दिल्ली में पीएम मोदी और जर्मन चांसलर के बीच बातचीत

दिल्ली में पीएम मोदी और जर्मन चांसलर के बीच बातचीत

नई दिल्ली, 25 फरवरी (युआईटीवी/आईएएनएस)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने शनिवार को बातचीत की। संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने कहा- भारत और जर्मनी के मजबूत संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और एक-दूसरे के हितों की गहरी समझ पर आधारित हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान का एक लंबा इतिहास भी है। यूरोप में सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार होने के साथ-साथ जर्मनी भारत में निवेश का महत्वपूर्ण स्रोत भी है।

मोदी ने कहा कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के कारण भारत में सभी क्षेत्रों में नए अवसर खुल रहे हैं। जर्मन चांसलर के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद उन्होंने कहा, इन अवसरों में जर्मनी द्वारा दिखाई गई रुचि हमारे लिए बहुत उत्साहजनक है।

प्रधान मंत्री ने आगे कहा: चांसलर स्कोल्ज के साथ आज आए व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल और भारतीय व्यापार जगत के नेताओं की सफल बैठक हुई, और कुछ अच्छे और महत्वपूर्ण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। हमें डिजिटल परिवर्तन, फिनटेक, आईटी, टेलीकॉम और आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण जैसे विषयों पर दोनों देशों के उद्योगपतियों के उपयोगी विचार और सुझाव भी सुनने को मिले।

प्रधानमंत्री ने कहा- यूक्रेन पर भारत ने इस विवाद को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से हल करने पर जोर दिया है। भारत किसी भी शांति प्रक्रिया में योगदान देने के लिए तैयार है। हम इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर तरीके से दशार्ने के लिए बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार आवश्यक है। यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए जी4 के भीतर हमारी सक्रिय भागीदारी से स्पष्ट है।

इस बीच, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने कहा: भारत ने बहुत बड़ा उत्थान किया है और यह दोनों देशों के बीच संबंधों के लिए बहुत अच्छा है। रूस की आक्रामकता के परिणामों के कारण दुनिया पीड़ित है। पिछली बार जब मैंने भारत का दौरा किया था तब से बहुत कुछ बदल गया है। भारत वास्तव में विकास कर रहा है। मेरे और पीएम मोदी के विचार समान हैं। हम सहयोगी रहे हैं; हम मामलों पर चर्चा करते रहे हैं। मुझे खुशी है कि इस वर्ष भारत के पास जी20 की अध्यक्षता है।

जर्मन चांसलर ने रूस-यूक्रेन युद्ध को एक बड़ी तबाही बताया जिसने आर्थिक सिद्धांतों का उल्लंघन किया। जर्मन चांसलर ने कहा, लगभग 1,800 जर्मन कंपनियां भारत में सक्रिय हैं और हजारों नौकरियां दी हैं।

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