कोहिमा,2 सितंबर (युआईटीवी)- नागालैंड सरकार ने पूर्वी नागालैंड के विकास, प्रशासन और क्षेत्रीय स्वायत्तता से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार को संशोधित फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी यानी एफएनटीए विधेयक,2026 विधानसभा में पेश किया। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पूर्वी नागालैंड के छह जिलों को शामिल करते हुए एक क्षेत्रीय अथॉरिटी के गठन का प्रावधान किया गया है। इस अथॉरिटी को 46 विषयों पर विधायी,कार्यकारी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां देने का प्रस्ताव है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से क्षेत्र में प्रशासनिक पहुँच बढ़ेगी, विकास योजनाओं को गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी।
संशोधित विधेयक उप मुख्यमंत्री वाई. पैटन ने 14वीं नागालैंड विधानसभा के चल रहे नौवें सत्र के दौरान पेश किया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पूर्वी नागालैंड को अधिक प्रशासनिक और विकासात्मक अधिकार देने की माँग लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है। इससे पहले 26 मार्च को बजट सत्र के दौरान विधानसभा ने एफएनटीए से संबंधित एक विधेयक पारित किया था। हालाँकि,बाद में उस विधेयक को वापस लेने का फैसला किया गया। विधानसभा अध्यक्ष शेरिंगेन लोंगकुमर द्वारा सदन के सामने प्रस्ताव रखे जाने के बाद ध्वनि मत से पुराने विधेयक को वापस ले लिया गया। अब संशोधित विधेयक पर 3 सितंबर को विचार और मतदान किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से कहा है कि यदि उन्हें विधेयक में किसी तरह का संशोधन या स्पष्टीकरण चाहिए तो वे बुधवार दोपहर दो बजे तक अपने सुझाव जमा कर दें।
प्रस्तावित फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी में तुएनसांग, मोन, लोंगलेंग, किफायर, नोकलाक और शमाटोर जिलों को शामिल किया जाएगा। यह व्यवस्था केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपल्स ऑर्गनाइजेशन यानी ईएनपीओ के बीच 5 फरवरी, 2026 को हुए समझौता ज्ञापन पर आधारित है। पूर्वी नागालैंड के लोगों की लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और विकास संबंधी मांगों को ध्यान में रखते हुए इस समझौते को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक आधार माना जा रहा है। संशोधित विधेयक में इसी समझौते की शर्तों को संस्थागत स्वरूप देने की कोशिश की गई है।
एफएनटीए की प्रस्तावित संरचना में कुल 62 सदस्यों का प्रावधान किया गया है। इनमें 40 सदस्य एकल-सदस्यीय क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुने जाएँगे। प्रस्ताव में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित रखने की बात कही गई है। इसके अतिरिक्त दो सदस्यों को राज्यपाल द्वारा नामित किया जाएगा। ये नामांकन उन मान्यता प्राप्त जनजातियों में से किए जा सकेंगे जिनका अथॉरिटी में प्रतिनिधित्व नहीं है या जिनका प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं माना जाता। इसके अलावा फ्रंटियर नागालैंड क्षेत्र के निर्वाचन क्षेत्रों से चुने गए नागालैंड विधानसभा के 20 विधायक अथॉरिटी के पदेन सदस्य होंगे,हालाँकि,उन्हें मतदान का अधिकार नहीं दिया जाएगा।
प्रस्तावित अथॉरिटी का कार्यकाल पाँच साल का होगा। इसके कामकाज के लिए नौ सदस्यों तक की एक कार्यकारी परिषद गठित की जाएगी। परिषद का नेतृत्व चीफ एग्जीक्यूटिव मेंबर यानी सीईएम करेगा। इसके साथ एक डिप्टी सीईएम और अन्य सदस्य होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य क्षेत्रीय अथॉरिटी को एक ऐसा कार्यकारी ढांचा उपलब्ध कराना है,जिसके माध्यम से उसे सौंपे गए विषयों पर प्रशासनिक और विकासात्मक फैसले लिए जा सकें।
चुनी हुई अथॉरिटी के अस्तित्व में आने से पहले सरकार अंतरिम परिषद भी गठित कर सकेगी। इस परिषद में अधिकतम 13 सदस्य हो सकते हैं। अंतरिम परिषद के गठन के लिए ईएनपीओ की ओर से जनजातीय परिषदों से परामर्श के बाद सिफारिश किए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा क्षेत्र के चार निर्वाचित प्रतिनिधियों को सलाहकार के रूप में नामित किया जा सकता है। इससे संक्रमणकालीन अवधि में प्रशासनिक व्यवस्था को आगे बढ़ाने और स्थानीय प्रतिनिधित्व बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एफएनटीए को जिन 46 विषयों पर अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव है,उनमें क्षेत्र के दैनिक प्रशासन और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। कृषि,आदिवासी कला एवं संस्कृति, सिंचाई, मत्स्य पालन, बागवानी, पशुपालन, जल संसाधन और बांस विकास जैसे विषय क्षेत्र की ग्रामीण और पारंपरिक अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़े हैं। इसके साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च माध्यमिक स्तर तक स्कूली शिक्षा, श्रम एवं रोजगार, सामाजिक कल्याण और आदिवासी मामलों से जुड़े विषय भी अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में होंगे।
भूमि रिकॉर्ड और राजस्व, ग्रामीण विकास, सार्वजनिक परिवहन, जिला सड़कें, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, आवास, व्यापार एवं वाणिज्य जैसे विषयों को भी प्रस्तावित सूची में शामिल किया गया है। इसके अलावा विलेज गार्ड, हथकरघा और हस्तशिल्प, सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, बाजार एवं मेले, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएँ तथा पारंपरिक ग्राम अदालतों से जुड़े विषय भी एफएनटीए को सौंपे जाने का प्रस्ताव है। इसका व्यापक उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर विकास और प्रशासन से जुड़े फैसलों को स्थानीय संस्थागत ढाँचे के करीब लाना है।
हालाँकि, संशोधित विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी महत्वपूर्ण अधिकार एफएनटीए को नहीं सौंपे जाएँगे। कुछ विषय राज्य सरकार के नियंत्रण में ही रहेंगे। भू-विज्ञान और खनन को पूरी तरह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है। इसी तरह ऐसे पर्यटन प्रोजेक्ट जिनका महत्व या संभावना पूरे राज्य स्तर की हो सकती है,वे भी राज्य सरकार के अधीन रहेंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी एफएनटीए के अधिकारों को शुरुआत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक सीमित रखने का प्रस्ताव है। इस व्यवस्था के प्रभाव का आकलन किए जाने के बाद ही उच्च स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों से संबंधित अतिरिक्त अधिकारों पर विचार किया जाएगा।
विधेयक के तहत एफएनटीए को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले विषयों पर कानून बनाने की शक्ति भी होगी। हालाँकि,ऐसे कानूनों को लागू किए जाने से पहले राज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होगी। साथ ही नागालैंड में पहले से लागू राज्य कानूनों की वैधता बनी रहेगी। यदि एफएनटीए द्वारा बनाए गए कानून और राज्य सरकार के मौजूदा कानून के बीच किसी प्रकार का टकराव होता है तो राज्य का कानून प्रभावी रहेगा। इस प्रावधान से यह स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित क्षेत्रीय स्वायत्तता राज्य की संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था के भीतर ही काम करेगी।
प्रशासनिक ढाँचे में भी राज्य सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। एफएनटीए के मुख्य कार्यकारी सचिव यानी सीईएस के पद पर एक भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। अधिकारी का पद अतिरिक्त मुख्य सचिव के स्तर का होना वांछित है और वह प्रधान सचिव के स्तर से नीचे का नहीं होगा। सीईएस के अधीन एक समर्पित सचिवालय काम करेगा,जो अथॉरिटी के प्रशासनिक कामकाज को संचालित करने में सहायता करेगा।
एफएनटीए में तैनात अधिकारी अपने संबंधित राज्य कैडर के सदस्य बने रहेंगे। वे राज्य की सेवा नियमावली,अनुशासनात्मक नियंत्रण और स्थानांतरण नीतियों के अधीन काम करेंगे। इससे क्षेत्रीय अथॉरिटी के प्रशासन में अधिकारियों की तैनाती के बावजूद राज्य सरकार का प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। प्रस्तावित मॉडल में क्षेत्रीय जरूरतों और राज्य प्रशासन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
वित्तीय अधिकारों को भी प्रस्तावित व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। एफएनटीए को प्रशासनिक और विकासात्मक गतिविधियों के लिए हर वर्ष बजटीय आवंटन दिया जाएगा। पूर्वी नागालैंड के विकास पर खर्च होने वाली राशि सामान्य खर्चों को अलग करने के बाद जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुपात के आधार पर वितरित की जाएगी। इससे क्षेत्र के विभिन्न जिलों के बीच विकास निधि के अपेक्षाकृत संतुलित वितरण की व्यवस्था बनाई जा सकेगी।
राज्य के बजट में एफएनटीए के लिए अलग मुख्य उप-शीर्ष रखने का प्रस्ताव है। विकास कार्यों के लिए अथॉरिटी को दिए गए धन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी द्वारा ऑडिट किया जाएगा। ऑडिट रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट नागालैंड विधानसभा के सामने रखी जाएगी। इस व्यवस्था के जरिए एफएनटीए के वित्तीय प्रबंधन में जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की गई है।
पुलिस प्रशासन के मामले में भी राज्य सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका बरकरार रहेगी। एफएनटीए मुख्यालय से पूरे फ्रंटियर नागालैंड क्षेत्र में पुलिस प्रशासन की निगरानी के लिए पुलिस महानिरीक्षक स्तर का एक भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी तैनात किया जाएगा। इसके साथ सीमा प्रशासन को मजबूत करने और विलेज गार्ड व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उपायों का भी प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 371(ए), बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन,1873 और पंचायती राज से संबंधित मौजूदा छूटों में कोई बदलाव या कटौती नहीं की जाएगी। यानी प्रस्तावित एफएनटीए व्यवस्था के बावजूद नागालैंड को प्राप्त विशेष संवैधानिक और कानूनी संरक्षण पहले की तरह लागू रहेगा। यह प्रावधान स्थानीय परंपराओं,भूमि और संसाधनों से जुड़े अधिकारों तथा मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था की निरंतरता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
पूर्वी नागालैंड के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से विशेष विकास अनुदान दिए जाने की भी संभावना रखी गई है। प्रस्ताव के अनुसार एफएनटीए राज्य सरकार के साथ मिलकर ऐसे विकास प्रोजेक्ट की पहचान करेगा,जिन्हें विशेष सहायता के तहत आगे बढ़ाया जा सके। इनमें नागालैंड विश्वविद्यालय का एक और परिसर स्थापित करना,मोन मेडिकल कॉलेज को क्षेत्रीय संस्थान के रूप में उन्नत करना, शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों का विकास,चार लेन वाली अंतर-जिला सड़कों का निर्माण और ईस्टर्न फ्रंटियर रेलवे जैसी परियोजनाएँ शामिल हैं।
इसके अलावा एक हवाई अड्डे या एयरस्ट्रिप का निर्माण, ट्रांस-ईस्टर्न फ्रंटियर हाईवे और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र जैसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट भी प्रस्तावित किए गए हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल परिवहन सुविधाओं में सुधार करना नहीं है, बल्कि पूर्वी नागालैंड को राज्य और देश के अन्य हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ना भी है। बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क से व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
समझौता ज्ञापन के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक संयुक्त निगरानी समिति भी बनाई जाएगी। इसमें गृह मंत्रालय, नागालैंड सरकार, एफएनटीए और ईएनपीओ के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति समय-समय पर 5 फरवरी को हुए समझौते के प्रावधानों के कार्यान्वयन की समीक्षा करेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समझौते में तय किए गए लक्ष्यों और प्रस्तावित संस्थागत ढाँचे को निर्धारित दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
विधेयक में विशेष परिस्थितियों में एफएनटीए को निलंबित या भंग करने का अधिकार भी राज्यपाल को देने का प्रस्ताव है। हालाँकि,यह कदम राज्य सरकार की सिफारिश पर ही उठाया जा सकेगा। ऐसी स्थिति में अधिकतम छह महीने के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है। इस प्रावधान को असाधारण परिस्थितियों में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रस्तावित अथॉरिटी के कामकाज और प्रभावशीलता की दस साल बाद समीक्षा भी की जाएगी। समीक्षा का उद्देश्य यह आकलन करना होगा कि एफएनटीए फ्रंटियर नागालैंड क्षेत्र के लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने में कितना सफल रहा। इस दौरान प्रशासनिक शक्तियों,वित्तीय व्यवस्था,विकास परियोजनाओं और स्थानीय प्रतिनिधित्व के प्रभाव का मूल्यांकन किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर व्यवस्था में बदलाव या सुधार के लिए भी इस समीक्षा का उपयोग किया जा सकता है।
संशोधित एफएनटीए विधेयक को पूर्वी नागालैंड के लिए राजनीतिक समझौते को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक ओर इसमें क्षेत्र को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास, पर्यटन, परिवहन और सामाजिक कल्याण जैसे कई विषयों पर व्यापक अधिकार देने का प्रस्ताव है, वहीं दूसरी ओर कानून, पुलिस, खनन, राज्य स्तरीय परियोजनाओं और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नागालैंड सरकार की भूमिका बनाए रखी गई है।
अब सभी की नजरें 3 सितंबर को होने वाली विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं,जब संशोधित विधेयक पर विस्तार से विचार किया जाएगा और उसे पारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सदस्यों को संशोधन और स्पष्टीकरण के सुझाव देने का अवसर दिया गया है। ऐसे में आने वाले समय में विधेयक के प्रावधानों पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है,तो पूर्वी नागालैंड के छह जिलों में प्रशासनिक और विकासात्मक निर्णय लेने के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। साथ ही यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि एफएनटीए को मिली शक्तियों और राज्य सरकार के अधिकारों के बीच व्यावहारिक समन्वय किस तरह स्थापित होता है। यही समन्वय इस नई क्षेत्रीय व्यवस्था की सफलता का सबसे अहम आधार साबित हो सकता है।
