर्ट का इस्तेमाल किया। 28 अक्टूबर को वह अपने परिवार के साथ मियामी पहुँचे। इस यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि ब्राजील से उनके निकलने और अमेरिका पहुँचने के बीच कई ऐसी गतिविधियाँ हुईं,जिनके आधिकारिक रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के बयान सामने आए हैं।
फ्लावियो के अमेरिका पहुँचने की खबर ऐसे समय में सामने आई है,जब ब्राजील में उनके खिलाफ कई गंभीर मामलों की जाँच चल रही है। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार और टैक्स चोरी जैसे आरोप शामिल हैं। इसके अलावा अपने पिता के जीवन पर फिल्म बनाने के लिए धन जुटाने की कोशिश को लेकर भी वह जाँच और विवादों के घेरे में हैं। इन मामलों के बीच पुलिस की ओर से उन्हें पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी। बताया गया कि उन्हें 24 घंटे के भीतर अपना पासपोर्ट जमा करना था। इसके बाद फ्लावियो ने देश छोड़ने का फैसला किया।
फ्लावियो बोल्सोनारो पर लगे आरोपों में उनके पिता की जिंदगी पर फिल्म बनाने के लिए धन जुटाने का मामला भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, फ्लावियो ने खुद स्वीकार किया था कि उन्होंने पूर्व बैंकर डेनियल वोरकारो से इस फिल्म के निर्माण के लिए करीब 1.2 करोड़ डॉलर जुटाने की कोशिश की थी। हालाँकि, उन्होंने किसी भी तरह की गड़बड़ी या गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया था।
फिल्म के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाने की कोशिश ने ब्राजील में राजनीतिक और कानूनी हलकों का ध्यान खींचा। जाँच एजेंसियाँ इस मामले में धन के स्रोत और प्रस्तावित लेन-देन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। फ्लावियो की ओर से आरोपों को खारिज किए जाने के बावजूद यह मामला उनके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला साबित हुआ है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि फिल्म निर्माण के नाम पर जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था और इसमें शामिल लोगों की भूमिका क्या थी।
इसके अलावा फ्लावियो पर एक ऐसे वकील के साथ संबंध होने के आरोप भी लगाए गए हैं, जिस पर ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए एक अरब डॉलर से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है। इस मामले की जाँच के दौरान पुलिस ने फ्लावियो को 24 घंटे के भीतर अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया था। इस निर्देश के बाद उनके देश छोड़ने की खबर सामने आई। हालाँकि,उनके अमेरिका पहुँचने के घटनाक्रम और जाँच के बीच संबंध को लेकर सामने आए दावों को आरोपों और जाँच के संदर्भ में ही देखा जा रहा है। फ्लावियो ने अब तक अपने खिलाफ लगाए गए गलत कामों के आरोपों से इनकार किया है।
फ्लावियो के ब्राजील छोड़ने और अमेरिका पहुँचने की पूरी प्रक्रिया में उनके छोटे भाई एडुआर्डो बोल्सोनारो की भूमिका भी चर्चा में है। बताया गया है कि एडुआर्डो ने इस यात्रा को व्यवस्थित करने में अपने बड़े भाई की मदद की। एडुआर्डो फिलहाल अमेरिका के टेक्सास में रहते हैं और उन्हें ट्रंप प्रशासन के करीबी लोगों में गिना जाता है। इसी वजह से फ्लावियो के अमेरिका पहुँचने के मामले में उनके संपर्कों और भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लावियो और उनके परिवार को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति देने में मदद की। इस संबंध में ट्रंप प्रशासन की ओर से जरूरी मंजूरी दिए जाने की बात कही गई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 27 अक्टूबर को परिवार को वीजा दिए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद फ्लावियो और उनके परिवार के अमेरिका पहुँचने का रास्ता साफ हुआ।
ट्रंप प्रशासन ने फ्लावियो और उनके परिवार को अमेरिका में एक साल तक रहने की अनुमति देने वाला विशेष प्रावधान भी उपलब्ध कराया। इसे ‘ह्यूमैनिटेरियन पैरोल’ कहा जाता है। इस व्यवस्था के तहत किसी विदेशी नागरिक को कुछ विशेष परिस्थितियों में सीमित अवधि के लिए अमेरिका में रहने की अनुमति दी जा सकती है। यह अनुमति आमतौर पर मानवीय आधार या अमेरिका के किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए दी जाती है।
ह्यूमैनिटेरियन पैरोल अमेरिका की एक विशेष आव्रजन व्यवस्था है। इसके तहत ऐसे व्यक्ति को अस्थायी रूप से अमेरिका में प्रवेश करने या वहाँ रहने की अनुमति दी जा सकती है,जिसके मामले में मानवीय परिस्थितियों या सार्वजनिक हित को महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सामान्य वीजा या स्थायी निवास की अनुमति से अलग व्यवस्था है। इसके माध्यम से किसी व्यक्ति को निर्धारित अवधि तक अमेरिका में रहने का अवसर मिलता है, लेकिन इससे उसे अपने आप स्थायी नागरिकता या ग्रीन कार्ड का अधिकार नहीं मिल जाता।
इस अनुमति की अवधि और शर्तें अमेरिकी प्रशासन तय करता है। संबंधित व्यक्ति को निर्धारित नियमों का पालन करना होता है। फ्लावियो और उनके परिवार को एक साल तक अमेरिका में रहने की अनुमति दिए जाने की खबर के बाद यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। हालाँकि,इस विशेष अनुमति का मिलना उनके खिलाफ ब्राजील में चल रही जाँच को समाप्त नहीं करता। अमेरिका में अस्थायी रूप से रहने की अनुमति और ब्राजील में दर्ज मामलों की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग विषय हैं।
फ्लावियो के ब्राजील छोड़ने की यात्रा को लेकर अर्जेंटीना के इमिग्रेशन विभाग की ओर से कुछ अहम जानकारियाँ सामने आई हैं। विभाग के अनुसार, फ्लावियो 27 अक्टूबर की रात करीब 10 बजकर 50 मिनट पर अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ सड़क मार्ग से अर्जेंटीना पहुँचे थे। उनका परिवार दक्षिणी ब्राजील के फोज दो इगुआसू शहर से अर्जेंटीना के पुएर्तो इगुआसू शहर को जोड़ने वाले फ्रेटरनिटी ब्रिज से होकर गुजरा था।
यह पुल दोनों देशों के बीच आवागमन का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। फ्लावियो और उनके परिवार ने इसी मार्ग से ब्राजील की सीमा पार की। हालाँकि,उनके सीमा पार करने के रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के बयान सामने आए हैं। ब्राजील पुलिस के पास उनके देश छोड़ने से संबंधित कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होने की बात कही गई है। वहीं, अर्जेंटीना की पुलिस ने भी अपने यहाँ उनके प्रवेश का रिकॉर्ड होने से इनकार किया था। इसके बावजूद अर्जेंटीना के इमिग्रेशन विभाग ने पुष्टि की कि फ्लावियो अपने परिवार के साथ 27 अक्टूबर की रात देश में दाखिल हुए थे।
इस अंतर के कारण यात्रा से जुड़े दस्तावेजों और सीमा पार करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। एक तरफ इमिग्रेशन विभाग ने उनके अर्जेंटीना पहुँचने की जानकारी दी,तो दूसरी ओर पुलिस के रिकॉर्ड को लेकर अलग बयान सामने आया। हालाँकि,उपलब्ध जानकारी के अनुसार,फ्लावियो और उनका परिवार सड़क मार्ग से अर्जेंटीना पहुँचा था और वहाँ से कुछ ही समय बाद निजी विमान के जरिए आगे की यात्रा पर निकल गया।
अर्जेंटीना पहुँचने के लगभग 40 मिनट बाद फ्लावियो और उनके परिवार ने निजी विमान से उड़ान भरी। विमान ने अमेरिका के मियामी पहुँचने से पहले ईंधन भरने के लिए इक्वाडोर के गुआयाकिल शहर में ठहराव किया। इसके बाद विमान ने दोबारा उड़ान भरी और परिवार को लेकर मियामी पहुंच गया। इस तरह ब्राजील से निकलने के बाद अर्जेंटीना और इक्वाडोर के रास्ते फ्लावियो का अमेरिका पहुंचने का सफर पूरा हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी यात्रा को लगभग 72 घंटे के भीतर पूरा किया गया। फ्लावियो ने अपनी पत्नी और बेटियों के साथ यह सफर इटली के पासपोर्ट पर किया। तीन देशों से होकर गुजरने वाली इस यात्रा में सीमा पार करने, निजी विमान की व्यवस्था और अमेरिका में प्रवेश की अनुमति जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल रहे। इसी कारण यह घटनाक्रम ब्राजील और अमेरिका दोनों देशों में चर्चा का विषय बन गया है।
फ्लावियो के अमेरिका पहुँचने के मामले में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने परिवार को अमेरिका में प्रवेश की मंजूरी देने में मदद की। विदेश मंत्री मार्को रूबियो की ओर से 27 अक्टूबर को वीजा दिए जाने की बात सामने आने के बाद परिवार की यात्रा आगे बढ़ी। इसके साथ ही एक साल तक रहने की अनुमति देने वाले ह्यूमैनिटेरियन पैरोल ने फ्लावियो के अमेरिका में अस्थायी ठहराव का रास्ता भी खोल दिया।
बोल्सोनारो परिवार और ट्रंप प्रशासन के बीच संबंध पहले से ही चर्चा में रहे हैं। फ्लावियो के छोटे भाई एडुआर्डो का टेक्सास में रहना और अमेरिकी प्रशासन के करीबी लोगों से उनके संपर्क होने की बात इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बनाती है। हालाँकि,अमेरिका में प्रवेश की अनुमति दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि फ्लावियो को ब्राजील में चल रही जाँच से कोई कानूनी छूट मिल गई है। उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच और उनसे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अपने स्तर पर जारी रह सकती है।
फिलहाल फ्लावियो बोल्सोनारो अपने परिवार के साथ मियामी पहुँच चुके हैं। ब्राजील में उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार, टैक्स चोरी और फिल्म निर्माण के लिए धन जुटाने से जुड़े मामलों की जाँच जारी है। वहीं, उनके देश छोड़ने के तरीके, पासपोर्ट जमा करने के पुलिस आदेश और अमेरिका में प्रवेश की विशेष अनुमति को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ब्राजील की जाँच एजेंसियाँ इस मामले में आगे क्या कदम उठाती हैं और फ्लावियो की अमेरिका में अस्थायी मौजूदगी का उनके कानूनी मामलों पर क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि गिरफ्तारी की आशंका के बीच ब्राजील से निकले फ्लावियो का अमेरिका पहुँचना केवल एक पारिवारिक यात्रा नहीं,बल्कि दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों से जुड़ा एक चर्चित घटनाक्रम बन गया है।
