मुंबई,7 नवंबर (युआईटीवी)- देश के दूरसंचार क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और इंटरकनेक्शन से जुड़े समझौतों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के लिए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने शुक्रवार को ‘इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर (चौथा संशोधन) विनियमन, 2026’ जारी कर दिया। इसके तहत दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को अपने इंटरकनेक्ट समझौतों और उनमें होने वाले बदलावों का पंजीकरण एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कराना होगा। नए नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। इस बदलाव का उद्देश्य समझौतों के पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाना, रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी तक पहुँच को सुविधाजनक बनाना है। नए प्रावधान लागू होने के बाद टेलीकॉम कंपनियों को पुराने कागजी तरीकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही, समझौतों से संबंधित दस्तावेजों को खोजना और उनकी जाँच करना भी पहले की तुलना में आसान हो सकेगा।
दूरसंचार क्षेत्र में इंटरकनेक्शन एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसके तहत दो या दो से अधिक दूरसंचार नेटवर्क को तकनीकी और व्यावसायिक रूप से आपस में जोड़ा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य अलग-अलग कंपनियों के नेटवर्क के बीच कॉल और अन्य दूरसंचार ट्रैफिक का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है। इसी व्यवस्था की वजह से एक कंपनी का ग्राहक दूसरी कंपनी के ग्राहक से आसानी से संपर्क कर पाता है।
उदाहरण के तौर पर,यदि किसी व्यक्ति के पास एक टेलीकॉम कंपनी का मोबाइल कनेक्शन है और वह दूसरी कंपनी के नेटवर्क का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को फोन करता है,तो दोनों नेटवर्क के बीच इंटरकनेक्शन व्यवस्था काम करती है। इसके लिए संबंधित सेवा प्रदाताओं के बीच व्यावसायिक और तकनीकी समझौते किए जाते हैं।
इन समझौतों का रिकॉर्ड रखने के लिए वर्ष 1999 में इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर विनियमन लागू किया गया था। यह विनियमन सेवा प्रदाताओं के बीच हुए समझौतों के पंजीकरण और उनके रखरखाव के लिए नियामकीय ढाँचा उपलब्ध कराता है। अब ट्राई ने इसी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए चौथा संशोधन जारी किया है।
नए नियमों के तहत सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को अपने इंटरकनेक्ट समझौतों का पंजीकरण ट्राई की ओर से तैयार किए गए विशेष ऑनलाइन पोर्टल पर कराना होगा। इतना ही नहीं,पहले से पंजीकृत समझौतों में भविष्य में होने वाले किसी भी बदलाव की जानकारी भी इसी पोर्टल पर जमा करनी होगी।
इससे संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। कंपनियों को अलग-अलग माध्यमों से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से समझौतों की जानकारी को अपडेट रखना भी आसान होगा।
पहले कंपनियों को समझौतों की सॉफ्ट कॉपी फ्लॉपी डिस्क के माध्यम से जमा करनी पड़ती थी। इसके अलावा दस्तावेजों की प्रिंटेड कॉपी देना भी अनिवार्य था। लेकिन अब संशोधित नियमों के तहत इस पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। कंपनियाँ सीधे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जरूरी दस्तावेज जमा कर सकेंगी।
ट्राई ने नए नियमों के तहत समझौतों के पंजीकरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा भी निर्धारित की है। 1 जनवरी 2027 तक लागू सभी मौजूदा इंटरकनेक्ट समझौतों को इस तारीख से अगले 15 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करना होगा।
वहीं,1 जनवरी 2027 के बाद किए जाने वाले नए समझौतों को उनके लागू होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। यदि किसी पुराने समझौते में संशोधन किया जाता है,तो उस बदलाव का रिकॉर्ड भी संशोधन लागू होने के 15 दिनों के भीतर पोर्टल पर जमा करना होगा।
इस समय-सीमा का पालन करना सभी संबंधित सेवा प्रदाताओं के लिए जरूरी होगा। इससे समझौतों और उनमें किए गए बदलावों का रिकॉर्ड समय पर अपडेट होता रहेगा। साथ ही,पुराने और नए दस्तावेजों के बीच अंतर समझने तथा किसी विशेष समझौते की जानकारी प्राप्त करने में भी आसानी होगी।
संशोधित विनियमन में दस्तावेजों के डिजिटल प्रारूप को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। सभी दूरसंचार कंपनियों को अपने इंटरकनेक्ट समझौते और उनसे संबंधित दस्तावेज टेक्स्ट-सर्च करने योग्य पीडीएफ फॉर्मेट में जमा करने होंगे।
इसका मतलब है कि दस्तावेजों में मौजूद टेक्स्ट को डिजिटल माध्यम से खोजा और पढ़ा जा सकेगा। केवल तस्वीर के रूप में स्कैन किए गए दस्तावेज जमा करना पर्याप्त नहीं होगा,यदि उनमें टेक्स्ट सर्च करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
इस व्यवस्था से दस्तावेजों की जाँच,रिकॉर्ड की प्रोसेसिंग और जरूरी जानकारी खोजने का काम अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। किसी विशेष शर्त, प्रावधान या समझौते से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए पूरे दस्तावेज को मैन्युअल तरीके से खंगालने की जरूरत भी कम होगी।
ट्राई के नए संशोधन में आम जनता की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। अब इंटरकनेक्ट समझौतों के रजिस्टर के जरूरी हिस्सों तक मौजूदा भौतिक व्यवस्था के अलावा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी पहुँच बनाई जा सकेगी।
इसका फायदा उन लोगों को मिल सकता है,जो दूरसंचार कंपनियों के बीच हुए समझौतों से संबंधित जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। डिजिटल माध्यम से रिकॉर्ड देखने की सुविधा मिलने से लोगों को जानकारी हासिल करने के लिए केवल कागजी प्रक्रिया पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हालाँकि,यह सुविधा लागू नियमों और निर्धारित शर्तों के दायरे में ही उपलब्ध होगी।
नए विनियमन में रजिस्टर का निरीक्षण करने और दस्तावेजों की प्रतियाँ प्राप्त करने के लिए शुल्क भी निर्धारित किया गया है। इसके तहत रजिस्टर देखने के लिए 1,500 रुपये प्रति घंटे का शुल्क देना होगा। खास बात यह है कि यदि कोई व्यक्ति एक घंटे से कम समय तक भी रजिस्टर देखता है,तब भी उससे 1,500 रुपये ही लिए जाएँगे।
कुल मिलाकर,ट्राई का यह संशोधन दूरसंचार क्षेत्र में दस्तावेजों के प्रबंधन और इंटरकनेक्ट समझौतों के पंजीकरण की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाली इस व्यवस्था से टेलीकॉम कंपनियों के लिए रिकॉर्ड अपडेट रखना आसान होगा। साथ ही,समझौतों से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखने और जरूरत के अनुसार उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
