नई दिल्ली,30 अक्टूबर (युआईटीवी)- बिहार के मोकामा से विधायक रहे अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने की माँग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें एक दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने इस हत्याकांड की जाँच चार महीने के भीतर पूरी करने का आदेश भी दिया है। इस फैसले से मामले में एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी,जिसे मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
दुलारचंद यादव की हत्या बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान हुई थी। 30 अक्टूबर को पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल के बसावनचक गाँव में जन सुराज पार्टी के एक उम्मीदवार के समर्थक दुलारचंद यादव की जान चली गई थी। घटना के समय मोकामा सीट से तत्कालीन जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसी टकराव के दौरान दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी और पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की थी।
इस हत्याकांड में अनंत सिंह को आरोपी बनाए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। मामले में निचली अदालत से उन्हें राहत नहीं मिली थी। एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने 19 मार्च को अनंत सिंह को जमानत दे दी थी। अदालत के आदेश के बाद 23 मार्च को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था।
हालाँकि,हाईकोर्ट से मिली इस राहत को मृतक के परिवार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने जमानत रद्द करने की माँग करते हुए याचिका दाखिल की थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को एक दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की जाँच चार महीने में पूरी करने के लिए भी कहा है। इस आदेश के बाद अब अनंत सिंह को तय समयसीमा के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष सरेंडर करना होगा।
दुलारचंद यादव की मौत को लेकर पीड़ित परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि घटना के दौरान धर्मवीर सिंह और कर्मवीर सिंह ने दुलारचंद यादव को जबरदस्ती उनकी गाड़ी से बाहर खींच लिया था। इसके बाद आरोपियों और उनके साथ मौजूद लोगों ने कथित तौर पर उन्हें गाड़ी से कुचल दिया और गोली भी मारी। परिवार का आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर मामले में आरोपियों की भूमिका की जाँच की जा रही है।
हालाँकि,पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह को लेकर अलग जानकारी सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, दुलारचंद यादव की मृत्यु गोली लगने से नहीं हुई थी। उनकी मौत का कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर यानी हृदय और श्वसन तंत्र का काम करना बंद कर देना बताया गया था। रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों का भी उल्लेख था। इन चोटों को किसी भारी वाहन की टक्कर से लगने वाली चोटों के अनुरूप बताया गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच सामने आए तथ्यों की जांच इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दुलारचंद यादव हत्याकांड में गिरफ्तारी के बावजूद अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए बिहार विधानसभा चुनाव 2025 लड़ा था। मोकामा सीट से चुनाव मैदान में उतरे अनंत सिंह ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को हराया था। चुनाव के दौरान उनकी गिरफ्तारी और जेल में रहने के बावजूद चुनाव लड़ने का मामला काफी चर्चा में रहा था। जीत के बाद भी इस हत्याकांड में कानूनी कार्रवाई जारी रही।
राज्यसभा चुनाव के दौरान भी अनंत सिंह जेल से विधानसभा पहुँचे थे और उन्होंने मतदान में हिस्सा लिया था। इस दौरान उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी चर्चा हुई थी। हालाँकि,अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद उनके सामने सरेंडर करने की समयसीमा तय हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर का आदेश देने के साथ जाँच को लेकर भी स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है। अदालत ने निर्देश दिया है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड की जाँच चार महीने के भीतर पूरी की जाए। इससे मामले में जाँच एजेंसियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब निर्धारित अवधि में घटना से जुड़े आरोपों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की जाँच पूरी करनी होगी।
इस पूरे मामले में अदालत का ताजा आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अनंत सिंह को पहले हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी और वह जेल से बाहर आ गए थे। मृतक के परिवार की ओर से जमानत को चुनौती दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने का निर्देश दिया है। अब एक दिसंबर तक उनके अगले कदम पर नजर रहेगी। वहीं, चार महीने में जाँच पूरी होने के बाद हत्याकांड से जुड़े तथ्यों और आरोपों को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
