अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

अमेरिकी नौकरियाँ विदेश भेजने वाली कंपनियों पर भारी टैरिफ की चेतावनी,जेडी वेंस बोले- घरेलू उत्पादन बढ़ाने वालों को मिलेगा टैक्स में लाभ

वॉशिंगटन,10 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका में घरेलू रोजगार और विनिर्माण को बढ़ावा देने के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चेतावनी दी है कि जो कंपनियां देश में उपलब्ध नौकरियों को विदेशों में स्थानांतरित करेंगी या अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कानूनी अप्रवासियों को नियुक्त करने का प्रयास करेंगी,उन्हें भारी आयात शुल्क यानी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन उन कंपनियों को प्रोत्साहित करना चाहता है,जो अमेरिका में उत्पादन करती हैं और वहाँ के नागरिकों को रोजगार देती हैं। इसके विपरीत,देश से बाहर कारखाने और नौकरियाँ ले जाने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं।

वेंस ने यह बात ओहायो के लीमा शहर में रिपब्लिकन पार्टी की एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कही। उनका भाषण आगामी मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर अमेरिकी रोजगार,औद्योगिक विकास और आव्रजन जैसे मुद्दों पर केंद्रित था। उन्होंने कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियों का उद्देश्य कंपनियों को अमेरिका में निवेश करने, उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रेरित करना है।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि अमेरिका में उत्पादन करने वाली और अमेरिकी नागरिकों को नौकरी देने वाली कंपनियों को करों में राहत तथा कारोबार विस्तार के लिए प्रोत्साहन दिया जा सकता है। वहीं,यदि कोई कंपनी अपना उत्पादन किसी दूसरे देश में स्थानांतरित करती है या अमेरिकी कर्मचारियों की जगह दूसरे श्रमिकों को नियुक्त करने का फैसला करती है,तो उसे आर्थिक दंड के रूप में टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।

वेंस ने कहा कि यदि कोई कंपनी अमेरिका में सामान बनाती है और अमेरिकी नागरिकों को रोजगार देती है,तो सरकार उसे टैक्स में बड़ी राहत देने और कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगी,लेकिन अगर वही कंपनी अमेरिकी नौकरियों को विदेश भेजती है,अपना कारखाना किसी दूसरे देश में स्थानांतरित करती है या अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कानूनी अप्रवासियों को नियुक्त करती है,तो उसे भारी टैरिफ के लिए तैयार रहना चाहिए।

हालांकि, वेंस ने इस प्रस्तावित सख्ती को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कानूनी अप्रवासियों को रोजगार देने वाली कंपनियों पर टैरिफ किस कानूनी आधार पर लगाया जाएगा, इसके लिए कौन-से मानदंड निर्धारित होंगे या ऐसी नीति कब लागू की जा सकती है। इसलिए उनकी टिप्पणी को फिलहाल प्रशासन की मंशा और राजनीतिक रुख के संकेत के रूप में देखा जा रहा है,न कि किसी घोषित नई टैरिफ व्यवस्था के पूर्ण विवरण के रूप में।

वेंस के बयान में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उन्होंने केवल विदेशों में उत्पादन स्थानांतरित करने वाली कंपनियों की आलोचना नहीं की,बल्कि कानूनी अप्रवासियों को नौकरी देने के मुद्दे को भी इससे जोड़ा। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन रोजगार नीति को अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देने के व्यापक दृष्टिकोण से देख रहा है।

अमेरिकी कंपनियाँ लागत कम करने,उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कारोबार के विस्तार के लिए अलग-अलग देशों में कारखाने स्थापित करती रही हैं। कई उद्योगों में वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के कारण उत्पादन का बड़ा हिस्सा अमेरिका से बाहर चला गया है। इससे कुछ क्षेत्रों में वस्तुओं की लागत कम हुई,लेकिन विनिर्माण से जुड़े कई अमेरिकी समुदायों में रोजगार के अवसरों को लेकर चिंताएँ भी बढ़ीं।

वेंस ने इसी पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ऐसी आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहती है,जिसमें अमेरिकी कंपनियां देश के भीतर निवेश करने को प्राथमिकता दें। उनके अनुसार,कर में राहत और टैरिफ जैसे उपायों के जरिए कारोबारियों के फैसलों को प्रभावित किया जा सकता है,ताकि अमेरिका में कारखाने स्थापित करना और स्थानीय कर्मचारियों को नौकरी देना कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बने।

हालाँकि,ऐसी नीतियों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें किस तरह लागू किया जाता है। टैरिफ से विदेशी वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है,जबकि टैक्स में राहत कंपनियों के निवेश को प्रोत्साहित कर सकती है। दूसरी ओर,यदि कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ती है,तो उसका असर वस्तुओं की कीमतों और उपभोक्ताओं के खर्च पर भी पड़ सकता है।

अपने भाषण में वेंस ने ओहायो के मिडलटाउन शहर का जिक्र किया,जहाँ उन्होंने अपना बचपन बिताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने आसपास औद्योगिक इकाइयों को बंद होते और परिवारों को रोजगार खोने के बाद आर्थिक परेशानियों से जूझते देखा है। उनके मुताबिक,कारखानों के बंद होने का असर केवल नौकरी गंवाने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता,बल्कि पूरे परिवार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

वेंस ने कहा कि जब परिवार में माँ या पिता अपनी नौकरी खो देते हैं, तो उसका असर घर के आर्थिक हालात,बच्चों की जरूरतों और भविष्य की योजनाओं पर पड़ता है। उन्होंने इस अनुभव को अपने रोजगार संबंधी विचारों से जोड़ते हुए कहा कि सरकारी नीतियों का लक्ष्य अमेरिकी परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देना होना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन उन कंपनियों को बढ़ावा देना चाहता है,जो अमेरिका में उत्पादन करती हैं और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करती हैं। वेंस के अनुसार,अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए उद्योगों को देश के भीतर निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों के कारण अमेरिका में खरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएँ हुई हैं और विनिर्माण क्षेत्र में नई नौकरियाँ पैदा करने की संभावनाएँ बढ़ी हैं। उन्होंने इन दावों के समर्थन में विभिन्न उद्योगों में प्रस्तावित निवेश परियोजनाओं का उल्लेख किया।

वेंस ने ओहायो में ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस और दवा निर्माण से संबंधित निवेश योजनाओं को अमेरिकी विनिर्माण को मजबूत करने के उदाहरण के रूप में पेश किया। उन्होंने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में स्टेलांटिस की ओर से 40 करोड़ डॉलर के निवेश का उल्लेख किया। इसके अलावा,एयरोस्पेस उद्योग में 85 करोड़ डॉलर और दवा निर्माण क्षेत्र में 2.2 अरब डॉलर के प्रस्तावित निवेश का भी जिक्र किया।

उनका कहना था कि इन क्षेत्रों में निवेश से अमेरिका के भीतर उत्पादन गतिविधियों को गति मिल सकती है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। ऑटोमोबाइल उद्योग में निवेश से वाहन निर्माण और उससे जुड़े कलपुर्जों के कारोबार को लाभ मिलने की संभावना होती है। इसी तरह,एयरोस्पेस और दवा उद्योग में नई उत्पादन क्षमता विकसित होने से तकनीकी और विनिर्माण संबंधी नौकरियों की मांग बढ़ सकती है।

हालाँकि,निवेश की घोषणाओं और वास्तविक रोजगार सृजन के बीच अंतर होता है। किसी परियोजना से कितनी नौकरियाँ पैदा होंगी,यह उसके निर्माण कार्य, उत्पादन शुरू होने की समयसीमा,तकनीकी जरूरतों और कारोबार की भविष्य की योजनाओं पर निर्भर करता है। इसलिए इन निवेशों का पूरा आर्थिक प्रभाव उनके क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

वेंस ने इन परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता ऐसी औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है,जिनसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के भीतर उत्पादन और रोजगार दोनों को समर्थन मिले। उनके मुताबिक,देश में कारखानों का विस्तार होने से स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ मिल सकता है और लंबे समय से चली आ रही औद्योगिक गिरावट को पलटने में मदद मिल सकती है।

रैली के दौरान वेंस ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन की आव्रजन और रोजगार नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्रशासन के कार्यकाल में अवैध आव्रजन को बढ़ावा मिला,जिससे अमेरिकी कर्मचारियों की मजदूरी और रोजगार के अवसर प्रभावित हुए। वेंस ने इस मुद्दे को रिपब्लिकन पार्टी के उस व्यापक राजनीतिक रुख से जोड़ा,जिसमें सीमा सुरक्षा,आव्रजन पर नियंत्रण और अमेरिकी नागरिकों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है।

हालाँकि,मजदूरी और रोजगार पर आव्रजन के प्रभाव को लेकर अर्थशास्त्रियों के बीच अलग-अलग आकलन रहे हैं। इसका असर उद्योग,क्षेत्र, कौशल और श्रम बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है। वेंस ने अपने भाषण में आव्रजन को लेकर प्रशासन की आलोचनात्मक सोच को दोहराया,लेकिन उन्होंने कानूनी अप्रवासियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों पर प्रस्तावित टैरिफ के क्रियान्वयन से संबंधित कोई विस्तृत योजना पेश नहीं की।

उनकी टिप्पणियाँ ऐसे समय आई हैं,जब अमेरिका में घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना और विदेशी उत्पादन पर निर्भरता कम करना आर्थिक बहस के प्रमुख विषय बने हुए हैं। टैरिफ के जरिए घरेलू उद्योगों को सुरक्षा देने की नीति का समर्थन करने वालों का मानना है कि इससे कंपनियाँ देश में निवेश करने के लिए प्रेरित हो सकती हैं। वहीं,इसके प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि व्यापारिक साझेदार किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और कंपनियाँ बढ़ी हुई लागत का सामना कैसे करती हैं।

वेंस का यह भाषण रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित चुनावी कार्यक्रम का हिस्सा था। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी उद्योगों को मजबूत करने,रोजगार बचाने और आव्रजन नीति में बदलाव जैसे विषयों को प्रमुखता दी। रैली में ओहायो के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ रहे भारतीय मूल के उद्यमी विवेक रामास्वामी और सीनेटर जॉन हस्टेड भी शामिल थे।

चुनावी राजनीति में रोजगार और विनिर्माण का मुद्दा विशेष महत्व रखता है,क्योंकि इसका सीधा संबंध परिवारों की आय,स्थानीय कारोबार और औद्योगिक क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति से है। वेंस ने अपने भाषण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी नागरिकों के रोजगार की रक्षा करने और देश के भीतर औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

फिलहाल,कंपनियों पर भारी टैरिफ लगाने संबंधी वेंस की चेतावनी के साथ कोई विस्तृत नई नीति घोषित नहीं की गई है। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि कानूनी अप्रवासियों को नौकरी देने और विदेशों में उत्पादन स्थानांतरित करने के मामलों में अलग-अलग परिस्थितियों का आकलन कैसे किया जाएगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन अपने इस रुख को किसी औपचारिक नीति में बदलता है या नहीं।

वेंस के बयान से इतना स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी रोजगार और घरेलू उत्पादन को अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दे रहा है। सरकार का घोषित उद्देश्य कंपनियों को अमेरिका में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है,जबकि विदेशों में नौकरियां स्थानांतरित करने वाली कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की संभावना भी जताई जा रही है। इस नीति का वास्तविक असर उसके नियमों,लागू करने के तरीके और अमेरिकी उद्योगों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।