अभिनेत्री अमृता राव (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

अमृता राव: सादगी,सिद्धांत और सफलता की मिसाल,जिन्होंने ठुकराईं कई बड़ी फिल्में लेकिन नहीं छोड़े अपने उसूल

मुंबई,17 जून (युआईटीवी)- बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई,लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे रहे,जिन्होंने सफलता की ऊँचाइयों पर पहुँचने के बावजूद अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। अभिनेत्री अमृता राव उन्हीं चुनिंदा सितारों में से एक हैं। अपनी सादगी,शानदार अभिनय और पारिवारिक छवि के लिए मशहूर अमृता राव ने न केवल कई सफल फिल्मों में काम किया, बल्कि अपने करियर के दौरान ऐसे फैसले भी लिए,जिन्होंने उन्हें बाकी अभिनेत्रियों से अलग पहचान दिलाई। कई बड़े बैनरों और सुपरस्टार्स की फिल्मों के प्रस्ताव मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी निजी मान्यताओं और काम के प्रति दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी।

7 जून 1981 को मुंबई में जन्मी अमृता राव ने शुरुआती शिक्षा भी मुंबई में ही प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि मॉडलिंग और मनोरंजन जगत की ओर बढ़ने लगी थी। यही कारण रहा कि उन्होंने पारंपरिक करियर के बजाय ग्लैमर इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने कई विज्ञापनों और म्यूजिक वीडियो में काम किया,जहाँ उनकी मासूम छवि और सहज व्यक्तित्व ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

अमृता राव ने वर्ष 2002 में फिल्म ‘अब के बरस’ के जरिए बॉलीवुड में पदार्पण किया। हालाँकि,यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ा कमाल नहीं दिखा सकी,लेकिन उनकी अभिनय क्षमता को सराहा गया। इसी दौरान वह ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ जैसी फिल्म में भी नजर आईं,जहाँ उन्होंने अपने सीमित स्क्रीन समय में भी प्रभाव छोड़ा,लेकिन उनके करियर का वास्तविक मोड़ वर्ष 2003 में आया,जब उन्होंने ‘इश्क विश्क’ में काम किया।

इस फिल्म में उनके साथ शाहिद कपूर मुख्य भूमिका में थे। युवा दर्शकों के बीच यह फिल्म जबरदस्त लोकप्रिय हुई और अमृता राव रातोंरात बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। फिल्म में उनके सरल और आकर्षक किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया। उनकी लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी कि उन्हें आईफा स्टार डेब्यू ऑफ द ईयर सम्मान से भी नवाजा गया। इस सफलता ने उनके लिए फिल्म उद्योग के कई दरवाजे खोल दिए।

इसके बाद अमृता राव ने लगातार कई सफल फिल्मों में अभिनय किया। ‘मस्ती’, ‘मैं हूँ ना’, ‘वाह! लाइफ हो तो ऐसी’ और ‘प्यारे मोहन’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक बहुमुखी अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया,लेकिन जिस फिल्म ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई,वह थी वर्ष 2006 में रिलीज हुई ‘विवाह’। इस फिल्म में उन्होंने पूनम नाम की एक संस्कारी और सरल युवती का किरदार निभाया था। दर्शकों ने इस भूमिका को इतना पसंद किया कि अमृता राव की छवि लंबे समय तक भारतीय पारिवारिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली अभिनेत्री के रूप में बनी रही।

‘विवाह’ की सफलता ने अमृता को लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचा दिया। उनकी सादगी और अभिनय ने लाखों दर्शकों का दिल जीत लिया। फिल्म की अपार सफलता के बाद उनके बारे में यह भी चर्चा हुई कि उन्हें देश और विदेश से विवाह प्रस्ताव मिलने लगे थे। यह उनके प्रभाव और लोकप्रियता का एक अनोखा उदाहरण माना गया।

हालाँकि,बॉलीवुड में सफलता अक्सर कलाकारों को बड़े बैनरों और बड़े सितारों के साथ काम करने के अवसर देती है,लेकिन अमृता राव ने हमेशा अपने लिए कुछ स्पष्ट सीमाएँ तय कर रखी थीं। उन्होंने कई बार ऐसे प्रस्तावों को अस्वीकार किया,जो उनके व्यक्तिगत सिद्धांतों और पेशेवर दृष्टिकोण से मेल नहीं खाते थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार,रणबीर कपूर अभिनीत फिल्म ‘बचना ऐ हसीनों’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका के लिए सबसे पहले अमृता राव से संपर्क किया गया था,लेकिन फिल्म में किसिंग सीन होने के कारण उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। यह फैसला उस समय काफी चर्चा में रहा क्योंकि फिल्म एक बड़े बैनर की थी और इसके जरिए उन्हें एक महत्वपूर्ण करियर अवसर मिल सकता था। हालाँकि,अमृता ने अपने सिद्धांतों को प्राथमिकता दी और फिल्म का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया।

इसी तरह,उन्होंने ‘नील एन निक्की’ जैसी फिल्म में भी काम करने से मना कर दिया था। बताया जाता है कि फिल्म की बोल्ड थीम और कुछ दृश्यों के कारण उन्होंने यह निर्णय लिया। उस दौर में जब बॉलीवुड तेजी से बदल रहा था और ग्लैमरस भूमिकाओं का चलन बढ़ रहा था,अमृता ने अपनी अलग राह चुनी और अपने दर्शकों के बीच बनी पारिवारिक छवि को बनाए रखा।

सलमान खान की सुपरहिट फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ भी उन फिल्मों में शामिल है,जिन्हें अमृता राव ने अस्वीकार किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें फिल्म में सलमान खान की बहन की भूमिका की पेशकश की गई थी,लेकिन उन्होंने यह किरदार निभाने से इनकार कर दिया। हालाँकि,इस निर्णय के पीछे की वास्तविक वजह पर अलग-अलग चर्चाएँ होती रही हैं,लेकिन यह स्पष्ट है कि अमृता ने अपने करियर के फैसले हमेशा सोच-समझकर लिए।

फिल्मी सफर में सफलता के साथ-साथ उन्हें चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। कई फिल्मों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली,लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। ‘वेलकम टू सज्जनपुर’, ‘जॉली एलएलबी’, ‘सिंह साब द ग्रेट’, ‘सत्याग्रह’ और ‘ठाकरे’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का अलग-अलग रूप प्रस्तुत किया। इन फिल्मों ने यह साबित किया कि वह केवल रोमांटिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं,बल्कि गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदार भी प्रभावशाली ढंग से निभा सकती हैं।

बॉलीवुड के अलावा अमृता राव ने छोटे पर्दे पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने टीवी धारावाहिक ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ के जरिए टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा। इस शो में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। यह साबित करता है कि वह किसी भी माध्यम में अपने अभिनय का प्रभाव छोड़ने में सक्षम हैं।

पुरस्कारों की बात करें तो अमृता राव को अपने करियर में कई सम्मान प्राप्त हुए। ‘इश्क विश्क’ के लिए उन्हें आईफा पुरस्कार मिला,जबकि अन्य फिल्मों के लिए भी उन्हें कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड समारोहों में सम्मानित किया गया। ‘मैं हूँ ना’ में उनके प्रदर्शन को भी काफी सराहना मिली और उन्हें फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री वर्ग में नामांकन प्राप्त हुआ।

निजी जीवन में भी अमृता राव ने हमेशा सादगी को महत्व दिया। उन्होंने रेडियो जॉकी अनमोल सूद के साथ विवाह किया और आज वह अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिता रही हैं। फिल्मी दुनिया की चमक-दमक के बीच भी उन्होंने अपने निजी जीवन को संतुलित रखा और विवादों से दूर रहने की कोशिश की।

आज जब बॉलीवुड में सफलता को अक्सर ग्लैमर और चर्चाओं से जोड़ा जाता है,अमृता राव का करियर एक अलग उदाहरण पेश करता है। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा,मेहनत और अपने सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के बल पर भी लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में जगह बनाई जा सकती है। कई बड़े अवसरों को ठुकराने के बावजूद उन्होंने जो पहचान हासिल की,वह उनकी अभिनय क्षमता और व्यक्तित्व की ताकत को दर्शाती है। यही कारण है कि अमृता राव आज भी हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं,जिन्होंने अपने उसूलों से समझौता किए बिना सफलता का मुकाम हासिल किया।