यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

रूस के खिलाफ यूक्रेन को मिलेगी 500 पैट्रियट मिसाइलों की ताकत, अमेरिका ने 2.1 अरब डॉलर की डील को दी मंजूरी, जेलेंस्की ने डिलीवरी में देरी पर जताई चिंता

नई दिल्ली,31 अक्टूबर (युआईटीवी)- रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान अमेरिका ने कीव की हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी प्रशासन ने यूक्रेन को 500 पैट्रियट पीएसी-3 एमएसई इंटरसेप्टर मिसाइलों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित सौदे की कीमत करीब 2.1 अरब डॉलर यानी लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। इन मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को रोकने के लिए कर सकेगा। हालाँकि,अमेरिकी मंजूरी मिलने के बावजूद यूक्रेन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन हथियारों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने चिंता जताई है कि यदि मिसाइलों की डिलीवरी में कई साल लग जाते हैं,तो मौजूदा युद्ध परिस्थितियों में यह यूक्रेन की सुरक्षा के लिए गंभीर समस्या बन सकती है।

यूक्रेन इस समय रूस के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है। खासतौर पर देश के बिजली संयंत्रों,ऊर्जा नेटवर्क और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में सर्दियों के मौसम से पहले यूक्रेन अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है। जेलेंस्की का मानना है कि आने वाले महीनों में रूस के हमले और तेज हो सकते हैं। यदि समय रहते पर्याप्त इंटरसेप्टर मिसाइलें उपलब्ध नहीं हुईं,तो देश के महत्वपूर्ण ठिकानों और आम नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

अमेरिका की ओर से 500 पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की बिक्री को मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे यूक्रेन की हवाई सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार,इतनी बड़ी संख्या में आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइलें मिलने से रूस के मिसाइल हमलों का मुकाबला करने की यूक्रेन की क्षमता में काफी सुधार हो सकता है।

हालाँकि,जेलेंस्की ने इस फैसले के साथ एक बड़ी चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मंजूरी मिलने और वास्तविक आपूर्ति शुरू होने के बीच काफी समय का अंतर हो सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार,इन मिसाइलों की डिलीवरी शुरू होने में कई साल लगने की आशंका है। ऐसे में यूक्रेन को केवल भविष्य में मिलने वाली सैन्य सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए,बल्कि मौजूदा खतरों से निपटने के लिए तत्काल हथियारों की व्यवस्था भी करनी होगी।

जेलेंस्की ने अमेरिकी प्रशासन से आग्रह किया है कि वह ऐसा वैकल्पिक इंतजाम करे, जिससे यूक्रेन को जरूरी इंटरसेप्टर मिसाइलें जल्द उपलब्ध कराई जा सकें। उनका कहना है कि नए हथियारों के उत्पादन और आपूर्ति की प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना देश की सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।

यूक्रेन की चिंता केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। रूस लगातार देश के ऊर्जा बुनियादी ढाँचे को निशाना बना रहा है। जेलेंस्की के मुताबिक,अक्टूबर के पिछले दो सप्ताह के दौरान रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ढाँचे पर 30 से अधिक हमले किए हैं। इन हमलों में बिजली ग्रिड के महत्वपूर्ण हिस्सों को निशाना बनाया गया है। इसके कारण सर्दियों के दौरान बिजली और हीटिंग व्यवस्था बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।

यूक्रेन जैसे देश में सर्दियों के दौरान तापमान काफी नीचे चला जाता है। ऐसे में बिजली संयंत्रों और हीटिंग सिस्टम को नुकसान पहुँचने का सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ सकता है। घरों में गर्मी की व्यवस्था, अस्पतालों का संचालन, जल आपूर्ति और सार्वजनिक परिवहन जैसी जरूरी सेवाएँ बिजली पर निर्भर करती हैं। यदि रूस के हमलों से ऊर्जा नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुँचता है,तो लाखों लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

जेलेंस्की ने आशंका जताई है कि रूस सर्दियों से पहले यूक्रेन की आवश्यक सेवाओं को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है। बिजली संयंत्रों के अलावा जल आपूर्ति नेटवर्क,पुलों और अन्य महत्वपूर्ण ढ़ाँचों पर हमले देश की सामान्य व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। इसीलिए यूक्रेन के लिए हवाई सुरक्षा मजबूत करना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सर्दियों के दौरान यूक्रेन की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए सहयोगी देशों से अतिरिक्त सहायता की माँग की है। उन्होंने प्रस्तावित सहायता व्यवस्था के तहत हर महीने औसतन 100 पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें उपलब्ध कराने की माँग रखी है। उनका मानना है कि रूस जिस स्तर पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, उसे देखते हुए यूक्रेन को बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर की जरूरत है।

पैट्रियट प्रणाली यूक्रेन की हवाई सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका इस्तेमाल दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों, विमानों और अन्य हवाई खतरों को रोकने के लिए किया जाता है। पीएसी-3 एमएसई इस प्रणाली के लिए विकसित आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइल है। इसकी मदद से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता मिलती है। रूस के हमलों में इस्तेमाल होने वाली मिसाइलों को रोकने के लिहाज से यूक्रेन के लिए यह हथियार काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जेलेंस्की का कहना है कि आने वाले समय में यूक्रेन को सैन्य मोर्चे के साथ-साथ कूटनीतिक स्तर पर भी अपनी स्थिति मजबूत रखनी होगी। इसके लिए देश के हवाई क्षेत्र, ऊर्जा संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि यूक्रेन अपने बुनियादी ढाँचे को सुरक्षित रखने में सफल रहता है,तो युद्ध के दौरान उसकी स्थिति को मजबूती मिल सकती है।

हथियारों की आपूर्ति में संभावित देरी को देखते हुए जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के सामने एक वैकल्पिक प्रस्ताव भी रखा है। उन्होंने सुझाव दिया है कि अमेरिका, यूरोप और अन्य सहयोगी देश अपने मौजूदा हथियार भंडार से पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें यूक्रेन को उपलब्ध कराएँ। इसके बाद नए उत्पादन के जरिए संबंधित देशों के हथियार भंडार की भरपाई की जा सकती है।

इस प्रस्ताव का उद्देश्य यूक्रेन को तत्काल सुरक्षा सहायता उपलब्ध कराना है। दरअसल, आधुनिक मिसाइलों का उत्पादन एक जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए विशेष तकनीक, उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होती है। ऐसे में बड़े पैमाने पर माँग बढ़ने पर उत्पादन और आपूर्ति में समय लग सकता है। जेलेंस्की चाहते हैं कि सहयोगी देश अपने पास उपलब्ध हथियारों का इस्तेमाल करके यूक्रेन की मौजूदा जरूरतों को पूरा करें।

उनका तर्क है कि यदि नए हथियारों के उत्पादन तक इंतजार किया गया,तो रूस को सर्दियों के दौरान यूक्रेन के ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमले करने का अतिरिक्त अवसर मिल सकता है। इसलिए तत्काल आपूर्ति और भविष्य में हथियारों के उत्पादन की प्रक्रिया को साथ-साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने यूक्रेन को लगभग 2.1 अरब डॉलर में 500 पैट्रियट पीएसी-3 एमएसई इंटरसेप्टर मिसाइलों की बिक्री को मंजूरी दी है। इस प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य यूक्रेन की हवाई रक्षा क्षमता को मजबूत करना और उसे मौजूदा तथा भविष्य के मिसाइल खतरों से निपटने में सहायता देना है।

इस सौदे में केवल अमेरिका ही नहीं,बल्कि कई अन्य सहयोगी देशों की भी भूमिका होगी। कनाडा,जर्मनी और नॉर्वे अमेरिकी जंपस्टार्ट कार्यक्रम के माध्यम से इस समझौते में योगदान करेंगे। इसके अलावा यूरोपीय संघ की एक क्रेडिट सुविधा से भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस व्यवस्था के जरिए यूक्रेन को आवश्यक सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक सहयोग जुटाया जाएगा।

अमेरिका की मंजूरी से यूक्रेन को भविष्य में बड़ी संख्या में आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइलें मिलने का रास्ता साफ हुआ है। हालाँकि,इसकी वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि मिसाइलों की आपूर्ति कब शुरू होती है और यूक्रेन को शुरुआती खेप में कितने हथियार मिल पाते हैं।

मौजूदा परिस्थितियों में यूक्रेन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे रूसी सेना के मिसाइल और ड्रोन हमलों का मुकाबला करना है,तो दूसरी तरफ सर्दियों के दौरान बिजली, पानी और हीटिंग जैसी बुनियादी सेवाओं को चालू रखना है। इन दोनों जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हवाई सुरक्षा और सैन्य संसाधनों की आवश्यकता होगी।

अमेरिका की ओर से 500 पैट्रियट मिसाइलों की बिक्री को मंजूरी मिलना यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण सैन्य सहायता है,लेकिन तत्काल आपूर्ति को लेकर जेलेंस्की की चिंता भी बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका और यूरोपीय सहयोगी देश यूक्रेन की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल कीव की प्राथमिकता सर्दियों से पहले अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत करना और रूस के हमलों से देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को बचाना है।