नई दिल्ली,7 नवंबर (युआईटीवी)- भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपने इस फैसले की जानकारी दी। शमी के इस ऐलान के साथ ही भारतीय क्रिकेट के एक यादगार टेस्ट सफर का अंत हो गया है। करीब 13 साल तक देश के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले शमी ने अपने करियर में कई ऐसी उपलब्धियाँ हासिल कीं, जिन्हें लंबे समय तक याद किया जाएगा। उन्होंने अपने संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि भारत की सफेद जर्सी पहनना उनके लिए हमेशा गर्व की बात रही है। शमी ने अपने संदेश में टीम के साथियों, कोच, परिवार, भारतीय क्रिकेट बोर्ड और प्रशंसकों का आभार जताया। हालाँकि,वह टेस्ट क्रिकेट से अलग हो रहे हैं,लेकिन उनके मुताबिक भारत के लिए खेलने का गर्व हमेशा उनके दिल में जिंदा रहेगा।
36 वर्षीय मोहम्मद शमी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने संन्यास की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि वह सफेद जर्सी जरूर छोड़ रहे हैं, लेकिन उससे जुड़ी यादें हमेशा उनके साथ रहेंगी। जब उन्होंने पहली बार भारतीय टेस्ट टीम की जर्सी पहनी थी,तब उनका एक ही सपना था कि वह अपने देश के लिए कुछ खास कर सकें।
शमी ने अपने संदेश में बताया कि टेस्ट क्रिकेट में बिताए गए हर पल ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया। विकेट हासिल करने से लेकर मैदान पर संघर्ष करने,चोटों से जूझने और फिर वापसी करने तक का उनका सफर कई अनुभवों से भरा रहा। उनके लिए टेस्ट क्रिकेट महज एक खेल का प्रारूप नहीं था,बल्कि जिंदगी का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
उन्होंने लिखा कि भारी मन और अनगिनत खूबसूरत यादों के साथ वह टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला कर रहे हैं। शमी ने अपने सभी साथियों, प्रशिक्षकों और परिवार के सदस्यों को धन्यवाद दिया। इसके साथ ही उन्होंने उन करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों का भी आभार जताया,जिन्होंने मुश्किल समय में भी उन पर भरोसा बनाए रखा।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के प्रति भी उन्होंने विशेष आभार व्यक्त किया। शमी के मुताबिक,इन संस्थाओं ने उनकी प्रतिभा पर विश्वास किया और उन्हें अपने क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी अवसर दिए। उन्होंने अपने संदेश के अंत में कहा कि भले ही मैदान पर उनकी आखिरी टेस्ट गेंद फेंकी जा चुकी हो, लेकिन भारत के लिए खेलने का गर्व हमेशा उनके साथ रहेगा।
मोहम्मद शमी ने नवंबर 2013 में भारतीय टेस्ट टीम के लिए पदार्पण किया था। दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने अपने शुरुआती मुकाबलों से ही अपनी गेंदबाजी का प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया था। उनकी सबसे बड़ी ताकत तेज गति के साथ गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग हासिल करने की क्षमता रही।
शमी ने अपने टेस्ट करियर में कुल 64 मुकाबले खेले और 27.71 की औसत से 229 विकेट अपने नाम किए। इस दौरान उन्होंने छह बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट हासिल करने का कारनामा किया। उनकी गेंदबाजी ने कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुँचाया।
शमी केवल गेंद से ही नहीं,बल्कि निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए भी टीम के लिए योगदान देते रहे। उन्होंने 64 टेस्ट मैचों में कुल 750 रन बनाए,जिसमें दो अर्धशतक शामिल हैं। कई मौकों पर उन्होंने निचले क्रम में उपयोगी पारियाँ खेलकर टीम के स्कोर को आगे बढ़ाया।
शमी के टेस्ट करियर के यादगार पलों में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल भी शामिल रहा। जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में उन्होंने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण का हिस्सा रहते हुए अपनी भूमिका निभाई थी। यही उनका आखिरी टेस्ट मुकाबला भी साबित हुआ।
शमी ने आखिरी बार जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट खेला था। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम में खेलने का अवसर नहीं मिला। हालाँकि, उन्होंने सीमित ओवरों के क्रिकेट में वापसी की और मार्च 2025 में आखिरी बार भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला खेला।
लंबे समय तक टीम से बाहर रहने और फिटनेस से जुड़ी चुनौतियों के बीच अब उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से अलग होने का फैसला किया है। उनके इस निर्णय के बाद भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बावजूद शमी के सीमित ओवरों के अंतर्राष्ट्रीय करियर के आंकड़े भी काफी प्रभावशाली रहे हैं। उन्होंने भारत के लिए अब तक 108 वनडे मुकाबले खेले हैं,जिनमें 206 विकेट हासिल किए हैं। वनडे क्रिकेट में वह भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाजों में शामिल रहे हैं।
इसके अलावा,शमी ने भारत की ओर से 25 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं और 27 विकेट अपने नाम किए हैं। बड़े टूर्नामेंट और महत्वपूर्ण मुकाबलों में उनकी गेंदबाजी ने कई बार टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकालने में मदद की है।
शमी की खासियत बड़े मुकाबलों में दबाव के बीच विकेट निकालने की क्षमता रही है। उनकी तेज गेंदें,सीम मूवमेंट और सटीक लाइन-लेंथ बल्लेबाजों के लिए चुनौती पैदा करती रही हैं। यही वजह है कि भारतीय टीम के गेंदबाजी आक्रमण में उनका योगदान लंबे समय तक महत्वपूर्ण बना रहा।
मोहम्मद शमी का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास भारतीय क्रिकेट के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है। 2013 में शुरू हुआ उनका सफर उतार-चढ़ाव, चोटों, संघर्ष और शानदार वापसी की कहानियों से भरा रहा। उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि मुश्किल परिस्थितियों में भी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर वापसी की जा सकती है।
अब शमी टेस्ट क्रिकेट की सफेद जर्सी में नजर नहीं आएँगे,लेकिन भारतीय क्रिकेट को दिए गए उनके योगदान को भुलाना आसान नहीं होगा। 64 टेस्ट मैचों में 229 विकेट का उनका रिकॉर्ड उनके लंबे और प्रभावशाली सफर की गवाही देता है। उनके संन्यास के ऐलान के बाद प्रशंसकों के बीच भावुकता स्वाभाविक है। हालाँकि,सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनके भविष्य को लेकर अब भी उम्मीदें बनी हुई हैं।
