यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की,अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@Pawankumar_1305)

रूस-अमेरिका के डीजल समझौते पर भड़के जेलेंस्की,बोले- पुतिन को मिलेगी युद्ध जारी रखने की ताकत

कीव,10 अक्टूबर (युआईटीवी)- रूस और अमेरिका के बीच डीजल आपूर्ति को लेकर हुए समझौते ने यूक्रेन की चिंता बढ़ा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस व्यवस्था की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि इससे रूस को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को आगे बढ़ाने के लिए कर सकता है। जेलेंस्की के मुताबिक,रूस को पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से कमाई करने का अवसर देना शांति स्थापित करने की दिशा में सही कदम नहीं है। इससे मॉस्को की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और उसकी सैन्य गतिविधियों को जारी रखने के लिए अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद इस समझौते की घोषणा की थी। ट्रंप ने दावा किया कि रूस अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को बड़ी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराएगा। उनके अनुसार,इस आपूर्ति से ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आने की संभावना है। हालाँकि, जेलेंस्की ने इस पहल को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि एक तरफ युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की जा रही है,वहीं दूसरी ओर रूस को तेल उत्पाद बेचकर आय अर्जित करने का मौका देना विरोधाभासी है।

जेलेंस्की ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि रूस को पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से होने वाली कमाई का लाभ देना शांति की कोशिशों को कमजोर कर सकता है। उनके अनुसार,इस तरह के फैसलों से रूसी नेतृत्व को यह संदेश मिल सकता है कि युद्ध जारी रहने के बावजूद उसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आर्थिक लाभ हासिल करने के रास्ते मिलते रहेंगे।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपनी पोस्ट में कहा कि पुतिन को दिए जाने वाले ऐसे लाभ न तो शांति लाएँगे और न ही दुनिया के लिए कोई सकारात्मक परिणाम देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि रूस डीजल की बिक्री से मिलने वाली आय का इस्तेमाल अपनी सैन्य क्षमता बनाए रखने और युद्ध को आगे बढ़ाने के लिए कर सकता है। जेलेंस्की ने इस व्यवस्था को ऐसे युद्ध में निवेश करने के समान बताया,जिसे समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार दोपहर अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर रूस के राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत को बेहद सफल बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा के बाद रूस की ओर से अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में डीजल की आपूर्ति की योजना बनाई गई है। ट्रंप ने इस समझौते को ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए संकेत दिया कि इससे ईंधन की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

ट्रंप की घोषणा के अनुसार,रूस शुरुआत में तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर के दौरान पाँच लाख टन और फिर अतिरिक्त दस लाख टन डीजल भेजने की योजना बताई गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस व्यवस्था को बड़े पैमाने पर होने वाली आपूर्ति के रूप में पेश किया। उनका दावा था कि बाजार में अधिक ईंधन आने से कीमतों में गिरावट आ सकती है,जिससे उपभोक्ताओं और कारोबारों को राहत मिलने की संभावना होगी।

हालाँकि,इस समझौते को लेकर यूक्रेन की आपत्ति मुख्य रूप से उसके संभावित आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों पर केंद्रित है। जेलेंस्की का मानना है कि रूस को डीजल बेचने से मिलने वाला राजस्व केवल ऊर्जा कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा। उनके अनुसार, रूस को होने वाली अतिरिक्त कमाई का इस्तेमाल युद्ध से जुड़ी गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से यूक्रेनी नेतृत्व इस व्यवस्था को शांति प्रयासों के अनुकूल नहीं मान रहा है।

इस आपूर्ति व्यवस्था को लागू करने के लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी डीजल निर्यात से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी राहत देने वाला लाइसेंस भी जारी किया है। इससे प्रस्तावित आपूर्ति को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है,जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त कराने के लिए अमेरिका अलग-अलग स्तरों पर बातचीत कर रहा है।

प्रतिबंधों में दी गई राहत ने यूक्रेन की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। कीव का मानना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखना युद्ध को रोकने की कोशिशों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यदि रूसी पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री को आसान बनाया जाता है,तो इससे मॉस्को को अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिल सकता है। जेलेंस्की ने इसी पहलू पर जोर देते हुए कहा कि रूस की आय बढ़ने का मतलब युद्ध के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होना भी हो सकता है।

हालाँकि,अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस समझौते के पीछे ईंधन आपूर्ति और कीमतों को लेकर तर्क दिया गया है। ऊर्जा बाजार में उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश और रूस पर दबाव बनाए रखने की नीति के बीच संतुलन बनाना अमेरिका के लिए एक जटिल चुनौती हो सकती है। फिलहाल,इस समझौते के वास्तविक आर्थिक प्रभाव और रूसी राजस्व पर इसके असर का आकलन आपूर्ति की शर्तों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

रूस-अमेरिका डीजल समझौते की घोषणा का समय भी यूक्रेन के राष्ट्रपति की नाराजगी की एक प्रमुख वजह है। उसी दौरान यूक्रेन का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी अधिकारियों के साथ फ्लोरिडा में दो दिनों तक बातचीत कर रहा था। इन बैठकों में युद्ध समाप्त करने के संभावित उपायों पर चर्चा की जा रही थी। बातचीत का एक महत्वपूर्ण विषय ऊर्जा ढाँचे पर हमले रोकने के लिए युद्धविराम की संभावनाओं से भी जुड़ा था।

यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ चर्चा कर रहा था। इन बैठकों का उद्देश्य युद्ध को समाप्त करने के रास्ते तलाशना और संघर्ष को रोकने के लिए संभावित सहमति बनाना था। ऐसे समय रूस के साथ डीजल आपूर्ति समझौते की घोषणा होने से कीव को यह सवाल उठाने का अवसर मिला कि क्या वाशिंगटन की प्राथमिकताएँ यूक्रेन की अपेक्षाओं से अलग दिशा में बढ़ रही हैं।

जेलेंस्की ने संकेत दिया कि फ्लोरिडा में चल रही बातचीत कहीं अमेरिका और रूस के बीच हुए समझौते से ध्यान हटाने का माध्यम तो नहीं बन रही थी। हालाँकि,यह उनकी आशंका और राजनीतिक आकलन था। उनके बयान से स्पष्ट था कि यूक्रेन इस बात को लेकर चिंतित है कि रूस के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने से युद्ध समाप्त करने के लिए बनाए जा रहे दबाव पर क्या असर पड़ेगा।

पत्रकारों से बातचीत में जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेनी प्रतिनिधि अमेरिका में युद्ध रोकने और युद्धविराम सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा करने पहुँचे थे। ऐसे में रूस को डीजल आपूर्ति से जुड़ी बड़ी घोषणा उनके लिए चिंता का विषय बन गई। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब यूक्रेन और अमेरिका के अधिकारी शांति के रास्ते तलाश रहे थे, उसी समय ट्रंप पुतिन के साथ बातचीत कर रहे थे। जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति को इस युद्ध का प्रमुख जिम्मेदार बताया।

जेलेंस्की ने समझौते के संभावित परिणामों को लेकर सबसे अधिक चिंता रूस को मिलने वाले आर्थिक लाभ पर जताई। उन्होंने कहा कि डीजल निर्यात से होने वाली कमाई रूस को युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध करा सकती है। उनके अनुसार,इसका असर केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि यूक्रेन के नागरिकों को भी लंबे समय तक संघर्ष के परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि इस व्यवस्था का मतलब युद्ध के लिए अधिक धन और उनके देश के लोगों को और अधिक पीड़ा पहुँचाने के लिए अतिरिक्त संसाधन हो सकता है। उन्होंने समझौते को मजबूत साझेदारों का कमजोर फैसला बताते हुए कहा कि इससे सबसे अधिक लाभ पुतिन को मिल सकता है। जेलेंस्की का तर्क है कि जिस देश के खिलाफ युद्ध रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं,उसी देश को अतिरिक्त कमाई का अवसर देना रणनीतिक रूप से गलत संदेश दे सकता है।

यूक्रेन की आपत्ति इस व्यापक सवाल से भी जुड़ी है कि युद्ध के दौरान रूस के साथ आर्थिक लेन-देन की सीमा क्या होनी चाहिए। यदि रूस को ऊर्जा उत्पादों की बिक्री से पर्याप्त आय मिलती है,तो कीव की आशंका के अनुसार वह अपने सैन्य अभियानों के लिए संसाधन जुटाने में इसका इस्तेमाल कर सकता है। दूसरी ओर,अमेरिकी पक्ष इस व्यवस्था को ईंधन की आपूर्ति और बाजार की कीमतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बता रहा है।

फिलहाल,रूस-अमेरिका डीजल समझौते को लेकर दोनों पक्षों के दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। ट्रंप इसे ईंधन बाजार के लिए फायदेमंद कदम मान रहे हैं,जबकि जेलेंस्की इसे रूस की आर्थिक और सैन्य स्थिति मजबूत करने वाली व्यवस्था के रूप में देख रहे हैं। इस विवाद का असर अमेरिका,रूस और यूक्रेन के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत पर भी पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डीजल आपूर्ति की योजना किस तरह लागू होती है और क्या इससे ईंधन बाजार को अपेक्षित लाभ मिलता है। साथ ही,यह सवाल भी बना रहेगा कि इस समझौते का युद्ध समाप्त करने की कोशिशों पर कितना प्रभाव पड़ता है।