अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

अफगानिस्तान का दावा: पाकिस्तान में आईएसआईएस ठिकानों पर किए हवाई हमले,सीमा पर बढ़ा तनाव

काबुल,1 जुलाई (युआईटीवी)- अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को दावा किया कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित कथित आईएसआईएस (दाएश) से जुड़े कई ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। मंत्रालय के अनुसार,इन ठिकानों का इस्तेमाल अफगानिस्तान के भीतर आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें संचालित करने के लिए किया जा रहा था। अफगान सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा और आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई।

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मंगलवार रात किए गए इन अभियानों में पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में मौजूद उन ठिकानों को निशाना बनाया गया,जहाँ कथित तौर पर दाएश से जुड़े तत्व सक्रिय थे। मंत्रालय के अनुसार, इन स्थानों से अफगानिस्तान के नागरिकों और सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों की योजना बनाई जा रही थी। बयान में कहा गया कि अफगान वायुसेना ने पूरी तैयारी और सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर इन अभियानों को अंजाम दिया।

अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बलूचिस्तान के पिशिन जिले के सरानन क्षेत्र में स्थित एक संयुक्त दाएश केंद्र इस अभियान का प्रमुख लक्ष्य था। मंत्रालय का दावा है कि यह केंद्र अफगानिस्तान के विभिन्न हिस्सों में बम धमाकों,आतंकी हमलों और अन्य हिंसक गतिविधियों के संचालन तथा समन्वय का मुख्य अड्डा था। बयान में कहा गया कि इस ठिकाने को पूरी तरह निशाना बनाया गया और वहाँ मौजूद आतंकवादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचाया गया।

इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा के कंबर खेल क्षेत्र में स्थित एक अन्य कथित दाएश केंद्र पर भी हवाई हमला किए जाने का दावा किया गया है। मंत्रालय के अनुसार,इस ठिकाने का इस्तेमाल भी अफगानिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। वहीं चित्राल जिले की शाह सलीम घाटी के गरम चश्मा क्षेत्र में मौजूद एक अन्य संयुक्त दाएश ठिकाने और उससे जुड़े तत्वों को भी निशाना बनाया गया। अफगानिस्तान का कहना है कि इन सभी ठिकानों से नागरिकों पर हमलों और अन्य विध्वंसक गतिविधियों की योजना बनाई जा रही थी।

रक्षा मंत्रालय ने प्रारंभिक आकलन का हवाला देते हुए दावा किया कि इन हमलों में दाएश और उससे जुड़े कई तत्वों को भारी जनहानि हुई है। मंत्रालय का यह भी कहना है कि आतंकवादी ढांचे को व्यापक आर्थिक और सैन्य नुकसान पहुँचा है। हालाँकि,मंत्रालय ने मृतकों या घायलों की कोई सटीक संख्या जारी नहीं की। साथ ही यह भी दावा किया गया कि पूरे अभियान के दौरान केवल निर्धारित सैन्य लक्ष्यों को ही निशाना बनाया गया और किसी भी नागरिक के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली है।

अफगानिस्तान ने इस कार्रवाई के साथ एक कड़ा संदेश भी दिया है। रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यदि भविष्य में भी अफगानिस्तान की सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने के लिए किसी भी स्थान का उपयोग किया जाता है,तो ऐसे ठिकानों के खिलाफ इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश अपनी सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।

दूसरी ओर पाकिस्तान ने इन दावों पर अलग रुख अपनाया है। पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार रात सीमा क्षेत्र में ड्रोन गतिविधियों की पुष्टि करते हुए कहा कि अफगानिस्तान की दिशा से बलूचिस्तान में चार साधारण ड्रोन भेजे गए थे। सेना के जनसंपर्क विभाग ने दावा किया कि पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली ने समय रहते इन ड्रोन की पहचान कर उन्हें मार गिराया। पाकिस्तान के अनुसार,ये ड्रोन किसी बड़े अभियान का हिस्सा थे, जिन्हें सीमा पार से संचालित किया गया।

पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि अफगानिस्तान में मौजूद तालिबान शासन उन आतंकी संगठनों को संरक्षण और समर्थन दे रहा है,जो अफगानिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों से पाकिस्तान के खिलाफ गतिविधियाँ संचालित करते हैं। पाकिस्तान का कहना है कि सीमा पार से होने वाली ऐसी गतिविधियाँ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।

इसी बीच मंगलवार देर रात पेशावर के बाहरी इलाके से भी एक संदिग्ध ड्रोन हमले की सूचना सामने आई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,इस घटना में एक महिला की मौत हो गई,जबकि एक ही परिवार के छह अन्य सदस्य घायल हो गए। हालाँकि,इस घटना के पीछे किसका हाथ था,इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियाँ पूरे मामले की जाँच कर रही हैं।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता यह तनाव ऐसे समय सामने आया है,जब कुछ दिन पहले पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के पक्तिया,पक्तिका और कुनार प्रांतों में हवाई हमले किए जाने के आरोप लगे थे। अफगानिस्तान का दावा है कि उन हमलों में 36 नागरिकों की मौत हुई थी,जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा 163 अन्य लोगों के घायल होने की भी बात कही गई थी। इन दावों ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास को और गहरा कर दिया है।

इन घटनाओं के बाद अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने काबुल स्थित पाकिस्तान दूतावास के प्रभारी को तलब किया था। मंत्रालय ने पाकिस्तान की ओर से अफगान हवाई क्षेत्र के कथित उल्लंघन और कुनार,पक्तिया तथा पक्तिका प्रांतों में नागरिक आबादी पर बमबारी को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। अफगानिस्तान ने कहा कि नागरिक क्षेत्रों पर इस प्रकार के हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।

अफगान विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में इन हमलों को अंतर्राष्ट्रीय कानून, अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून और किसी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन बताया। मंत्रालय ने कहा कि किसी भी देश को दूसरे देश की सीमा और उसकी संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। साथ ही इस प्रकार की सैन्य कार्रवाइयों से क्षेत्र में शांति और स्थिरता पर गंभीर असर पड़ता है।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से सीमा सुरक्षा,आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर अपने-अपने क्षेत्र का उपयोग आतंकवादी संगठनों द्वारा किए जाने के आरोप लगाते रहे हैं। कई बार सीमा पर गोलीबारी,हवाई कार्रवाई और ड्रोन गतिविधियों के कारण दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करती हैं,बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर डालती हैं।

हालिया घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि सीमा पार सुरक्षा चुनौतियाँ अब भी दोनों देशों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई हैं। अफगानिस्तान का दावा है कि उसने केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया,जबकि पाकिस्तान अपनी सीमा सुरक्षा और हवाई रक्षा प्रणाली को लेकर सतर्कता बढ़ा रहा है। दोनों देशों के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है और फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की सैन्य कार्रवाइयों और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहता है,तो इससे पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति पर असर पड़ सकता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संवाद और कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में दोनों देश इस तनाव को कम करने के लिए कौन से कदम उठाते हैं और क्या सीमा पर स्थिति सामान्य हो पाती है।